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लखनऊ यूनिवर्सिटी के सौ वर्ष पूरे, पूर्व स्टूडेंट्स ने साझा कीं यादें, बोले...

Thu, 19 Nov 2020 05:14 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 19 Nov 2020 05:14 PM IST
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former students shared their memories on centenary celebrations of lucknow university
प्रो. धर्मेंद्र सिंह सेंगर, डॉ एलपी मिश्रा, पंकज प्रसून - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह का आगाज आज गुरूवार को हो गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने पर पूर्व छात्र-छात्राओं ने अपनी यादें अमर उजाला के साथ साझा कीं।

former students shared their memories on centenary celebrations of lucknow university
पंकज प्रसून, हास्य कवि - फोटो : अमर उजाला
यहीं से शुरू हुई साहित्यिक यात्रा
मैं वर्ष 2006 में जब लविवि का छात्र था तो कानपुर के कल्चरल फेस्ट अंतराग्नि में हिस्सा लेने गयाथा। उस वक्त निशि पांडेय ने टीम बनाई थी और मैं वहां से सर्वाधिक पांच पुरस्कार जीतकर लाया था। उस समय के कुलपति डॉ. एसपी सिंह ने मुझे विश्वविद्यालय की शान बताया था और विशेष पुरस्कार से नवाजा था। यहीं से साहित्यिक यात्रा शुरू हुई। आज उसी विवि ने स्वर्णिम वर्ष समारोह में प्रस्तुति के लिए याद किया है। रोमांचित हूं। 
- पंकज प्रसून, हास्य कवि
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राकेश चंद्रा, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
विचारधारा को कोई बंधन नहीं 
विश्वविद्यालय में एलएलबी के लिए दाखिला लिया, साथ ही पीजी भी किया। चार साल का रिश्ता पुराने कैंपस से रहा, फिर प्रशासनिक सेवा से जुड़ गया। सेवानिवृत्त होने के बाद 2016 में नए कैंपस से पीएचडी कर रहा हूं। विचारधारा का कोई बंधन नहीं रहा। उदार दृष्टिकोण इस विवि की सबसे बड़ी खासियत है। विद्वानों की खान है ये परिसर।  - राकेश चंद्रा, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी
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अभिषेक अग्रवाल, पूर्व छात्र व कैटेगरी मैनेजर - फोटो : अमर उजाला

लविवि ने आसान की आईआईएम की राह
लविवि मेरे जीवन का अहम हिस्सा है। इसने न केवल आईआईएम की राह आसान की बल्कि जीवन भर कि लिए प्रो. राजीव शुक्ला, प्रोक़े के शुक्ला जैसे गुरु भी दिए। विवि ने मुझे जीवन जीना भी सिखाया और करिअर की नींव भी दी। ऐसे अनमोल दोस्त भी दिए जिनसे अब भी पुरानी बातें करके दिल खुश हो जाता है। न्यू कैंपस की आइएमएस बिल्डिंग में क्लास के बाद दोस्तों कि साथ कैंटीन में समोसे छोले खाना, परीक्षा के बाद पेपर डिस्कस करना सब बहुत याद आता है। - अभिषेक अग्रवाल, पूर्व छात्र व कैटेगरी मैनेजर



 
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डॉ अनीता सहगल, राष्ट्रीय स्तर की उद्घोषिका व शिक्षाविद् - फोटो : अमर उजाला

कॅरिअर को नई दिशा मिली
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छात्रा रही हूं। एक तमन्ना थी लखनऊ विश्वविद्यालय से डिग्री लेने की जो वर्ष 2016 में पूरी हुई। मेरी समझ से जो पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह कैंपस सर्वश्रेष्ठ है। यह पढ़ने लिखने का माहौल देता है और आपके करिअर को नई दिशा देता है। परिपक्व सोच के साथ विद्यार्थी बाहर निकलते हैं। - डॉ. अनिता सहगल, राष्ट्रीय स्तर की उद्घोषिका व शिक्षाविद्
 

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