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कानपुर एनकाउंटर:चौबेपुर व शिवली थाने में रहे पुलिसकर्मी रडार पर, कॉल डिटेल से खुलेगा राज
Fri, 17 Jul 2020 11:24 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 17 Jul 2020 11:24 AM IST
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
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दहशतगर्द विकास दुबे के संगठित गिरोह की जांच में लगी एसआईटी ने कानपुर नगर व देहात के जिलाधिकारियों से ऐसी सरकारी व गैर सरकारी जमीनों का ब्योरा मांगा है जिस पर विकास ने कब्जा किया था। ऐसे पुलिस कर्मियों के मोबाइल नंबर भी एकत्र किए जा रहे हैं जो पिछले एक साल से चौबेपुर व शिवली थाने में तैनात रहे हैं।
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एसआईटी को विकास के फोन के एक साल की सीडीआर का विश्लेषण करना है और पता करना है कि किन-किन पुलिसकर्मियों से उसके संबंध रहे हैं। जिनके मोबाइल नंबर विकास की सीडीआर में निकलते हैं उनसे पूछताछ की जाएगी।
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शस्त्र लाइसेंस पर भी जवाब मांगाः एसआईटी इसकी भी जांच कर रही है कि 2001 में उम्र कैद की सजा मिलने के बाद भी विकास के असलहे का लाइसेंस निरस्त क्यों नहीं किया गया? 2001 से लेकर अब तक जो भी थाना प्रभारी रहे उनसे भी पूछताछ होगी। सूत्रों का कहना है कि इन 19 सालों में किसी भी चुनाव में विकास या उसके गुर्गों ने अपने असलहे जमा नहीं किए। उनकी भी तलाश की जा रही है जिनकी मदद से फर्जी पासपोर्ट के जरिए विकास कई बार विदेश गया।
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दहशतगर्द विकास दुबे और उसके खजांची जय बाजपेई के बीच आधा दर्जन बैंक खातों के माध्यम से एक साल के भीतर करीब 75 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह खुलासा पुलिस की जांच में हुआ है। पुलिस ने इससे संबंधित सभी जानकारियां व दस्तावेज जुटा लिए हैं जिसे ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) का भेजा जाएगा।
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इसके अलावा करोड़ों रुपये नकद लेनदेन हुआ है, जिनका कोई लेखाजोखा नहीं है। बिकरू कांड के बाद पुलिस ने विकास के करीबी जय बाजपेई को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ जारी है। उसने कई राज उगले हैं। बताया है कि वह विकास की काली कमाई अलग-अलग धंधों में लगाता था। इसके बदले हर महीने एक मोटी रकम विकास को पहुंचाता था। जय ने जो रकम विकास से ली, कुछ ब्याज पर उठा दी। कुछ प्रापर्टी में लगाई। पुलिस जय के खातों का चार साल का विवरण जुटा रही है।