लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें ए सतीश गणेश की अपनी अलग पहचान है। लखनऊ जोन के पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने न सिर्फ 11 जिलों के पुलिस अधिकारियों पर नकेल कसी, बल्कि अपराधियों की धरपकड़ कराने में सक्रिय रहते थे।
वर्ष 2016 में बैंक लूट की ताबड़तोड़ वारदातों ने राजधानी पुलिस को हिला दिया था। कई थानों की पुलिस, सर्विलांस सेल व क्राइम ब्रांच लुटेरों की तलाश में खाक छान रही थी। ऐसे में पुलिस महानिरीक्षक ए सतीश गणेश पुलिस की वेबसाइट पर सीसीटीवी फुटेज अपलोड कराने के साथ गिरोह को ट्रेस करने में जुटे थे। पता चला कि हैदराबाद पुलिस ने 2013 कमें जलपाईगुड़ी के मिथुन ग्वाला व मनोज ग्वाला को साथियों समेत पकड़ा था।
दोनों के फोटो सीसीटीवी फुटेज से मेल खा गए। पता चला कि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की निर्मला देवी से 20 लाख रुपयों से भरा बैग लूटने वाला मिथुन और हजरतगंज में पंकज मिश्रा से 20 लाख रुपये लूटने वाला मनोज ग्वाला था। कड़ी जोड़कर उन्होंने राजधानी पुलिस की राह आसान की। इसी तरह चौक में ज्वेलरी शॉप पर लाखों की डकैती, पारा में डकैती, दोहरा हत्याकांड जैसी अनेक संगीन वारदातों के गहन पर्यवेक्षण के साथ खुद अपराधियों की तलाश करते थे।
नागरिकों की शिकायतों की सुनवाई के साथ उस पर कार्रवाई कराने से 11 जिलों के सैकड़ों लोग उनसे सीधे जुड़े थे। खुद का नेटवर्क होने के कारण पुलिस की गतिविधियों से वाकिफ रहते थे। चालक की हत्या करके ट्रक लूटने वाले गिरोह का अपने नेटवर्क से पता लगाया और तीन जिलों के विभिन्न थानों में नाकाबंदी कराकर लूटी कार बरामद कराई थी।
व्यवहार में झलकता था संगीत के शौक
ए सतीश गणेश को संगीत का शौक और अच्छे गायक होने के कारण जनता से मृदु व्यवहार करते थे। पुलिसकर्मियों को डांटने में भी उनकी नजाकत झलकती थी। लापरवाह या घूसखोर पुलिसकर्मियों को डांटने के बजाय सीधी कार्रवाई करते थे। कानून व्यवस्था के लिए मातहतों के साथ चौराहों पर खड़े होने में कभी हिचक नहीं करते थे।