शिक्षा के क्षेत्र में एक नए दौर का लखनऊ से आगाज कर चुके वेदम वर्ल्ड स्कूल ने बच्चों के समग्र विकास के लिए एक नई और प्रेरणादायी पहल की है। इसके तहत बहुप्रतीक्षित अतिथि वक्ता कार्यक्रम ‘वेदम संवाद – वॉइसेस दैट इंस्पायर’ की शुरुआत की गई है। इस संवाद का प्रथम सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस अवसर पर चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और रेड ब्रिगेड लखनऊ की संस्थापक उषा विश्वकर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उनका सशक्त संवाद विद्यार्थियों के लिए आत्मबल, सामाजिक चेतना और समानता की एक जीवंत पाठशाला सिद्ध हुआ।
Vedam Samwad: वेदम वर्ल्ड स्कूल की एक और प्रेरणादायी पहल, 'वेदम संवाद' की शुरुआत, बच्चों ने जाना साहस का महत्व
Vedam World School: वेदम संवाद का मंच ऐसे व्यक्तित्वों को आमंत्रित करता है, जिन्होंने संघर्ष से रास्ता निकाला, समाज पर प्रभाव डाला और आने वाली पीढ़ियों के लिए नया मार्ग प्रशस्त किया।
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'डर से बाहर आना ही पहला कदम'
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा रहा छात्रों के साथ सीधा संवाद। विद्यार्थियों ने बेहद प्रासंगिक और गूढ़ प्रश्न पूछे, जिनका उषा विश्वकर्मा ने बड़े सधे और सशक्त अंदाज में उत्तर दिया। कक्षा छठी की छात्रा नव्या चतुर्वेदी ने पूछा, "अगर कोई बच्ची हैरेसमेंट का शिकार हो रही हो और वह डर के कारण अपने परिवार से उस घटना को साझा न कर पा रही हो, तो उसे क्या करना चाहिए?" इस पर उषा ने कहा, "ऐसी घटनाओं को छिपाना नहीं चाहिए। बच्चियों को चाहिए कि वे पूरी हिम्मत के साथ अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत बताएं। डर से बाहर आकर सामना करना ही पहला कदम होता है।"
'बदलाव की जिम्मेदारी पुरुषों को लेनी होगी'
वहीं, कक्षा 12वीं के छात्र विशेष ने बेहद जरूरी सवाल पूछा। विशेष ने पूछा कि "आप जो यह मुहिम महिलाओं के लिए चला रही हैं, उसमें पुरुषों की क्या भूमिका हो सकती है?" उषा विश्वकर्मा ने इसके जवाब में कहा, "पहली जरूरत यह है कि महिलाओं को देवी जैसे अलौकिक दर्जे के बजाय एक सामान्य इंसान और सहयोगी के रूप में देखा जाए। दूसरी बात, जो पितृसत्तात्मक सोच हमारे समाज के हर कोने में गहराई तक बैठी हुई है, उसे बदलने की जिम्मेदारी पुरुष समाज को लेनी होगी। आप सबका यही सहयोग और सोच में बदलाव लाना महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सबसे बड़ा योगदान है।" इन सवाल-जवाबों ने संवाद को एकतरफा नहीं, बल्कि समावेशी और जागरूकता से भरपूर बना दिया।
वेदम संवाद – एक मंच, जो सोच बदलता है
‘वेदम संवाद’ वेदम वर्ल्ड स्कूल की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर जीवन के असली नायकों से जोड़ना है। यह मंच ऐसे व्यक्तित्वों को आमंत्रित करता है, जिन्होंने संघर्ष से रास्ता निकाला, समाज में प्रभाव डाला और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
'वेदम संवाद का उद्देश्य- छात्र वास्तविक कहानियों से सीख सकें'
स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ. सफिया उस्मानी ने कहा, "वेदम संवाद का उद्देश्य विद्यार्थियों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। हम चाहते हैं कि विद्यार्थी अपने करियर की शुरुआती अवस्था में ही विभिन्न पेशों से जुड़े प्रेरक व्यक्तित्वों से मिलें। ऐसे लोग, जिन्होंने अपने जीवन में संघर्ष किया, अनुभव प्राप्त किया और अपने कार्यक्षेत्र में विशिष्ट स्थान बनाया। हम यह प्रयास कर रहे हैं कि विद्यार्थी न केवल उनके अनुभवों को जानें, बल्कि यह भी समझें कि कठिन परिस्थितियों में उनका दृष्टिकोण क्या था, उन्होंने कौन-से निर्णय लिए और अपने जीवन की दिशा कैसे तय की। इस मंच के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों जैसे सामाजिक कार्य, प्रशासन, चिकित्सा, विज्ञान, कला, मीडिया, उद्यमिता आदि से जुड़ी वास्तविक कहानियों से सीख सकें, जो उनके आने वाले भविष्य में मार्गदर्शक सिद्ध होंगी। उषा विश्वकर्मा जैसी प्रभावशाली शख्सियत को आमंत्रित करना हमारे विद्यार्थियों के लिए एक ऐतिहासिक अनुभव रहा।"
विद्यार्थियों ने लिया यह संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर, सभी विद्यार्थियों ने एक सामूहिक संकल्प लिया, जिसमें उन्होंने यह प्रतिज्ञा की कि वे:-
- अपने साथ या किसी और के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे।
- डर या संकोच को खुद पर हावी नहीं होने देंगे।
- आत्मरक्षा को जीवन का हिस्सा बनाएंगे।
- समाज में समानता, सम्मान और न्याय की भावना को आगे बढ़ाएंगे।
उषा विश्वकर्मा के नेतृत्व में लिए गए इस संकल्प ने पूरे वातावरण को आत्मविश्वास और जागरूकता की भावना से भर दिया। बच्चों के चेहरों पर जो दृढ़ता और संकल्प दिखाई दिया, वह इस संवाद की गहराई और प्रभाव का प्रमाण था। कार्यक्रम का समापन जोरदार तालियों और मुख्य अतिथि के धन्यवाद संदेश के साथ हुआ। विद्यार्थियों के चेहरों पर देखा गया आत्मविश्वास और विचारशीलता इस बात का प्रमाण था कि 'वेदम संवाद' केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।