बच्चों में दिल की बीमारियों को जन्मजात बीमारी मान लिया जाता है, लेकिन बड़ी संख्या में रुमैटिक बुखार की वजह से भी दिल की बीमारियां हो रही हैं। गले में स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया के संक्रमण के बाद तेज बुखार होता है। साथ ही शरीर में सूजन आ जाती है।
हो जाएं सतर्कः रुमैटिक बुखार से खराब हो रहे बच्चों के दिल के वॉल्व, शरीर में सूजन समेत ये हैं लक्षण
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डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस रुमैटिक हार्ट डिजीज में बच्चे के शरीर में बनने वाले एंटी बॉडीज प्रभावित होते हैं। इसलिए बच्चों के गले में संक्रमण, तेज बुखार को गंभीरता से लेना चाहिए। हालांकि मिनिमल सर्जरी शुरू होने से इसका इलाज काफी आसान हो गया है।
अब हार्ट को खोलने की जरूरत नहीं पड़ती है। हाथ के नीचे और छाती के पास छोटा सा छेद करके भी वॉल्व दुरुस्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि तत्काल इलाज शुरू हो जाए तो इन बीमारियों से बचाया जा सकता है। बाल रोग विशेषज्ञों को हार्ट डिजीज के बारे में भी प्रशिक्षित करने की जरूरत है।
एक मंच पर अलग-अलग विधा के विशेषज्ञों को लाने से चिकित्सकीय व्यवस्था में सुधार होगा। कार्यशाला का उद्घाटन लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी ने किया। उन्होंने संस्थान में हृदय रोग संबंधी सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का वादा किया।
इस दौरान एसजीपीजीआई के सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल गुप्ता, केजीएमयू के डॉ. शैलेंद्र कुमार, डॉ. एसवी सिंह, डॉ. केएस दवे, डॉ. जेएल साहनी ने संबोधित किया। कार्यशाला में करीब 150 कार्डियक सर्जन ने हिस्सा लिया।
वक्त पर इलाज से बचेगा दिल
अचानक सिर में तेज दर्द होने लगे और सीने के साथ ही पीठ में भी दर्द हो तो यह एओटिक डिफेक्शन नामक बीमारी के लक्षण हैं। इसमें दिल से शरीर को खून की आपूर्ति करने वाले नर्स क्षतिग्रस्त हो जाती है। अंगों को ठीक से खून नहीं मिल पाता है। ऐसे मरीजों को तुरंत कार्डियक सर्जन की सलाह लेनी चाहिए। जितनी जल्दी चिकित्सक के पास पहुंचेंगे, दिल के बचने की संभावना उतनी अधिक होती है। - डॉ. धर्मेंद्र श्रीवास्तव, लोहिया संस्थान
हृदय रोग की मूल वजह तनाव, ब्लड प्रेशर, खानपान और बेढंगी जीवनशैली है। कई बार ब्लड प्रेशर व तनाव के कारण दिल से शरीर के अंगों को खून पहुंचाने वाली नस क्षतिग्रस्त हो जाती है। इससे अंगों को भरपूर खून नहीं मिल पाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत गुर्दा, आंत, पैर, दिमाग, पेट समेत दूसरे अंगों को होता है। किसी भी अंग में अचानक तेज दर्द हो तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। - डॉ. अमित चौधरी, सैफई
अचानक घबराहट होने लगे और दिल की धड़कन बढ़कर 100 से अधिक हो जाए। पसीना छूटने लगे और सांस फूलने लगे तो दिल की धड़कन की जांच करानी चाहिए। करीब 30 फीसदी मरीजों में इस तरह की समस्या पाई जाती है। ऐसे मरीजों को नियमित रूप से अपनी जांच कराने के साथ के ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने का प्रयास करना चाहिए। - डॉ. शांतनु पांडेय, एसजीपीजीआई