लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें अभय नाथ त्रिपाठी की अलग पहचान थी। उनकी पहचान जनता का विश्वास जीतने वाले पुलिस अधिकारी के रूप में है।
सुलझे हुए व्यक्तित्व के चलते जनता के प्रिय रहे ये अफसर, दंगा नियंत्रण के लिए अपनाई अनोखी रणनीति
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अभय नाथ त्रिपाठी को परंपरागत पुलिसिंग का माहिर अफसर माना जाता है। उन्होंने पुलिसिंग में काफी प्रयोग किए। वर्ष 2000 बैच के पीपीएस अधिकारी अभय नाथ त्रिपाठी अक्तूबर 2014 में राजधानी आए थे। यहां दिसंबर 2016 तक उनका कार्यकाल रहा। इस दौरान उन्हें महानगर, चौक, मलिहाबाद व कैसरबाग जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सर्किल की जिम्मेदारी दी गई।
अभय नाथ त्रिपाठी अपने सुलझे हुए व्यक्तित्व और सोच के चलते हमेशा जनता के प्रिय अफसर रहे। कैसरबाग इलाके में दंगे के बाद उन्हें सर्किल भेजा गया था। उन्होंने दंगा नियंत्रण के लिए अनोखी रणनीति अपनाई। इलाके के हर संवेदनशील मुहल्ले और गलियों को चिह्नित कर वहां पांच-पांच लोगों की टीम बनाई।
उन दिनों लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र गुटों का उत्पात, आपसी झगड़े में पथराव और फायरिंग की घटनाएं कुछ ज्यादा होती थीं। अभय नाथ त्रिपाठी को महानगर सर्किल की कमान मिली तो उन्होंने सबसे पहले विश्वविद्यालय में फैली अराजकता पर लगाम कसी। उनका मानना था कि विश्वविद्यालय के छात्रों पर नियंत्रण से आसपास के इलाके में शांति व्यवस्था कायम रखी जा सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालय में नियमित भ्रमण और स्टाफ व छात्रों से संवाद कर वहां के माहौल को शांत बनाए रखा।