'कैलेंडर गर्ल्स' नहीं लखनऊ आए इन 'कैलेंडर जी' से मिलिए
मेरा नाम है कैलेंडर से मटकते हुए सतीश कौशिक हों या गोविंदा को बेवकूफ बनाकर उनका टिफिन खा जाने वाले कुंज बिहारी। ऐसे दर्जनों यादगार कैरेक्टर के जरिये फैन्स के चहेते बने अभिनेता सतीश कौशिक का मानना है कि लोग उन्हें उनके असली नाम से नहीं बल्कि कैरेक्टर के नाम से ज्यादा जानते हैं।
'कैलेंडर गर्ल्स' नहीं लखनऊ आए इन 'कैलेंडर जी' से मिलिए
सतीश कहते हैं कि लोग उनको उसी नाम से पुकारते हैं, यही उनकी कामयाबी का सर्टिफिकेट है। अपने नए टीवी शो ‘सुमित संभाल लेगा’ के प्रमोशन के लिए शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे सतीश ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत की।
'कैलेंडर गर्ल्स' नहीं लखनऊ आए इन 'कैलेंडर जी' से मिलिए
अपने आने वाले नए सीरियल में खुद के रोल के बारे में बताते हुए सतीश कहते हैं कि यह दिल्ली के कल्चर वाला एक रिटायर्ड बुड्ढा है, जो इतने उल्टे काम करता है जैसा कोई दूसरा नहीं कर सकता। इसे बेडरूम और किचन का कोई फर्क नहीं पता। क्रिकेट मैच भी देखता है तो टांगें पसार कर, मोहल्ले भर का पॉपकॉर्न साथ लेकर। हर काम करना चाहता है लेकिन मस्तमौला होकर।
'कैलेंडर गर्ल्स' नहीं लखनऊ आए इन 'कैलेंडर जी' से मिलिए
खुद की अब तक की उपलब्धि पर सतीश कहते हैं कि भई कुछ नाम तो कमाया है। मुझसे मिलने वाला हर दूसरा आदमी मेरा नाम तक नहीं जानता। लोग कैलेंडर, कोई कुंज बिहारी, मुत्थुस्वामी, सेठजी.. नामों से ही मुझे पुकारते हैं। अक्सर लोग प्लेन में सफर करते समय या मॉल्स में मेरे पास आकर कहते हैं कैलेंडरजी एक सेल्फी लेनी है...। ये मेरे कैरेक्टर की मेहनत और फैन्स के प्यार का सर्टिफिकेट है।
'कैलेंडर गर्ल्स' नहीं लखनऊ आए इन 'कैलेंडर जी' से मिलिए
लखनऊ से जुड़े अपने अनुभवों पर सतीश कहते हैं कि 1976 में रंजीत कपूर के लिए एक प्ले ‘बिच्छू’ में आया था। तब का लखनऊ एकदम से बदल चुका है। मेट्रो चलने वाली है, बड़े-बड़े हाईवे बन गए हैं, एयरपोर्ट का भी विदेशों सा लुक दिखता है। बहुत तेजी से बदल रहा है यह शहर। विकास की नई राहें खुली दिखती हैं इस शहर में।