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निजामुद्दीन नहीं तो कहां से कोरोना लेकर आए जमाती, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए सवाल बना सिरदर्द

Thu, 09 Apr 2020 11:27 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 09 Apr 2020 11:27 AM IST
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Corona positive Travel history being collected by police and Intelligence agencies
फाइल फोटो
लखनऊ की कैसरबाग की मरकज मस्जिद में आयोजित धार्मिक जलसे में शिरकत करने वाले जमाती कोरोना से कैसे संक्रमित हुए? यह सवाल पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जलसे में शामिल कोई भी जमाती दिल्ली के निजामुद्दीन नहीं गया था। इसके बावजूद वे कोरोना से संक्रमित पाए गए। इसका मतलब है कि जमाती कहीं और से वायरस साथ लेकर आए थे। 


 
Corona positive Travel history being collected by police and Intelligence agencies
corona virus - फोटो : PTI
इसका पता लगाने को पुलिस सभी कोरोना पॉजिटिव जमातियों की ट्रैवल हिस्ट्री जुटाने की तैयारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कैंट के कसाईबाड़ा स्थित अली जान मस्जिद से पकड़े गए सहारनपुर के 12 जमाती तीन मार्च को लखनऊ आए थे। उसी दिन कैसरबाग की मरकज मस्जिद में धार्मिक जलसा था। इसमें दिल्ली, जयपुर और अन्य स्थानों से आईं 10 जमात के लोग व मस्जिद के आस-पास रहने वाले शामिल हुए थे। 
 
Corona positive Travel history being collected by police and Intelligence agencies
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
जमातियों में अधिकतर 28 व 29 मार्च को लखनऊ गए। यानी 25 दिन तक जमाती लखनऊ में ही ठहरे थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक निजामुद्दीन में धार्मिक जलसा 15 मार्च से 22 मार्च तक चला। पूछताछ में जमातियों ने दावा किया कि इस दौरान लखनऊ में मौजूद जमातियों में से कोई भी वहां नहीं गया था। इसके बाद भी इनमें कोरोना के संक्रमण से कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि लखनऊ आए जमाती निजामुद्दीन नहीं गए तो इन्हें संक्रमण कहीं और से हुआ है। पुलिस यह भी मान रही है कि यह कोई नया स्पॉट हो सकता है जो शायद अभी शासन-प्रशासन की नजर में नहीं है। 

 
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Corona positive Travel history being collected by police and Intelligence agencies
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
आवंटित मस्जिदों की जुटा रहे जानकारी
अधिकारियों ने बताया कि जमात के लोग धर्म प्रचार को देश-विदेश की मस्जिदों में आते-जाते हैं। जमातियों को निजामुद्दीन स्थित मस्जिद से ही निर्देश मिलते हैं। वहां धर्म प्रचार को राज्य आवंटित किए जाते हैं। राज्यों से उन्हें तयशुदा जिलों में भेजा जाता है, जहां से उन्हें मस्जिदें आवंटित होती हैं। कैसरबाग की  मरकज मस्जिद से ही जमातियों को विभिन्न मस्जिदें आवंटित होती हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह जानकारी जुटाने में लगी हैं कि सहारनपुर के 12 समेत कोरोना से संक्रमित अन्य जमातियों को कौन-कौन सी मस्जिदें दी गई थीं। फिलहाल जमातियों को क्वारंटीन होने से पुलिस इस बारे में जानकारी नहीं हासिल कर सकी है। मरकज मस्जिद के लोगों से ही संपर्क करके जानकारी की जा रही है।
 
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Corona positive Travel history being collected by police and Intelligence agencies
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अली जान मस्जिद के पास का इलाका सबसे संवेदनशील
सदर के कसाईबाड़ा स्थित अली जान मस्जिद के आस-पास का इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा है। सेना के अधिकारी भी इलाके की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कसाईबाड़ा इलाके में सब्जी बेचने वाले, धोबी व रोजमर्रा के अन्य कामगार इसी मस्जिद में आते-जाते थे। यहां ठहरे सहारनपुर के 12 जमातियों ने इन सभी को संक्रमित किया होगा। इनकी भी जांच कराई जा रही है। अभी इलाके में वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
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