हर युवती अच्छे जीवनसाथी की कामना करती है। आने वाला दाम्पत्य जीवन सुखी रहे, इसके लिए युवतियां कई व्रत और पूजा-पाठ करती हैं। वहीं, सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की अखंडता के लिए ईश्वर से सदैव प्रार्थना करती हैं। इन्हीं मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए एक व्रत हरितालिका तीज भी है। आइए जानें कि ये व्रत किसे कैसे लाभ देगा-
महिलाओं के लिए साल का सबसे कठिन व्रत माना जाने वाला कजरी हरितालिका तीज व्रत 12 सितंबर बुधवार को पड़ रहा है। सुहाग की मंगलकामना और सुख-समृद्धि के लिए मंगलवार को आधी रात से महिलाएं व्रत शुरू करेंगी। बुधवार को दिन भर भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया हरितालिका तीज का व्रत रखेंगी।
लखनऊ के आचार्य प्रदीप तिवारी के मुताबकि कुंवारी युवतियां अगर हरितालिका तीज का व्रत करती हैं तो उन्हें विशेष फल प्राप्त होता है। इसके लिए युवतियां निर्जला व्रत रखते हुए सुहागिन महिलाओं की तरह ही पूजन-अर्चन करें।
इसके लिए मिट्टी से शिव परिवार बनाएं। स्नान-अर्चन के बाद व्रती महिलाएं और युवतियां साफ-सुथरे और सुंदर वस्त्र पहनें। सुहागिनें खुद का पूरा श्रृंगार करें। फिर शिव परिवार को दूध, दही, घी, मधु, शर्करा और सफेद मिष्ठान्न युक्तभोग लगाकर यथायोग्य विभिन्न प्रकार के आभूषण और नव वस्त्र अर्पित करने चाहिए।
आचार्य कहते हैं कि तीज पर चार पहर भगवान शिव और मां पार्वती की उनके परिवार समेत पूजा-अर्चना करने का विधान है। हरितालिका तीज की कथा सुनने के बाद शाम, आधी रात और फिर अगले दिन सुबह पूजन के बाद व्रत का पारण करना चाहिये। इस बीच महिलाओं को रात भर भजन-कीर्तन कर पूजन करनी चाहिये। पूजन के बाद बहते पानी में शिव परिवार मूर्ति और पूज्य पदार्थों को विसर्जित कर देना चाहिये।