निजी अस्पताल की कारस्तानीः जिंदा मरीज को बताया मृत, कब्र तक खोद दी गई

न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 02 Jul 2019 02:46 PM IST
लोहिया संस्थान से मरीज को ले जाते परिवारीजन
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लखनऊ में निराला नगर स्थित इंडिया हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर की कारस्तानी ने एक जिंदा मरीज को कब्र तक पहुंचा दिया। जिस मरीज को आईसीयू में भर्ती कर नौ दिन तक इलाज दिया गया, उसे डॉक्टरों ने सोमवार को अचानक मृत घोषित कर दिया गया। पीड़ित परिवार का साफ कहना है कि छह लाख रुपये वसूलने के बाद जब अस्पताल को पता चला कि उनके पास मोटी रकम नहीं बची, तो उन्होंने मरीज को मृत घोषित कर दिया। इस बारे में जब अस्पताल के संचालक डॉ. रफीक से पूछा गया तो उन्होंने सफाई दी कि परिवार खुद मरीज को ले गया था, डॉक्टरों ने मृत घोषित नहीं किया था। लेकिन सवाल ये है कि अगर मरीज को मृत घोषित नहीं किया गया था तो फिर कोई अपने बेटे को जिंदा दफनाने की तैयारी क्यों करेगा।
 
मरीज को ले जाते परिवारीजन
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नौ दिन पहले हादसे में हुआ था जख्मी
इंदिरा नगर सी ब्लॉक के रहने वाले खालिद का बेटा फुरकान (24) बीते 22 जून को हादसे में जख्मी हो गया था। तीमारदार मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर आए, जहां बेड नहीं मिला। निजी एंबुलेंस चालक ने उसे निराला नगर स्थित इंडिया हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। करीब नौ दिन तक भर्ती रखने के बाद सोमवार दोपहर करीब एक बजे डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। तीमारदार शव लेकर घर चले आए। शव दफनाने के लिए कब्र तक खोद दी गई। तभी लोगों की नजर उसकी चल रहीं सांसों पर पड़ी।
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मरीज को ले जाते परिवारीजन
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दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती
पिता खालिद ने बताया कि बेटे को इंदिरा नगर स्थित सीएनएस अस्पताल में भर्ती कराया है। वहां सोमवार शाम करीब पांच बजे मरीज का सीटी स्कैन कराया गया। डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में शिफ्ट किया है।
लोहिया संस्थान में नहीं मिला बेडः मरीज की सांसें चलती देख परिवारीजन उसे लोहिया अस्पताल ले गए। वहां पर न्यूरो का डॉक्टर न होने पर लोहिया संस्थान भेजा गया। संस्थान की इमरजेंसी में भी बेड न होने की बात कहकर वापस कर दिया।

 
मरीज को ले जाते परिवारीजन
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गलत हैं तीमारदारों के आरोप
तीमारदारों के आरोप गलत हैं। वे अपनी मर्जी से मरीज ले गए थे। मरीज को मृत घोषित नहीं किया गया था। इलाज के नाम पर किसी तरह की वसूली नहीं की गई। तीमारदारों ने नौ दिन में महज 50 हजार रुपये जमा किए थे। बाकी बिल न चुकाना पड़े, इसलिए ये आरोप लगाए जा रहे हैं। - डॉ. रफीक, संचालक, इंडिया हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर
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घोर लापरवाही, शिकायत पर कराएंगे जांच
तीमारदारों की ओर से कोई लिखित शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। जिंदा मरीज को मरा बताकर भेजना घोर लापरवाही है। - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
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