बसपा के पूर्व सांसद दाउद अहमद के रिवर बैंक कॉलोनी में चार मंजिला अवैध निर्माण को होता देखने वाले विभाग हाईकोर्ट से निर्माण पर कोई राहत न मिलने के बाद जागे। पांच विभागों के अफसर-कर्मचारी रविवार सुबह पांच बजे ही बिल्डिंग ढहाने पहुंच गए। हालांकि, जल्दबाजी में इसके सामने के सारे कॉलम खोखले कर दिए, जिससे इमारत एकाएक ढह गई। इससे अवैध निर्माण गिराने में लगी पोकलैंड मशीन भी ड्राइवर शोएब सहित मलबे में दब गई। वहीं, कार्रवाई से इमारत के आसपास के मकानों में भी दरारें आ गईं। जल निगम के निर्माणाधीन नाले को भी नुकसान पहुंचा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संयुक्त महानिदेशक ने शनिवार को बिना पुरातत्व एनओसी के बना अवैध निर्माण तोड़ने के लिए डीएम को अधिकृत करने का आदेश दिया था। इसके बाद आनन-फानन रविवार तड़के ही प्रशासन, एलडीए, नगर निगम, पुलिस, लेसा की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गई। यह अपार्टमेंट रिवर बैंक कॉलोनी के पीछे हाफिज डेयरी के सामने था। दोपहर में करीब एक बजे बिल्डिंग के सामने के हिस्से के अंतिम कॉलम को मशीन ने जैसे ही खोखला किया, इमारत कुछ सेकंड में ताश के पत्ते की तरह बिखर गई। इससे पोकलैंड चला रहे ड्राइवर को निकलने का मौका तक नहीं मिला। दूसरी जेसीबी से उसे निकालने का काम शुरू हुआ। आधे घंटे की मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त पोकलैंड मशीन का दरवाजा काटकर शोएब को निकाला गया। उसे सिर, चेहरे, हाथ व पैरों के अलावा अंदरूनी चोटें भी आईं। ड्राइवर को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां से देर शाम उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
बचाव कार्य कराने के बजाय चलता बने अफसर
बिल्डिंग तोड़वा रहे दो एडीएम, एलडीए के ओएसडी व अन्य अधिकारी हादसे के बाद चालक को निकलवाने के बजाय मौके से निकल गए। इसके बाद एडीसीपी राजेश श्रीवास्तव और एलडीए के अधिशासी अभियंता कमलजीत सिंह ने ड्राइवर को निकलवाया। एसडीआरएफ की टीम भी इसके बाद ही पहुंची।
तड़के ही गोरखपुर से बुला लिया था चालक
हाईकोर्ट से दाउद अहमद की याचिका खारिज होने का आदेश शनिवार को अपलोड हुआ। इसके तुरंत बाद एएसआई ने भी डीएम को अधिकृत कर 15 दिन में अवैध निर्माण तोड़ने का आदेश कर दिया। रविवार सुबह पांच बजे से बिल्डिंग तोड़ने की कवायद शुरू हो गई। इसके लिए गोरखपुर से पोकलैंड के ड्राइवर शोएब को तड़के ही बुलाया गया था। करीब साढ़े आठ बजे से अवैध निर्माण टूटना शुरू हुआ। दो बजे तक काम खत्म करने का लक्ष्य भी अधिकारी लिए थे। इससे पहले ही एक बजे पूरी बिल्डिंग ढह गई।
तमाशबीन बने रहे एलडीए-नगर निगम के इंजीनियर
अवैध निर्माण तोड़ने के लिए प्रयागराज से एक्सपर्ट आलोक पांडेय को बुलाया गया था। प्रयागराज विकास प्राधिकरण में ओएसडी के पद पर तैनात आलोक पांडेय लखनऊ का कैरियर डेंटल कॉलेज भी तोड़वा चुके हैं। वह खुद पोकलैंड के ड्राइवर को बताते रहे कि कॉलम को कहां खोखला करना है। इस दौरान एलडीए और नगर निगम के अभियंता केवल तमाशबीन बने रहे।
दावा- विशेषज्ञ ने तोड़वाए हैं 10 हजार अवैध निर्माण
जिला प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि आलोक पांडेय प्रयागराज में अतीक अहमद, विजय मिश्रा समेत अब तक करीब 10 हजार अवैध निर्माण तोड़वा चुके हैं। विशेषज्ञता को देखते हुए ही उन्हें बिल्डिंग तोड़ने के लिए बुलाया गया था। वहीं, आलोक पांडेय का कहना है कि एहतियातन आसपास के मकान और झुग्गियां खाली करा ली गई थीं। बिल्डिंग योजना के मुताबिक ही ढही है। केवल पोकलैंड पर मलबे का एक हिस्सा गिर गया। सड़क तक पर मलबा नहीं आया। आसपास के मकानों में भी कोई दिक्कत नहीं आई है।