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'पत्रकार न होते तो कोई देश आजाद न होता'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 31 May 2018 04:49 PM IST
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हिंदी पत्रकारिता दिवस
- फोटो : amar ujala
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राज्यपाल रामनाईक ने ‘अखिल भारतीय हिंदी पत्रकार संघ’ व ‘रंगभारती’ के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित समारोह में अपने विचार व्यक्त किए।
राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि मराठी भाषी प्रख्यात पत्रकार बाबूराव विष्णु पराड़कर ने हिंदी में जिस तरह लेखन किया उससे स्पष्ट होता है कि हिंदी सभी भारतीयों की है। उन्होंने कहा कि पराड़कर जी मराठी भाषी होते हुए भी अच्छी हिंदी लिखते थे जिसने यह साबित किया कि हिंदी केवल हिंदी भाषी लोगों की नहीं है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक पत्रकारिता की आज ज्यादा आवश्यकता है।
हिंदी पत्रकारिता दिवस
- फोटो : amar ujala
हिंदी संस्थान के यशपाल सभागार में आयोजित समारोह में विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को बाबूराव विष्णु पराड़कर पत्रकारिता शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि यह पत्रकारिता का महत्व है कि उसे उसके काम के कारण चौथा स्तंभ कहा गया है। पत्रकारिता पहले मिशन थी, यह कमीशन की ओर न जाए इसके लिए हमें सतर्क रहना है।
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हिंदी पत्रकारिता दिवस
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के दौर में हर कोई समाचार पत्र में पहले यह देखता था कि तिलक ने क्या कहा है, अग्रलेख में क्या लिखा है, आज अग्रलेखों को लेकर वैसी उत्सुकता नहीं दिखती है। संयोजक श्याम कुमार ने कहा कि बाबूराव विष्णु पराड़कर ऐसे महान पत्रकार थे, जिन्होंने नए-नए आवश्यक शब्द गढ़कर हिंदी को अधिकाधिक समृद्ध एवं सशक्त बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया।
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हिंदी पत्रकारिता दिवस
- फोटो : amar ujala
आज भी दुनियाभर में श्रेष्ठ है भारतीय पत्रकारिता : हृदय नारायण
समारोह में सम्मान पाने वाले विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि पराड़कर जी सहित तमाम महान पत्रकारों ने पत्रकारिता में सूचना के साथ ज्ञान को महत्व दिया लेकिन पश्चिमी पत्रकारिता की नकल में सूचना को महत्व दिया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता आज भी दुनिया के किसी भी देश की पत्रकारिता से श्रेष्ठ है। हमें भारतीय जीवन मूल्यों का ध्यान देना चाहिए।
समारोह में सम्मान पाने वाले विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि पराड़कर जी सहित तमाम महान पत्रकारों ने पत्रकारिता में सूचना के साथ ज्ञान को महत्व दिया लेकिन पश्चिमी पत्रकारिता की नकल में सूचना को महत्व दिया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता आज भी दुनिया के किसी भी देश की पत्रकारिता से श्रेष्ठ है। हमें भारतीय जीवन मूल्यों का ध्यान देना चाहिए।