पत्नियां न सिर्फ सुहाग की लंबी उम्र के लिए निर्जला करवाचौथ का व्रत रखती हैं, बल्कि सुहाग की जान पर बन आए तो वे अपनी जिंदगी भी दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटतीं। किडनी डोनेशन के आंकड़े इसे साफ बयां करते हैं। एसजीपीआई के आंकड़े बताते हैं कि 90 फीसदी मामलों में महिलाएं किडनी डोनेट करती हैं। इन महिलाओं में भी सबसे ज्यादा 40 फीसदी बीवियां होती हैं।
अपनी जान की परवाह न करके इन ‘सावित्रियों’ ने बचाई अपने पति की जान
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मुझे तो पत्नी ने दी नई जिंदगी
पारा के आर्शा एन्क्लेव निवासी अनुपम तिवारी बताते हैं कि उन्हें छह साल पहले पैरालिसिस का अटैक हुआ। इस दौरान ब्रेन और किडनी दोनों पर असर हुआ। लंबे समय तक इलाज केबाद ब्रेन की रिकवरी हुई। लेकिन, तीन साल पहले किडनियों ने जवाब दे दिया। जरूरत ट्रांसप्लांट की आई। जब डोनर की बात आई तो खुद पत्नी ज्योति ने ही पहल की। इस साल मई में ट्रांसप्लांट करा दिया गया। ट्रांसप्लांट के बाद अब दोनों पहला करवाचौथ मनाएंगे। अनुपम कहते हैं करवाचौथ में पति के दीर्घायु होने की ईश्वर से प्रार्थना की जाती है। पर यहां तो पत्नी ने ही मुझे आयु दे दी है। उसकी वजह से ही मैं जिंदा हूं।
आशियाना के सेक्टर एच के रहने वाले अरविंद गौतम बताते हैं कि चार साल पहले पता चला कि दोनों किडनी खराब हैं। एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने कहा कि तुरंत ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत है। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि किडनी दान कौन करेगा? बहन ने पहल भी की। पर उसकी तबीयत खराब हो गई। हेपेटाइटिस का संक्रमण निकला तो डॉक्टरों ने उससे दान लेने की बात खारिज कर दी। इसपर पत्नी अर्चना ने किडनी देने का फैसला किया। अरविंद कहते हैं कि मुझे लगता है कि भगवान ने यही तय किया हुआ था कि पत्नी ही मेरी जिंदगी बचाए। अब मैं उसकी ही किडनी से जिंदा हूं।
रेलवे में अधिकारी गोमतीनगर विस्तार निवासी कमला प्रसाद को 2008 में पता चला कि उनकी किडनियां खराब हो गई हैं। कमला प्रसाद बताते हैं कि डॉक्टरों ने जब ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई तो पत्नी शशिकला ने फौरन यही कहा कि वे किडनी दान करेंगी। पर मैं इसे टालता रहा। 2015 तक डायलिसिस पर ही रहा। कारण यह नहीं था कि मुझे डोनर के तलाश की चिंता था। कारण यह था कि पत्नी पूरी इच्छाशक्ति से मेरे साथ खड़ी थी, इसलिए मैं बीमारी से लड़े जा रहा था। पर इसी बीच तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। डॉक्टरों ने कहा कि किडनी डोनेशन जरूरी है तो शशिकला ने कहा कि हम तो पहले से ही डोनेट करने के लिए तैयार हैं।
रिश्तेदारों ने इन्कार कर दिया, पत्नी साथ खड़ी रही
वास्तुखंड निवासी केदारनाथ की महज 30 की उम्र में दोनों किडनी खराब हो गई। बच्चा छोटा था। पत्नी पूनम के किडनी डोनेट करने में सबसे बड़ी बाधा यही थी कि वह बच्चे की देखभाल कैसे करेंगी, फिर पति और खुद को कैसे संभालेंगी। पर एक-एक कर सारे रिश्तेदारों ने किडनी दान देने से इन्कार कर दिया। पूनम पहले से ही किडनी डोनेट करने को तैयारी थीं। लेकिन पति की चिंताएं और सवाल ऐसे थे जिनका जवाब नहीं था। पूनम कहती हैं सब ओर से इन्कार होने के बाद मैंने खुद फैसला किया। पति की जिंदगी से बढ़कर मेरे लिए कुछ और नहीं था। केदारनाथ कहते हैं आखिर पूनम जीत ही गई। किडनी दान कर मुझे मौत केमुंह से खींच लाई।