2019 में लोकसभा चुनाव में सपा व बसपा के बीच गठबंधन को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इस संबंध में जब बसपा सुप्रीमो मायावती से सवाल किया गया तो उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। यहां तक कि ईवीएम के मुद्दे पर सपा के आमंत्रण के बावजूद बैठक में किसी को न भेजने के सवाल पर भी उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। बल्कि ये कहा कि ईवीएम का मुद्दा सबसे पहले मैंने ही उठाया, सुप्रीमकोर्ट तक गई।
2019 के चुनाव में सपा के साथ गठबंधन की संभावना पर मायावती ने दिया ऐसा रिएक्शन, यहां देखें
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मायावती ने कहा, कि बसपा अंबेडकरवादी पार्टी है। पूर्व की कांग्रेस सरकारों की तरह भाजपा की सरकार में भी बसपा को किस्म-किस्म के हथकंडे अपनाकर कमजोर करने व खत्म करने की कोशिश की जा रही है। मायावती ने आरोप लगाया कि गुजरात में दलित समाज के जिग्नेश मेवाणी को कांग्रेस पर्दे के पीछे समर्थन कर रही है।
उन्होंने कहा कि जिग्नेश ने आजाद उम्मीदवार के रूप में जो यह चुनाव जीता, लेकिन जीत अकेले दलितों के वोटों से न होकर कांग्रेस व हार्दिक पटेल के समर्थन से हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत जिग्नेश की सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। अब कांग्रेस पर्दे के पीछे रहकर जिग्नेश को देश में जगह-जगह भेजकर फायदा उठाना चाहती है। उन्होंने कहा कि दलितों को इससे सावधान रहने की जरूरत है।
उन्होंने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि 2014 में लोकसभा चुनाव और 2017 में बसपा के प्रभाव वाले यूपी व उत्तराखंड के चुनाव में इसने ईवीएम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर जबर्दस्त राजनैतिक नुकसान पहुंचाया। इसके बाद सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर गांव में क्षत्रियों व दलितों के बीच में भयंकर जातीय संघर्ष करवाकर बसपा को खत्म करने की कोशिश की। फिर राष्ट्रपति पद पर दलित उम्मीदवार उतारकर दलित-कार्ड खेलने की कोशिश की।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि लेकिन मेरे सूझ-बूझ से भाजपा का गेम-प्लान फेल हो गया। इसका नतीजा ये हुआ कि बाद में उन्हें राज्यसभा में ठीक से बोलने नहीं दिया गया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी एंड कम्पनी के लोग चोर-चोर मौसेरे भाई नजर आते हैं।
जन-कल्याणकारी दिवस में रूप में मना जन्मदिन
बसपा ने मायावती का जन्मदिन जन-कल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया। जिला स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में अति-जरूरतमंदों व नोटबंदी आदि से पीड़ित परिवारों की विभिन्न रूपों में सहायता की गई। मायावती ने कहा कि नोटबंदी से देश में आर्थिक इमरजेंसी जैसे हालत बना दिए गए जिससे लोग अभी तक नहीं उबर पाए हैं। जन्मदिन पर आयोजित प्रेस-कांफ्रेंस को सभी जिला मुख्यालयों पर लाइव दिखाने की व्यवस्था की गई। इसके अलावा फेसबुक पर लाइव भी किया गया।
न्यायपालिका का आपस में भिड़ना चिंताजनक
मायावती ने सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों के विवाद पर कहा कि एक ऐसे समय में जब विपक्ष लगभग ना के बराबर रह गया हो और न्यायापालिका खुद विपक्ष की भूमिका अदा कर रहा हो। इस माहौल में न्यायपालिका खुद ही आपस में भिड़ी हुई है जो काफी चिंता की बात है।