बिटिया की शादी होगी। इतनी शान से, इतनी धूमधाम से कि सब याद करेंगे...। ये बैंड होगा...। स्टेज तो ऐसा होगा। बेटी ये पहनेगी। नहीं, नहीं...वो पहनेगी। उस पर वो खूब फबेगा। अम्मा के दिल में...। बाबूजी के दिल में...। पूरे परिवार के दिल में...। ऐसे न जाने कितने सपने सजते हैं। इसकी चाहत-उसकी चाहत। ...और मान-मनुहार भी। तब तय होती है सपनों की एक मुकम्मल लिस्ट। क्योंकि सपने खास होते हैं इसलिए उत्तम घड़ी, उत्तम मुहूर्त की तलाश होती है। पर...? सहालग का सीजन है। उत्तम मुहूर्त भी हैं। फिर भी शादियां टल रही हैं। क्यों...? शादी में 20 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकते। ये नहीं कर सकते-वो नहीं कर सकते...! इतनी शर्तों के बंधन में अरमानों के फेरे होंगे भी तो कैसे? मायूसी यही नहीं बाजार में भी है। जब शादियां टल रही हैं तो बाजार दमके भी तो कैसे?
खुल गया लखनऊ का सराफा बाजार पर नहीं लौटी चमक, जून में भी टलीं 12 हजार शादियां
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पहले तो सीजन के दौरान शोरूम में ग्राहकों को करना पड़ता था इंतजार
आलमबाग स्थित बद्री सराफ के मुखिया प्रणव केसरवानी बताते हैं कि जून में टली शादियों का असर सराफा बाजार पर साफ दिख रहा है। शादी के परिवार दो लाख से लेकर 10 लाख तक के गहने खरीदते हैं। वही हाई-फाई शादियों में तो कोई लिमिट नहीं होती। पिछले साल मई में गहने खरीदने के लिए शोरूम में इंतजार करना पड़ता था, पर इस बार सन्नाटा पसरा है। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि असर कितना पड़ा है।
20 की पाबंदी का बहुत बड़ा असर पड़ा
शादियों के टलने से कारोबार कैसे प्रभावित हो रहा है, हमने इसको लेकर लखनऊ आदर्श टेंट एसोसिएशन के महामंत्री ऋतिक जायसवाल से सवाल किए। वह बताते हैं कि शादियाें में 20 लोगों के शामिल हो सकने की पाबंदी का बहुत असर पड़ा है। जून में 11,15,16,19, 27,28, 29 व 30 तारीख को जबरदस्त शादियां थीं। असर कितना पड़ा है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि करीब 12 हजार शादियां टल चुकी हैं। पहले से बुक गेस्ट हाउस, मैरिज लॉन, होटल सब कैंसिल हो गए।
चौक सराफा एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. राजकुमार वर्मा बताते हैं कि वर-वधू पक्ष से शादी में 20 के ही शामिल होने की बंदिश का व्यापक असर हुआ है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सहालग के दिनों में चौक बाजार में रोजाना औसतन 10 करोड़ का कारोबार होता था। 500 शोरूम व दुकानें गुलजार रहतीं। जून में जिस हिसाब से शादियां टली हैं उसका असर यहां के बाजार पर दिखेगा।
अब तो गिफ्ट के लिए भी नहीं होगी खरीदारी
इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश पाटिल बताते हैं कि सहालग में वर-वधू के पक्ष के लोग तो खरीदारी करते ही हैं, रिश्तेदार, परिजन भी करते हैं। उन्हें वर-वधू को गिफ्ट देना होता है। ये खरीदारी एक-डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाती थी। शादियां टलने से तोहफे के लिए होने वाली खरीदारी की भी उम्मीद नहीं है।