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इन आईपीएस ने ईमानदारी-संवेदनशीलता से जीता लोगों का विश्वास, सिर्फ उपस्थिति से ही हो जाता माहौल शांत

Thu, 25 Apr 2019 04:51 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 25 Apr 2019 04:51 PM IST
know about IPS jay prakash
आईपीएस जय प्रकाश - फोटो : amar ujala

लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें आईपीएस जय प्रकाश की अलग पहचान है। उनकी ईमानदारी और पीड़ित के प्रति संवेदनशीलता को पुलिसकर्मी ही नहीं शहर के लोग भी याद करते हैं। 

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डेमो

पुलिस अफसरों की इमानदारी की चर्चा होते ही पुलिसकर्मियों की जुबान पर जय प्रकाश का नाम जरूर आता है। छुट्टी लेने के साथ सरकारी वाहन छोड़ सिटी बस व ऑटो में सफर करने में कभी हिचक महसूस नहीं की। राजधानी में सीओ हजरतगंज, अपर पुलिस अधीक्षक नगर पश्चिम व ट्रांसगोमती रहे जय प्रकाश की इमानदारी के साथ पीड़ित के प्रति संवेदनशीलता एक मिसाल है।

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दफ्तर में मिलने आए दोस्तों के लिए चाय मंगाते वक्त जेब से पैसे देकर ही अर्दली को भेजते थे। एक कोतवाल ने उनके दफ्तर में मेहमान को जाते देख जूस भेजने पर फटकार सुनी तो अन्य थानेदार भी खातिरदारी की हिम्मत नहीं जुटा सके। परिवारीजनों द्वारा नए टीवी की मांग करने पर उन्होंने नाका इलाके की एक दुकान पर पुराना टीवी बेचा और कुछ रुपये मिलाकर दूसरा टीवी घर ले गए।
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IPS Officer
पुलिस लाइन के ट्रांजिट हॉस्टल में रह रहे परिवारीजन अन्य अफसरों के ठाठबाट की चर्चा करते तो जय प्रकाश अपने वेतन से ही सुविधाएं मुहैया कराने की बात कहकर शांत करा देते। इमानदारी के साथ उनकी निष्पक्षता ने पीड़ितों को इंसाफ दिलाया। कोई संगीन वारदात हो या मामूली शिकायत वह विश्वस्त पुलिसकर्मियों से जांच कराकर पीड़ित को इंसाफ दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
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राजनेताओं, अफसरों व कद्दावर लोगों द्वारा की गई सिफारिश को शालीनता के साथ सुनते और पीड़ित के खिलाफ दबाव महसूस होते ही सिफारिश मानने से इन्कार कर देते थे। आलम यह हुआ कि उनके क्षेत्र के पुलिसकर्मी किसी मामले में खेल करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते और नागरिक उन पर भरोसा करते थे। पीड़ित व्यक्ति उनके कक्ष में बेधड़क दाखिल होते और दलाल चौखट पर भी नहीं फटकते थे।

 
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