अंबेडकरनगर जिले के महरुआ गांव निवासी नीरज सिंह के धान की फसल में यूरिया खाद नहीं पड़ पाई। इसके लिए वह सोमवार सवेरे 10 बजे सहकारी समिति पहुंचे और लाइन में लगे, लेकिन डेढ़ बजे खाद खत्म हो गई। पर, उनकी बारी ही नहीं आई। इसके बावजूद वह इस उम्मीद में वहीं और डेढ़ घंटे तक खड़े रहे कि प्रशासन खाद का प्रबंध करेगा। पर, उन्हें निराश ही लौटना पड़ा। अब दोबारा खाद कब मिल पाएगी, यह बताने वाला कोई नहीं है।
केस-2
फसल की चिंता ने खत्म कर दी भूख-प्यास
देहात (बलरामपुर) के किसान भूनेश्वर प्रसाद बताते हैं कि यूरिया पाने के लिए हर दिन सवेरे 5 से 6 बजे तक सहकारी समिति पहुंच जाते हैं। हजारों किसानों के बीच वहां दो-तीन दिन में एक बार 400 बोरी यूरिया आती है, जो कुछ ही किसानों को मिल पाती है। जबकि बाकी किसान मायूस होकर घर लौट जाते हैं। अगर एक-दो दिन में यूरिया नहीं मिली तो फसल बर्बाद हो जाएगी, इस चिंता ने भूख-प्यास खत्म कर दी है। सोचता हूं कि आगे परिवार को क्या खिलाऊंगा।
केस-3
15 कोस का सफर तय कर मिली एक बोरी यूरिया
बाराबंकी जिले के खारिका फूल गांव निवासी अंतर्वेदी को सिद्धौर, सेमरावा, ककरहा, देवीगंज, असंदरा में कई चक्कर लगाने के बाद यूरिया नहीं मिली तो 15 कोस दूर बदोसरायं जाना पड़ा। वहां बड़ी मुश्किल से सिर्फ एक बोरी यूरिया मिली। सिद्धौर के रमाशंकर व सत्य प्रकाश बताते हैं सुबह से शाम तक घर के सभी लोग पूरे क्षेत्र में यूरिया की तलाश करते थे। जिन दुकानदारों के पास थी, वह डेढ़ सौ रुपये महंगी दे रहे थे। ऐसे में समिति पर कई दिन लाइन लगाने के बाद यूरिया मिल पाई।
केस-4
44 किमी के सफर के बाद भी मिली नाउम्मीदी
लखनऊ के मोहनलालगंज में गौरा साधन सहकारी समिति पर मौजूद किसान रामकुमार ने बताया कि समितियों पर मिलने वाला 270 रुपये का यूरिया खाद बाजार में 800 रुपये में मिल रहा है। अब खाद के लिए करीब 44 किमी तक का चक्कर लगाकर यहां पहुंचा हूं। पहले देवती साधन सहकारी समिति गया, वहां से करोरा और अब गौरा आया हूं, लेकिन यहां हंगामा देखकर नाउम्मीदी ही हाथ लगी। गरीब किसान यह बढ़ी हुई कीमत देने में सक्षम नहीं है। उसे डर सता रहा है कि उसकी फसल बर्बाद न हो जाए।
खेतों में लहलहाती धान की फसल को अच्छी पैदावार के लिए यूरिया की जरूरत है। कहीं एक-दो दिन में तो कहीं इससे कुछ अधिक दिन में यूरिया नहीं डाली गई तो सब खत्म हो जाएगा। इस चिंता ने किसानों की भूख-प्यास खत्म कर दी है। पर, प्रशासनिक दावे चौंकाने वाले हैं कि प्रदेश में कहीं यूरिया की किल्लत नहीं है।