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बदल रहा है मौसम का मिजाज, इन प्राकृतिक तरीकों से रखें खुद का ध्यान
Wed, 03 Apr 2019 04:03 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 03 Apr 2019 04:03 PM IST
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गर्मी
- फोटो : amar ujala
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मौसम का मिजाज बदल रहा है। अप्रैल माह की शुरुआत से ही पारा 40 के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में जहां एक ओर तेज धूप परेशान करने लगी हैं, वहीं गर्मी बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां भी बढ़ने लगी हैं। सूर्य की खतरनाक किरणें जहां एक तरफ त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं, वहीं गर्मी ने पेट संबंधित समस्याएं भी बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों की माने तो तापमान में अचानक बदलाव आने से शरीर तेजी से मौसम के लिहाज से खुद को ढाल नहीं पाता। यही वजह है कि आजकल लोगों में बदहजमी, अपच, डायरिया जैसी पेट संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। गर्मियों के लिए कैसे प्राकृतिक तरीकों से खुद को करें तैयार, खानपान में किन बातों का रखें ध्यान इन पर एक नजर...।
डॉ अमरजीत यादव
- फोटो : amar ujala
सुबह उठकर करें शीतली व शीतकारी प्राणायम
गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखने में योग का खास महत्व है। इसके लिए कुछ ग्रीष्मकालीन आसन होते हैं। गर्मियाें में शीतली प्राणायाम व शीतकारी प्राणायाम करके शरीर और मस्तिष्क को शीतल रखा जा सकता है। शीतली प्राणायाम भूख और प्यास भी नियंत्रित करता है। वहीं, तापक्रम को नियंत्रित करता है। इन दोनों प्राणायाम से रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। ये दोनों प्राणायाम ठंडे तापमान में नहीं करना चाहिए।
सात से आठ घंटे की नींद जरूरी
गर्मी के मौसम में शीर्षासन, अर्धचक्रासन, चक्रासन, कोणासन, त्रिकोणआसन के अभ्यास से बचना चाहिए। इन योगासनों के दौरान शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। गर्मियों में सुबह के समय ताड़ासन, पाद हस्तासन, भद्रासन, शशांक आसन, मक्रासन व भुजंगासन व पवनमुक्तासन फायदेमंद है। इस मौसम में कम से कम सात से आठ घंटे की नींद भी जरूर लें। साथ ही तीखे, खट्टे व चटपटे खानपान से बचें और मौसमी फलों व सब्जियों का सेवन करें।
- डॉ. अमरजीत यादव, को-ऑर्डिनेटर, नैचुरोपैथी एवं यौगिक साइंस विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखने में योग का खास महत्व है। इसके लिए कुछ ग्रीष्मकालीन आसन होते हैं। गर्मियाें में शीतली प्राणायाम व शीतकारी प्राणायाम करके शरीर और मस्तिष्क को शीतल रखा जा सकता है। शीतली प्राणायाम भूख और प्यास भी नियंत्रित करता है। वहीं, तापक्रम को नियंत्रित करता है। इन दोनों प्राणायाम से रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। ये दोनों प्राणायाम ठंडे तापमान में नहीं करना चाहिए।
सात से आठ घंटे की नींद जरूरी
गर्मी के मौसम में शीर्षासन, अर्धचक्रासन, चक्रासन, कोणासन, त्रिकोणआसन के अभ्यास से बचना चाहिए। इन योगासनों के दौरान शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। गर्मियों में सुबह के समय ताड़ासन, पाद हस्तासन, भद्रासन, शशांक आसन, मक्रासन व भुजंगासन व पवनमुक्तासन फायदेमंद है। इस मौसम में कम से कम सात से आठ घंटे की नींद भी जरूर लें। साथ ही तीखे, खट्टे व चटपटे खानपान से बचें और मौसमी फलों व सब्जियों का सेवन करें।
- डॉ. अमरजीत यादव, को-ऑर्डिनेटर, नैचुरोपैथी एवं यौगिक साइंस विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
डॉ शिव शंकर त्रिपाठी
- फोटो : amar ujala
शरीर में न होने दें पानी की कमी, ठंडाई का करें सेवन
गर्मियों में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की समस्या सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में नींबू की शिकंजी या नमक चीनी का घोल व आम का पना लेते रहने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। इसके अलावा गुलाब के फूल, धनिया के बीज, खीरा व ककड़ी के बीज, काली मिर्च, मुनक्का, सौंफ और बादाम को मिलाकर ठंडाई तैयार कर थोड़ी-थोड़ी देर में लेते रहना चाहिए। इससे शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है। डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती। शहरी तरोताजा रहता है। छाछ और मट्ठे का सेवन भी फायदेमंद है।
पपीते का मसाज और खीरे का करें लेप
