वक्त ने बदली सोच, पितृपक्ष में टूटा बाजारों का सन्नाटा, जानें- क्या कहते हैं पंडित...
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6 दिन में निकलीं 12 गाड़ियां
पुनीत ऑटोमोबाइल के वैभव मिश्रा कहते हैं कि बीते 6 दिन में 12 गाड़ियां निकली हैं। लखनवी जागरूक हुए हैं, शिक्षित होने की वजह से उनकी सोच बदली है।
कोरोना वारियर्स के लिए स्पेशल ऑफर्स
कोरोना वॉरियर्स डॉक्टर, पुलिस समेत बैंकर्स, सीए, टीचर्स को कई कार कंपनियां स्पेशल ऑफर दे रही हैं।
मारुति और टाटा
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पितर देवतुल्य... उन्हें तो रोज याद करना चाहिए
बालागंज निवासी आचार्य शिव शंकर पांडेय कहते हैं कि लिखा तो यह गया है कि पूर्वजों को रोजाना याद करना चाहिए। जो रोज उनको याद नहीं कर सकते या विधि विधान से उनका पूजन नहीं कर सकते हैं, उनके लिए पितृपक्ष का प्रावधान किया गया है। कहीं भी किसी खरीदारी को लेकर प्रतिबंध का जिक्र नहीं है, बल्कि पितरों को याद करके खरीदारी कीजिए, वे अपने बच्चों की खुशी देख खुश होते हैं। दरअसल एक प्रथा किसी जमाने में शुरू हुई, देखा-देखी लोगों ने उसको परंपरा बना लिया। पारा निवासी पंडित राम विजय शुक्ल कहते हैं कि पितृ तो हमारे देवतुल्य हैं। जब वे देवता के समान हो गए तो वे अशुभ कहां से हो गए। पितृपक्ष को अशुभ कहीं नहीं गया गया। न ही नए सामान नहीं खरीदने का प्रावधान कहीं मिलता है। जिस तरह सावन शिव को, नवरात्र देवी मां को समर्पित है, उसी तरह से ये 15 दिन पितरों को समर्पित हैं।
रेडीमेड, ब्रांडेड, नॉन ब्रांडेड, डिजाइनर या फिर होम फर्निशिंग का सामान। नमस्कार साड़ी शोरूम के अशोक मंगलानी, गीता वस्त्रालय के प्रभु जालान कहते हैं कि पितृपक्ष में पिछले वर्ष की तुलना में 25 फीसदी ग्राहक बढ़े हैं। छोटे भाई की छोटी दुकान के अशोक मोतियानी कहते हैं कि पहले लोग सिर्फ देखने आते थे। इस बार ऑफर को देख लोग खरीदारी कर रहे हैं। जो ज्यादा नियम को मान रहे हैं, वे खरीदारी करके सामान रखवा दे रहे हैं कि बाद में ले जाएंगे। कारोबारी मो. अफ जल कहते हैं कि ब्रांडेड में डिजाइनर वियर के लॉकडाउन के कारण बिना बिके माल को निकालने के लिए कंपनियों ने ऑफर दिए हैं।
सोने की कीमत में कमी से लौट रही रौनक
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के संगठन मंत्री आदिश जैन कहते हैं कि श्ाादी समारोह में 100 लोगों की छूट को लेकर लोग उत्साहित हैं। दूसरे सोने के दाम में सात से आठ हजार की कमी के कारण, जिनकी जेब में पैसा है वे खरीदारी कर रहे हैं। पितृपक्ष में जैसा सन्नाटा रहता था, अब वो खत्म हो गया है। सोने के जेवरों की बनवाई फ्री है। वहीं हर सहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स के अंकुर आनंद कहते हैं कि नई पीढ़ी की सोच बदल चुकी है और वो बड़ों को भी बदलने में लगी है। कोरोना काल से बाजार में छाई निराशा को छोड़ दें तो पितृपक्ष में रेट ब्लॉक करने वालों की लंबी लाइन है, क्योंकि इस दौरान कीमतें कम हुई हैं।