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LU: सेंट्रल मेस में सुधर नहीं रहे हालात, सुबह कीड़ा, रात को खाने में निकली मक्खी

Wed, 19 Sep 2018 04:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 19 Sep 2018 04:35 PM IST
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insects found in food of lucknow university central mess
खाने में कीड़े - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ विश्वविद्यालय की सेंट्रल मेस में खाने की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन दोपहर के खाने में कीड़ा मिला। इस पर छात्रों ने हंगामा किया। सूचना मिलने पर चीफ प्रोवोस्ट प्रो. संगीता रानी, असिस्टेंट प्रॉक्टर प्रो. गुरुनाम सिंह, पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और उल्टा छात्रों पर ही सख्ती की। वहीं रात के खाने में भी मक्खी मिली। हालत ये रही कि चीफ प्रॉक्टर प्रो. विनोद कुमार सिंह ने अपने सामने रात का खाना बंटवाया, ताकि विद्यार्थी हंगामा न करें।
insects found in food of lucknow university central mess
लखनऊ यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
सेंट्रल मेस में सोमवार को भी दोपहर के खाने में कीड़ा मिला था। छात्रों को उम्मीद थी कि शिकायत के बाद कार्रवाई होगी और खाने की गुणवत्ता सुधरेगी, लेकिन इसके उलट मंगलवार दोपहर फिर सब्जी में कीड़ा मिल गया। छात्रों ने शिकायत की तो संचालक उनसे उलझ गया और इसकी सूचना चीफ प्रोवोस्ट व प्रॉक्टर को दे दी। 
insects found in food of lucknow university central mess
लखनऊ यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
छात्रों ने आरोप लगाया कि मेस में खाने के लिए जो सामान प्रयोग किया जाता है, उसकी भी गुणवत्ता ठीक नहीं है। नमक, हल्दी, तेल, सॉस आदि सामान दोयम दर्जे का प्रयोग किया जाता है। छात्रों ने ये भी आरोप लगाया कि प्रवेश के समय उनसे पूरे 12 महीने का शुल्क ले लिया जाता है। अप्रैल, मई, जून तीन महीने मेस चलती नहीं है। लगभग 10 हजार रुपये कॉशन मनी होता है, जिसे विवि प्रशासन वापस नहीं कर रहा है। इस बारे में चीफ प्रोवोस्ट प्रो. संगीता रानी ने नाराज विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की। आश्वासन दिया कि खाने की गुणवत्ता सुधारने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। परिसर में ये भी चर्चा है कि सेंट्रल मेस का टेंडर किसी अधिकारी के करीबी को दिया गया है। इसीलिए विवि प्रशासन खाने की गुणवत्ता को लेकर गंभीर नहीं है।
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लखनऊ यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
एफएसडीए के छापे के बाद मेस संचालक ने मेस के अंदर तो थोड़ी साफ-सफाई की, लेकिन मेस के पीछे की तरफ काफी घास-फूस है। आस-पास भी गंदगी व कूड़ा है। इससे भी कीड़े मेस के अंदर तक आ जाते हैं। विवि प्रशासन इसकी साफ-सफाई की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। 
 
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लखनऊ यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय व्यवस्था से हो रही दिक्कत
विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पूर्व में सभी हॉस्टलों के लिए अलग मेस संचालित होती थी। इसके लिए वार्डेन जिम्मेदार होते थे और व्यवस्था भी ठीक करवाते थे। अब सेंट्रल मेस में आठ पुरुष छात्रावासों के लिए एक साथ खाना बनता है। इतनी संख्या में एक साथ खाना बनाने को संचालक मैनेज नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह से आए दिन ये दिक्कत हो रही है। जबकि महिला छात्रावासों का मैनेजमेंट इसकी अपेक्षा बेहतर है।
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