सूर्य की किरणों से बचने के लिए प्राकृतिक सन स्क्रीन का इस्तेमाल करें। त्वचा रोगों से बचने के लिए पपीते का लेप लगाए और थोड़ी देर हल्के हाथों से मसाज कर उसे धो दें। खीरे को पीसकर चेहरे पर कुछ देर तक लगा रहने दें, उसके बाद उसे धो दें। इससे न सिर्फ चेहरे की नमी बनी रहेगी। त्वचा रुखी हो तो रात में सोेते समय गुलाब जल, नींबू व गिलिस्रीन का मिश्रण त्वचा पर लगाएं।
- डॉ. शिव शंकर त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी, राजभवन
गर्मियों में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की समस्या सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में नींबू की शिकंजी या नमक चीनी का घोल व आम का पना लेते रहने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। इसके अलावा गुलाब के फूल, धनिया के बीज, खीरा व ककड़ी के बीज, काली मिर्च, मुनक्का, सौंफ और बादाम को मिलाकर ठंडाई तैयार कर थोड़ी-थोड़ी देर में लेते रहना चाहिए। इससे शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है। डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती। शहरी तरोताजा रहता है। छाछ और मट्ठे का सेवन भी फायदेमंद है।
पपीते का मसाज और खीरे का करें लेप
सूर्य की किरणों से बचने के लिए प्राकृतिक सन स्क्रीन का इस्तेमाल करें। त्वचा रोगों से बचने के लिए पपीते का लेप लगाए और थोड़ी देर हल्के हाथों से मसाज कर उसे धो दें। खीरे को पीसकर चेहरे पर कुछ देर तक लगा रहने दें, उसके बाद उसे धो दें। इससे न सिर्फ चेहरे की नमी बनी रहेगी। त्वचा रुखी हो तो रात में सोेते समय गुलाब जल, नींबू व गिलिस्रीन का मिश्रण त्वचा पर लगाएं।
- डॉ. शिव शंकर त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी, राजभवन
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डॉ एमएच उस्मानी
- फोटो : amar ujala
सन एक्सपोजर से बचें, त्वचा को रखें मॉइस्चराइज
गर्मी में सबसे ज्यादा त्वचा की समस्याएं होती हैं। सन बर्न से लेकर टैनिंग समेत सूरज की खतरनाक किरणें पड़ते ही कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इस वर्ष मार्च माह की शुरूआत से ही शहर का एसपीएफ (स्किन प्रोटेक्शन फैक्टर) 40 तक पहुंच चुका था। ऐसे में धूप की खतरनाक किरणों (अल्ट्रा वायलट रेडिएशन) से बचाने के लिए बाहर निकलने से 15 मिनट पहले एसपीएफ 40 वाली सनस्क्रीन लगाकर ही निकलें। सिर्फ इतना ही काफी नहीं, बाहर निकलते समय सूती कपड़े से त्वचा को पूरी तरह ढक कर निकलें, छाते और सनग्लास का इस्तेमाल करें। नहाने के बाद त्वचा पर मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। - डॉ. एमएच उस्मानी, त्वचा रोग विशेषज्ञ, बलरामपुर अस्पताल
गर्मी में सबसे ज्यादा त्वचा की समस्याएं होती हैं। सन बर्न से लेकर टैनिंग समेत सूरज की खतरनाक किरणें पड़ते ही कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इस वर्ष मार्च माह की शुरूआत से ही शहर का एसपीएफ (स्किन प्रोटेक्शन फैक्टर) 40 तक पहुंच चुका था। ऐसे में धूप की खतरनाक किरणों (अल्ट्रा वायलट रेडिएशन) से बचाने के लिए बाहर निकलने से 15 मिनट पहले एसपीएफ 40 वाली सनस्क्रीन लगाकर ही निकलें। सिर्फ इतना ही काफी नहीं, बाहर निकलते समय सूती कपड़े से त्वचा को पूरी तरह ढक कर निकलें, छाते और सनग्लास का इस्तेमाल करें। नहाने के बाद त्वचा पर मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। - डॉ. एमएच उस्मानी, त्वचा रोग विशेषज्ञ, बलरामपुर अस्पताल
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दीप्ति श्रीवास्तव, डाइटीशियन केजीएमयू
- फोटो : amar ujala
मौसमी फल का करें सेवन
बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। ऐसे में खानपान में मौसमी व हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन, मौसमी फलों के साथ संतरा, किन्नू व विटामिन सी युक्त ताजे फलों का सेवन जरूर करें। दिन में कम से कम 12 से 15 ग्लास पानी जरूर पिएं। पानी के साथ बादाम और अखरोट के सेवन से त्वचा को स्वस्थ्य रखा जा सकता है। रात का खाना हल्का रखें। अनाज से ज्यादा सलाद का सेवन करें। खाने में मसालेदार व भारी भोजन के बजाए आसानी से पचने वाला भोजन करें। फ्रिज में रखे हुए फल और खाना बिल्कुल न खाएं। - दीप्ति श्रीवास्तव, डाइटीशियन केजीएमयू
बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। ऐसे में खानपान में मौसमी व हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन, मौसमी फलों के साथ संतरा, किन्नू व विटामिन सी युक्त ताजे फलों का सेवन जरूर करें। दिन में कम से कम 12 से 15 ग्लास पानी जरूर पिएं। पानी के साथ बादाम और अखरोट के सेवन से त्वचा को स्वस्थ्य रखा जा सकता है। रात का खाना हल्का रखें। अनाज से ज्यादा सलाद का सेवन करें। खाने में मसालेदार व भारी भोजन के बजाए आसानी से पचने वाला भोजन करें। फ्रिज में रखे हुए फल और खाना बिल्कुल न खाएं। - दीप्ति श्रीवास्तव, डाइटीशियन केजीएमयू