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वक्त ने बदली सोच, पितृपक्ष में टूटा बाजारों का सन्नाटा, जानें- क्या कहते हैं पंडित...

Tue, 08 Sep 2020 05:38 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 08 Sep 2020 05:38 PM IST
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condition of markets during pitra paksha in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर, ग्राहक को कार की चाबी सौंपते जीएम सेल्स - फोटो : amar ujala
छूट और जरूरत ने पितृपक्ष में भी बाजार का सन्नाटा तोड़ दिया है। इन 15 दिनों में खरीदारी न करने की लोगों की सोच में बदलाव आया है। इसे कोरोना काल में लंबे समय तक की पूर्ण बंदी का भी असर माना जा रहा है। वहीं विक्रेता भी ब्रांडेड व नाॅन ब्रांडेड कपड़ों के बाजार में लॉकडाउन के कारण लॉक हुए माल को निकालने के लिए 60 फीसदी तक डिस्काउंट दे रहे हैं। संक्रमण के डर की वजह से लोगों का रुझान अपने वाहन को लेकर ज्यादा बढ़ा है। यही वजह है कि ऑटो सेक्टर में एकाएक मांग बढ़ गई है। कंपनियां भी इस वक्त अच्छा खासा डिस्काउंट देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा आने वाले वक्त में जिनके यहां शादियां हैं, उन्होंने पितृ पक्ष के बंधन से बचने के लिए इससे पहले ही कुछ सामान खरीद लिया और अब बेधड़क होकर खरीदारी कर रहे हैं। कपड़े से लेकर गाड़ियों तक की खरीदारी जारी है।



 
condition of markets during pitra paksha in lucknow
- फोटो : amar ujala
बदलाव का सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर नजर आ रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस क्षेत्र में त्योहार से पहले का उल्लास है। फॉक्सवैगन के जीएम सेल्स अभिषेक तिलहरी, एसएएस हुंडई के डीलर गुनजीत कालरा कहते हैं कि 50 फीसदी ग्राहक हमें पितृपक्ष में मिले हैं। बिक्री और बुकिंग अचानक बढ़ी है। जेएसवी हुंडई के बृजेश शर्मा कहते हैं कि क्रेटा की जबर्दस्त मांग है। ग्राहक इसे पितृपक्ष में भी लेने को तैयार हैं।

कारों पर कितनी छूट  
वेंटो            55000
पोलो          45000

आई 20      60000

ग्रैंड आई 10    65000
औरा              30000
कोना इलेक्ट्रिक कार: सरकारी सब्सिडी के साथ उपलब्ध
क्रेटा और वेन्यू की जबर्दस्त मांग है।

6 दिन में निकलीं 12 गाड़ियां
पुनीत ऑटोमोबाइल के वैभव मिश्रा कहते हैं कि बीते 6 दिन में 12 गाड़ियां निकली हैं। लखनवी जागरूक हुए हैं, शिक्षित होने की वजह से उनकी सोच बदली है।

कोरोना वारियर्स के लिए स्पेशल ऑफर्स 
कोरोना वॉरियर्स डॉक्टर, पुलिस समेत बैंकर्स, सीए, टीचर्स को कई कार कंपनियां स्पेशल ऑफर दे रही हैं।
मारुति और टाटा
वेगन आर 10000 रु.
ऑल्टो 25000 रु.
एसप्रेसो 45000 रु.
सिलेरियो 30000 रु.
टिआगो 44000 रु. 
टिगोर 50000 रु.
हैरिअर 115000 रु.
नेक्सॉन 45000 रु.  

condition of markets during pitra paksha in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

पितर देवतुल्य... उन्हें तो रोज याद करना चाहिए
बालागंज निवासी आचार्य शिव शंकर पांडेय कहते हैं कि लिखा तो यह गया है कि पूर्वजों को रोजाना याद करना चाहिए। जो रोज उनको याद नहीं कर सकते या विधि विधान से उनका पूजन नहीं कर सकते हैं, उनके लिए पितृपक्ष का प्रावधान किया गया है। कहीं भी किसी खरीदारी को लेकर प्रतिबंध का जिक्र नहीं है, बल्कि पितरों को याद करके खरीदारी कीजिए, वे अपने बच्चों की खुशी देख खुश होते हैं। दरअसल एक प्रथा किसी जमाने में शुरू हुई, देखा-देखी लोगों ने उसको परंपरा बना लिया। पारा निवासी पंडित राम विजय शुक्ल कहते हैं कि पितृ तो हमारे देवतुल्य हैं। जब वे देवता के समान हो गए तो वे अशुभ कहां से हो गए। पितृपक्ष को अशुभ कहीं नहीं गया गया। न ही नए सामान नहीं खरीदने का प्रावधान कहीं मिलता है। जिस तरह सावन शिव को, नवरात्र देवी मां को समर्पित है, उसी तरह से ये 15 दिन पितरों को समर्पित हैं।



 

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condition of markets during pitra paksha in lucknow
- फोटो : amar ujala
ब्रांडेड या नॉन ब्रांडेड 25% ग्राहक बढ़े

रेडीमेड, ब्रांडेड, नॉन ब्रांडेड, डिजाइनर या फिर होम फर्निशिंग का सामान। नमस्कार साड़ी शोरूम के अशोक मंगलानी, गीता वस्त्रालय के प्रभु जालान कहते हैं कि पितृपक्ष में पिछले वर्ष की तुलना में 25 फीसदी ग्राहक बढ़े हैं। छोटे भाई की छोटी दुकान के अशोक मोतियानी कहते हैं कि पहले लोग सिर्फ  देखने आते थे। इस बार ऑफर को देख लोग खरीदारी कर रहे हैं। जो ज्यादा नियम को मान रहे हैं, वे खरीदारी करके सामान रखवा दे रहे हैं कि बाद में ले जाएंगे। कारोबारी मो. अफ जल कहते हैं कि ब्रांडेड में डिजाइनर वियर के लॉकडाउन के कारण बिना बिके माल को निकालने के लिए कंपनियों ने ऑफर दिए हैं।
सोने की कीमत में कमी से लौट रही रौनक

 

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- फोटो : FILE PHOTO
सोने की कीमत में कमी से लौट रही रौनक
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के संगठन मंत्री आदिश जैन कहते हैं कि श्ाादी समारोह में 100 लोगों की छूट को लेकर लोग उत्साहित हैं। दूसरे सोने के दाम में सात से आठ हजार की कमी के कारण, जिनकी जेब में पैसा है वे खरीदारी कर रहे हैं। पितृपक्ष में जैसा सन्नाटा रहता था, अब वो खत्म हो गया है। सोने के जेवरों की बनवाई फ्री है। वहीं हर सहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स के अंकुर आनंद कहते हैं कि नई पीढ़ी की सोच बदल चुकी है और वो बड़ों को भी बदलने में लगी है। कोरोना काल से बाजार में छाई निराशा को छोड़ दें तो पितृपक्ष में रेट ब्लॉक करने वालों की लंबी लाइन है, क्योंकि इस दौरान कीमतें कम हुई हैं।
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