लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें आईपीएस हरीश कुमार को लोग पीड़ितों के मददगार के रूप में याद करते हैं।
लखनऊ के दो क्षेत्रों में लंबे समय तक अपर पुलिस अधीक्षक नगर रहे हरीश कुमार देर रात तक न सिर्फ गश्त करते बल्कि आधी रात को प्रमुख चौराहों पर इलाके के थानेदारों की बैठक करके साथ अपराधियों की धरपकड़ के लिए दबिश टीमें भेजते थे।
पुलिस अधिकारी के रूप में अपराधियों पर शिकंजा कसने वाले हरीश कुमार ने पीड़ितों के मददगार के रूप में नागरिकों का विश्वास जीतापत्नी को पढ़ाने के लिए दिन में मजदूरी और रात में रिक्शा चलाने वाले दिव्यांग की खबर पढ़कर उन्होंने सरकारी योजनाओं के तहत सहायता दिलाने में हर प्रयास के साथ दिव्यांग को सरकारी नौकरी दिलाई। उसकी पत्नी ने स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
कृष्णानगर इलाके से एक बच्चे के अपहरण पर हरीश कुमार ने सर्विलांस टीम को साथ लेकर लोकेशन ट्रेस करते हुए बदमाशों का पीछा किया और अपहरणकर्ताओं को उन्नाव में दबोचने के साथ बच्चे को चंगुल से छुड़ाया।
राजधानी में पांच साल तैनात रहे हरीश कुमार दिवाली के मौके पर अनाथ बच्चों के साथ फुलझड़ी जलाने के साथ मिठाई बांटकर अपने घर में दीपक जलाते थे। अनाथ बच्चों के साथ दिवाली मनाने की एक बड़ी फोटो अपने दफ्तर के बाहर लगा रखी थी। दफ्तर में फोटो के सामने ठिठकते और ईश्वर को याद करके कक्ष में प्रवेश करते थे।