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लखनऊ: पर्यावरण मंत्री सक्सेना बोले- गंगा हमारी आस्था का विषय, इसकी निर्मलता के लिए सबकी भागीदारी जरूरी

Wed, 09 Sep 2026 03:49 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 09 Sep 2026 03:49 AM IST
सार

मंगलवार को गोमतीनगर स्थित एक होटल में अमर उजाला के 'निर्मल गंगा-प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश  कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अरुण सक्सेना सहित कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं।

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"The Ganga is a matter of our faith; everyone's participation is essential for its purity."
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अरुण सक्सेना - फोटो : amar ujala

विस्तार

गंगा हमारे लिए सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि आस्था और जीवन से जुड़ी धरोहर है। देश में गंगा की पूजा से लेकर अंतिम समय में मुंह में गंगाजल डालने तक इसकी गहरी धार्मिक मान्यता है। हवा के बाद जीवन के लिए पानी सबसे जरूरी है। नदियां हमारे जीवन की धमनियों की तरह हैं, इसलिए नदियों का संरक्षण हम सबकी साझी जिम्मेदारी है। यह बातें उत्तर प्रदेश के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अरुण सक्सेना ने कही। वह मंगलवार को गोमतीनगर स्थित एक होटल में अमर उजाला के ''निर्मल गंगा-प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश'' कार्यक्रम में बोल रहे थे।

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उन्होंने लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट अपनाने और जल, जमीन व हवा बचाने पर जोर दिया। कहा कि इस बार कुंभ से लौटने वालों में गंगा प्रदूषण से गैस्ट्रो संबंधी समस्याएं नहीं दिखीं। जनभागीदारी को गंगा की निर्मलता की सबसे बड़ी ताकत बताया।
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कार्यक्रम में एचडीएफसी बैंक की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मोनिका गाखर, एसबीआई उत्तरप्रदेश सचिवालय के सहायक महाप्रबंधक आलोक श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में पर्यावरण कार्यकर्ता व सुधीजन मौजूद रहे।
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पहले सत्र में पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने जल संरक्षण को साझा जिम्मेदारी बताते हुए खेतों में मेड़, पेड़ लगाने और घरेलू इस्तेमाल हो रहे पानी को रीसाइकल करने पर जोर दिया। जल विश्वविद्यालय बनाने की मांग उठाई। जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने सरकारी एजेंसियों में समन्वय पर जोर दिया। यूपीपीसीबी अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह ने प्रदूषण से निपटने को जनभागीदारी जरूरी बताई।

दूसरे सत्र में यूपीपीसीबी के मुख्य पर्यावरण अधिकारी प्रवीण कुमार ने ई-कचरे से जल, वायु और मिट्टी पर असर तथा बैटरियों व सोलर पैनल के कचरे के सुरक्षित निस्तारण की जरूरत बताई। पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक सिंह ने ई-कचरे के कलेक्शन से अंतिम निस्तारण तक मजबूत वेस्ट-चेन बनाने पर जोर दिया।


तीसरे सत्र में चेस्ट सर्जन डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि प्रदूषण से बच्चों और गर्भस्थ शिशुओं के फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं। प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने प्रकृति को लौटाने की जरूरत बताई। पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. जसवंत सिंह ने जल-बिजली बचाने, प्लास्टिक घटाने और पीपल, पाकड़ व नीम लगाने का संदेश दिया।

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