29 घंटे से प्रदर्शन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन के आवाहन पर सोमवार को प्रदेश भर से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष एकत्र होकर धरना शुरू किया था। संगठन की अध्यक्ष गीतांजलि मौर्या सहित कई नेताओं की गिरफ्तारी के बाद महिलाओं ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। दबाव में आई पुलिस ने शाम को उन्हें रिहा कर दिया। पुलिस के मनाने और बाद में लाठीचार्ज व वाटर कैनन से पानी की बौछार छोड़े जाने के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां पूरी रात सड़क पर जमी रहीं।
देर रात पुलिस ने एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि र्मार्या, महामंत्री प्रभावती और छाया सहित डेढ़ दर्जन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को गिरफ्तर कर अपने साथ ले गई। इसके बाद से प्रदर्शनकारी अपने नेताओं की रिहाई के बगैर किसी भी तरह की वार्ता करने को तैयार नही थी, जबकि पुलिस के अधिकारी सड़क से हटने के बाद नेताओं को रिहा करने पर अड़े रहे। दिन भर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी महिलाओं को सड़क से हटाने की कोशिश में लगे रहे लेकिन महिलायें नही मानी।
पुलिस अधिकारियों की बदजुबानी ने बिगाड़ा माहौल
अपने नेताओं को रिहा करने की मांग कर रहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का आरोप है कि दोपहर बाद से ही सीओ रैंक के कई अधिकारी, इंस्पेक्टर हुसैनगंज और इस्पेक्टर हजरतगंज महिलाओं का मजाक उड़ाने में लगे रहे। कई बार उन्होंने अभद्रता भी की। महिलाओं ने विरोध किया तो पुलिस ने पीटना शुरू कर दिया। महिला प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुरुष कर्मियों ने भी महिलाओं पर लाठियां बरसाईं।
लाठीचार्ज से गुस्साई महिलाओं ने पुलिस पर बोतलें, खाने के पैकेट के अलावा जो हाथ में आयो फेंकना शुरू कर दिया। कई महिलाओं ने पुलिस पर पत्थर भी फेंके। लाठीचार्ज और भगदड़ में सिद्घार्थ नगर की संगीता दुबे, हसरतुन्निसा, अर्चना श्रीवास्तव, मालती चौधरी, कल्पना देवी, इटावा की सीमा शुक्ला, महाराजगंज की सरोज जायसवाल, क्षमा वर्मा, निर्मला पाल, लखनऊ की उषा र्मार्या सहित दो दर्जन महिलायें चोटिल हुई।