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स्तन कैंसर के इलाज से नहीं बिगड़ेगी महिलाओं की सुंदरता, जानें- क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Mon, 04 Feb 2019 03:00 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 04 Feb 2019 03:00 PM IST
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Cancer patients shared their experiences about the disease
डेमो
 स्तन कैंसर का इलाज कराने वाली महिलाओं को अब अपना सौंदर्य और आत्मविश्वास नहीं गंवाना होगा। उनका स्तन पहले की तरह रहेगा और कैंसर भी भाग जाएगा। यह संभव किया है डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के डॉ. विकास शर्मा ने। अब तक वे करीब दर्जनभर महिलाओं का इस तरह से ऑपरेशन कर चुके हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि इसमें स्तन को बिना नुकसान पहुंचाए पेट के पास से दूरबीन विधि से स्तन के निचले हिस्से में पहुंचा जाता है और वहां से कैंसर को हटा दिया जाता है। पहले ओपन सर्जरी में स्तन को काटना पड़ता था। इससे उन्हें काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता था। संस्थान में इस तरह का पहला ऑपरेशन जुलाई में हुआ था। इसमें एक महिला केस्तन से 24 गांठें निकाली गई थीं। 
Cancer patients shared their experiences about the disease
डॉ विकास शर्मा - फोटो : amar ujala
डॉ. शर्मा ने बताया कि शरीर के भीतर सामान्य कोशिकाओं के समूह के परिवर्तित होने से ट्यूमर बनता है और रक्त के प्रवाह और लसीका तंत्र के माध्यम से अन्य हिस्से में फैल जाता है। पहले ओपन सर्जरी होती थी, जिसमें मरीज को काफी दिनों तक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है। इसमें कैमरायुक्त ट्यूब के जरिए संबंधित स्थान पर पहुंचा जाता है और सर्जन प्रभावित हिस्से का ऑपरेशन कर देता है। इसमें रक्त का नुकसान बहुत कम होता है। रक्त संक्त्रस्मण भी नहीं होता, रिकवरी जल्दी होती है।
Cancer patients shared their experiences about the disease
डॉ हर्षवर्धन - फोटो : amar ujala
वहीं यदि किसी व्यक्ति का वजन कम होने लगता है, भूख कम लगे, मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव हो तो तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। यह कहना है कैंसर सोसायटी के सदस्य डॉ. हर्षवर्धन का। उन्होंने बताया कि कैंसर दिवस पर जागरूकता संबंधी कई कार्यक्रम किए जाएंगे। कैंसर के मरीजों में यह भ्रांति है कि सर्जरी कराने से कैंसर बढ़ने लगता है। लेकिन ऐसा नहीं हैं। सर्जरी के जरिए प्रभावित हिस्से को खत्म किया जाता है। 
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Cancer patients shared their experiences about the disease
डेमो
साथ ही उसके आसपास कैंसर को बढ़ावा देने वाली कोशिकाओं को रोकने के लिए कई तरह से उपचार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर ही कैंसर की स्थिति का आकलन होता है। इस आकलन केबाद कीमोथेरेपी, सर्जरी वगैरह को तय किया जाता है। एक सवाल के जवाब में डॉ. हर्षवर्धन आत्रेय ने बताया क एक धारणा है कि सुपरफूड  कैंसर को ठीक करते हैं। लेकिन अभी तक इसकेकोई वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले हैं।
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Cancer patients shared their experiences about the disease
डेमो
कैंसर का नाम सुनते ही जिंदगी खत्म होने का भय सताने लगता है, लेकिन ऐसा नहीं है। कैंसर का इलाज उपलब्ध है। तमाम लोग कैंसर से लड़कर खुशनुमा जिंदगी जी रहे हैं। इसके लिए बस जरूरत है चिकित्सकों की सलाह के अनुसार नियमित दवाओं का सेवन करते रहना और आत्मबल बनाए रखना। कैंसर दिवस की पूर्व संध्या पर ‘अमर उजाला’ ने कैंसर के मुंह से जिंदगी छीनकर लाने वाले मरीजों से बातचीत की। जाना कि किस तरह की दुश्वारियां झेलने केबाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार कैंसर को पछाड़ कर जिंदगी की जंग जीत ली। पेश है ऐसी ही दृढ़ इच्छाशक्ति रखने वालों की कहानी उन्हीं की जुबानी।
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