फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

बदलिए लाइफ स्टाइलः प्रोस्टेट के रोगों से बचना है तो न लगातार बैठें, न खड़े रहें

Mon, 08 Apr 2019 04:07 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 08 Apr 2019 04:07 PM IST
विज्ञापन
know about diseases of prostate and its treatments
डेमो - फोटो : amar ujala
अगर आपकी उम्र 50 से ज्यादा है और बार-बार पेशाब जाने की समस्या होती है तो इसे नजरअंदाज न करें। यह बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी (बीपीएच) की वजह से हो सकती है। आसान शब्दों में कहें तो यह समस्या पौरुष ग्रंथि यानी प्रोस्टेट ग्लैंड के बढ़ने की वजह से हो सकती है। इलाज नहीं कराने से संक्रमण बढ़ सकता है। यहां तक कि कैंसर का भी रूप ले सकता है। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एसएन शंखवार से आसान शब्दों में जानें इस बीमारी और इसके बेहतर इलाज के बारे में जिसे आपका जानना जरूरी है...
know about diseases of prostate and its treatments
डॉ एसएन शंखवार - फोटो : amar ujala
सवाल-  बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी है क्या?
प्रोस्टेट पुरुषों में एक अखरोट के आकार की ग्रंथि होती है, जो पेशाब की थैली के निचले हिस्से में होता है और मूत्रमार्ग को चारों ओर से घेरे रहता है। यह वीर्य में जाने वाले फ्लूड को बनाता है। बिनाइन से तात्पर्य है कि जो खतरनाक न हो। हाइपरट्रॉफी यानी आकार बढ़ना। इसे आसान शब्दों में कहें तो यह पौरुष ग्रंथि के बढ़ने की बीमारी है। इसके बढ़ने पर पेशाब के रास्ते में रुकावट आ जाती है।
इसे हमें जानने की जरूरत क्यों?
 50 की उम्र वाले हर तीन से चार लोगों में एक व्यक्ति को प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या होती है। 70 की उम्र तक पहुंचने वालों में 90 फीसदी लोगों में यह समस्या होती है। किसी को ज्यादा होती है तो किसी को कम। केजीएमयू के  यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में ही प्रतिदिन इस बीमारी से परेशान करीब साढ़े तीन सौ मरीज आते हैं।
know about diseases of prostate and its treatments
डेमो
आम आदमी कैसे जान सकता है कि वह इस बीमारी की चपेट में आ रहा है?
 इस बीमारी के चलते पेशाब करने के पैटर्न में बदलाव महसूस होता है।  आसान शब्दों में कहें तो रात में चार-पांच बार पेशाब आने लगती है। पेशाब तो लगती है, लेकिन होती नहीं है। इससे बेचैनी रहती है। यदि संक्रमण बढ़ गया है तो पेशाब के साथ खून भी आता है। कई बार पेट के निचले हिस्से में दर्द भी होने लगता है। वहीं कई मामलों में पेशाब लगने पर उस पर नियंत्रण नहीं हो पाने की समस्या देखी जाती है।
इसके लिए कौन-कौन सी जांचें कराई जाती हैं?
आमतौर पर 40 साल के बाद सालभर में एक बार हर व्यक्ति को जांच करानी चाहिए। पहले अल्ट्रासाउंड के जरिए प्रोस्टेट की स्थिति का आकलन किया जाता है। सामान्य तौर पर प्रोस्टेट का आकार करीब 25 से 30  क्यूबिक सेंटीमीटर (सीसी) होता है। इससे ज्यादा होने पर इलाज की जरूरत होती है। 50 साल से अधिक उम्र वालों का प्रोस्टेट 35 सीसी तक रहती है। दवाओं के बाद भी दिक्कतें बनी रहती हैं तो अन्य जांचें कराई जाती हैं। सभी जांचें केजीएमयू में उपलब्ध हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
know about diseases of prostate and its treatments
डेमो

अगर इलाज न कराया जाए तो क्या ये बीमारी कैंसर का भी रूप ले सकती है?
जवाब- कैंसर कहीं भी कि सी भी व्यक्ति को हो सकता है। लगातार संक्रमण बने रहने की वजह से कैंसर हो सकता है। कैंसर होने पर लगातार खून आने लगता है। पीएसए जांच से इसका पता चल जाता है।
कैसे पता चलेगा कि बीपीएच है या कैंसर?
जवाब- चिकित्सक पूरी हिस्ट्री लेने के बाद इलाज शुरू करता है। मरीज के हिस्ट्री बताने पर कैंसर संबंधी जांच कराई जाती है। जांच कराकर देखा जाता है प्रोस्टेट कठोर तो नहीं है। कठोर गांठ की वजह से हो सकता है। यह कैंसर का लक्षण भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में खून के जरिए होने वाली पीएसए जांच होती है। प्रोस्टेट की बायोप्सी की जाती है, जिससे साफ हो जाता है कि कैंसर है या नहीं।

विज्ञापन
know about diseases of prostate and its treatments
डेमो
किन लोगों में प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या ज्यादा होती है?
- दरअसल यह 50 साल की उम्र पार करने के बाद हर व्यक्ति को होती है। जो लोग जीवनशैली ठीक रखते हैं, उन्हें दिक्कत नहीं होती है। विभिन्न शोधों में यह देखा गया है कि शाकाहारी लोगों की अपेक्षा मांसाहारी में यह समस्या ज्यादा होती है। इसके अलावा यह अनुवांशिक भी होती है। जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही है, उन्हें 40 साल की उम्र होते ही चेकअप जरूर कराना चाहिए। ऑफिस में देर तक बैठकर काम करने वालों में भी उम्र बढ़ने पर यह समस्या पाई जाती है।
ऑपरेशन की जरूरत कब पड़ती है?
- शुरुआती दौर में ध्यान नहीं देने पर प्रोस्टेट लगातार बढ़ता रहता है। इसके आसपास संक्रमण भी बढ़ जाता है। फिर यह दवाओं से ठीक नहीं होता है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन किया जाता है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed