लखनऊ महोत्सव के मंच पर सोमवार को अपनी तरह की अनूठी प्रस्तुति हुई। मंच पर वाद्य यंत्रों पर अंगुलियां तो रूस, जर्मनी, यूक्रेन से आई महिला कलाकारों की थिरक रही थीं, पर गीत श्रोताओं की जुबां पर गुनगुनाए जा रहे थे। एक के बाद एक, नए से लेकर सदाबहार और रॉक से लेकर क्लासिकल बॉलीवुड गीतों की धुनें विदेशी कलाकारों ने श्रोताओं को सुनाकर महोत्सव की शाम को यादगार बना दिया।
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लखनऊ महोत्सव
- फोटो : amar ujala
महोत्सव की दूसरी शाम सांस्कृतिक पंडाल में सर्द वातावरण में इंडो फॉरेन रॉक नाइट के अंतर्गत सॉलिटियर बैंड की प्रस्तुतियों ने गर्माहट भर दी। विदेशी कलाकारों ने ऐसा समां बांधा कि हर कोई मुग्ध हो गया। वाद्य यंत्रों पर हिंदुस्तानी गीतों की ऐसी पेशकश श्रोता बस सुनते ही रह गए।
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महिला कलाकारों ने ड्रम, वायलिन, सेक्सोफोन सहित अन्य इंस्ट्रूमेंट्स पर परफॉर्मेंस की शुरुआत बैंग-बैंग मूवी के टाइटल सॉन्ग से की। इसके बाद कलाकारों ने पार्टी सॉन्ग ‘डिगी बम-बम...’ की धुनें बजाकर तालियां हासिल की।
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लखनऊ महोत्सव
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इसके बाद ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना...’ और एयरलिफ्ट फिल्म के ‘दे दी, दिल चीज तुझे दे दी...’ गाने की धुन बजाकर श्रोताओं को झूमने व गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया।
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फिर क्वीन फिल्म का ‘पूरा लंदन ठुमकदा...’, ‘कुड़ी नशे सी चढ़ गई...’, ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा का ‘सेनोरिटा...’, ‘मैं तेरा ब्वायफ्रेंड, तू मेरी गर्लफ्रेंड...’, ‘बदतमीज दिल...’, ‘चिटिया कलाइयां...’ गीतों की धुनें सुनाईं। बैंड ने सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियां भी दीं।