खुशनुमा सुबह और भी दिलकश बन जाती है, जब करने को मिले बागों की सैर और चखने को मिले आम का स्वाद। यह खास लम्हे लखनऊ के लोगों के हिस्से भी आए, मौका था यूपी मैंगो फैस्टिवल के तहत बागों की सैर का। काकोरी के सौ साल पुराने बाग में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए।
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मैंगो फैस्टिवल
- फोटो : amar ujala
खास बात रही कि कागज की चिड़िया, तितलियां और फूलों से सजे बागों में जगह-जगह खड़ी बैलगाड़ियां और उसमें सवार पूरा का पूरा परिवार, बागों की सैर में मगन था। छह साल पहले इस महोत्सव की शुरुआत हुई थी। आयोजक व संस्थापक ज्योत्सना हबीबुल्लाह ने बताया कि इसका मकसद छोटे किसानों की मदद, ईको टूरिज्म को बढ़ावा देना और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
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मैंगो फैस्टिवल
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हर साल यह एक विशेष बाग में आयोजित होता है, इस बार अपने बाग को विशेष रूप से संरक्षित करने का प्रयास कर रहे शाहिद अब्बासी के यहां बागों की सैर का आयोजन किया गया।
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मैंगो फैस्टिवल
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आम खाने की प्रतियोगिता से आगाज, समापन काकोरी कबाब पर
बागों की सैर के बाद बारी थी मनोरंजन से भरपूर विभिन्न प्रतियोगिताओं की। इसमें सैक रेस, स्पून रेस, तांगा-बैलगाड़ी व घुड़दौड़ में बच्चों से लेकर बड़ों तक ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। म्यूजिकल चेयर, फोटोग्राफी प्रतियोगिता भी हुई। पर दिल जीता आम खाने की प्रतियोगिता में, जिसमें हर किसी ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। (इस दौरान लोगों ने खूब फोटोग्राफी भी की।)
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मैंगो फैस्टिवल
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इस दौरान कव्वाली का भी आनंद उठाया दर्शकों ने। वहीं इस खुशनुमा सुबह का समापन गरमागरम बने काकोरी कबाब व तंदूरी रोटी से हुआ। इस मौके पर नाबार्ड व उद्यान विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। (लोग परिवारीजनों सहित फेस्टिवल में शामिल हुए।)