बदलिए लाइफ स्टाइलः प्रोस्टेट के रोगों से बचना है तो न लगातार बैठें, न खड़े रहें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रोस्टेट पुरुषों में एक अखरोट के आकार की ग्रंथि होती है, जो पेशाब की थैली के निचले हिस्से में होता है और मूत्रमार्ग को चारों ओर से घेरे रहता है। यह वीर्य में जाने वाले फ्लूड को बनाता है। बिनाइन से तात्पर्य है कि जो खतरनाक न हो। हाइपरट्रॉफी यानी आकार बढ़ना। इसे आसान शब्दों में कहें तो यह पौरुष ग्रंथि के बढ़ने की बीमारी है। इसके बढ़ने पर पेशाब के रास्ते में रुकावट आ जाती है।
इसे हमें जानने की जरूरत क्यों?
50 की उम्र वाले हर तीन से चार लोगों में एक व्यक्ति को प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या होती है। 70 की उम्र तक पहुंचने वालों में 90 फीसदी लोगों में यह समस्या होती है। किसी को ज्यादा होती है तो किसी को कम। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में ही प्रतिदिन इस बीमारी से परेशान करीब साढ़े तीन सौ मरीज आते हैं।
इस बीमारी के चलते पेशाब करने के पैटर्न में बदलाव महसूस होता है। आसान शब्दों में कहें तो रात में चार-पांच बार पेशाब आने लगती है। पेशाब तो लगती है, लेकिन होती नहीं है। इससे बेचैनी रहती है। यदि संक्रमण बढ़ गया है तो पेशाब के साथ खून भी आता है। कई बार पेट के निचले हिस्से में दर्द भी होने लगता है। वहीं कई मामलों में पेशाब लगने पर उस पर नियंत्रण नहीं हो पाने की समस्या देखी जाती है।
इसके लिए कौन-कौन सी जांचें कराई जाती हैं?
आमतौर पर 40 साल के बाद सालभर में एक बार हर व्यक्ति को जांच करानी चाहिए। पहले अल्ट्रासाउंड के जरिए प्रोस्टेट की स्थिति का आकलन किया जाता है। सामान्य तौर पर प्रोस्टेट का आकार करीब 25 से 30 क्यूबिक सेंटीमीटर (सीसी) होता है। इससे ज्यादा होने पर इलाज की जरूरत होती है। 50 साल से अधिक उम्र वालों का प्रोस्टेट 35 सीसी तक रहती है। दवाओं के बाद भी दिक्कतें बनी रहती हैं तो अन्य जांचें कराई जाती हैं। सभी जांचें केजीएमयू में उपलब्ध हैं।
अगर इलाज न कराया जाए तो क्या ये बीमारी कैंसर का भी रूप ले सकती है?
जवाब- कैंसर कहीं भी कि सी भी व्यक्ति को हो सकता है। लगातार संक्रमण बने रहने की वजह से कैंसर हो सकता है। कैंसर होने पर लगातार खून आने लगता है। पीएसए जांच से इसका पता चल जाता है।
कैसे पता चलेगा कि बीपीएच है या कैंसर?
जवाब- चिकित्सक पूरी हिस्ट्री लेने के बाद इलाज शुरू करता है। मरीज के हिस्ट्री बताने पर कैंसर संबंधी जांच कराई जाती है। जांच कराकर देखा जाता है प्रोस्टेट कठोर तो नहीं है। कठोर गांठ की वजह से हो सकता है। यह कैंसर का लक्षण भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में खून के जरिए होने वाली पीएसए जांच होती है। प्रोस्टेट की बायोप्सी की जाती है, जिससे साफ हो जाता है कि कैंसर है या नहीं।
- दरअसल यह 50 साल की उम्र पार करने के बाद हर व्यक्ति को होती है। जो लोग जीवनशैली ठीक रखते हैं, उन्हें दिक्कत नहीं होती है। विभिन्न शोधों में यह देखा गया है कि शाकाहारी लोगों की अपेक्षा मांसाहारी में यह समस्या ज्यादा होती है। इसके अलावा यह अनुवांशिक भी होती है। जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही है, उन्हें 40 साल की उम्र होते ही चेकअप जरूर कराना चाहिए। ऑफिस में देर तक बैठकर काम करने वालों में भी उम्र बढ़ने पर यह समस्या पाई जाती है।
ऑपरेशन की जरूरत कब पड़ती है?
- शुरुआती दौर में ध्यान नहीं देने पर प्रोस्टेट लगातार बढ़ता रहता है। इसके आसपास संक्रमण भी बढ़ जाता है। फिर यह दवाओं से ठीक नहीं होता है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन किया जाता है।