शनिवार को केडी सिंह बाबू स्टेडियम में मुकाबला तो क्रिकेट का ही था, लेकिन खेलने का ढंग जरा जुदा था। कोई लाठी का सहारा लेकर बल्लेबाजी में चौके जमा रहा था तो कोई एक हाथ के सहारे ही गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण कर रहा था। यह नजारा भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के ट्रायल के तहत हुई प्रतियोगिता में दिखा। इसमें देश के सर्वश्रेष्ठ 48 दिव्यांग खिलाड़ियों को इंडिया ब्ल्यू, रेड और ग्रीन में बांटकर मुकाबले कराए गए। चयनित भारतीय टीम बांग्लादेश में होने वाली अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में भाग लेगी।
ये हैं असली चैंपियन! लाठी के सहारे लगाते हैं चौके-छक्के, एक हाथ से करते हैं बॉलिंग-फील्डिंग
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एक पैर से दिव्यांग दिल्ली के महताब भले ही भारतीय दिव्यांग टीम में जगह बनाने में नाकामयाब रहे, लेकिन उनके हुनर को देख स्टेडियम में मौजूद शौकीनों ने दांतों तले अंगुलियां दबा ली। मैच के पहले इस क्रिकेटर को देखकर एकबारगी लगा कि क्या यह खिलाड़ी गेंद को ढंग से खेल पाएगा, लेकिन जिस तरह महताब ने लाठी के सहारा लेकर बल्लेबाजी और गेंदबाजी में छाप छोड़ी, वह काबिले-तारीफ रहा।
कुलदीप कनौजिया, लखनऊ
दायां हाथ न होने के बावजूद कुलदीप कनौजिया ने गेंदबाजी में कमाल दिखाया। अपनी फिरकी पर विरोधी टीम को नचाने वाले कुलदीप को भारतीय टीम में चयन के रूप में इनाम मिला।
इनका प्रदर्शन भी रहा काबिल-ए-तारीफ
लखनऊ के एकलाख हमजा (जिनका शरीर कांपता रहता था) ने छाप छोड़ी। इस क्रिकेटर ने बीमारी से लड़कर खुद को बेहतरीन गेंदबाज और क्षेत्ररक्षक बनाया। इस कड़ी में हरियाणा के रोहित का नाम भी लिया जा सकता है, जिन्होंने लाठी के सहारे बल्लेबाजी में कमाल दिखाया। (खेल के दौरान शॉट लगाता एक खिलाड़ी।)
किसान का बेटा भी टीम में
भारतीय टीम में चयनित वाराणसी के गोपाल यादव के पिता वैसे तो किसान हैं, लेकिन परिवार पालने को चाय बेचते हैं। जैसे ही गोपाल के भारतीय टीम में चयन की खबर मिली, उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं, गोपाल ने कहा कि मेरी पूरी कोशिश होगी कि दमदार प्रदर्शन से देश की जीत में अहम योगदान दूं।