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काकोरी ट्रेन एक्शन: चंद्रशेखर आजाद ने ट्रेन की छत से तो बिस्मिल ने बोगी में संभाला था मोर्चा, पढ़ें पूरी दास्तां

Mon, 09 Aug 2021 04:27 PM IST
ishwar ashish नीरज ‘अम्बुज’, अमर उजाला, लखनऊ
नीरज ‘अम्बुज’, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 09 Aug 2021 04:27 PM IST
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96th anniversary of kakori train action.
- फोटो : amar ujala

शाम ढल चुकी थी। अंधेरा होने को था। शाहजहांपुर से लखनऊ जा रही 8 डाउन पैसेंजर काकोरी पहुंचने वाली थी। सब कुछ सामान्य दिनों जैसा था। बोगियों में चहल-पहल थी। काकोरी के आगे अचानक ट्रेन रुक गई। यात्री बोगियों में ही रहे, पर अंग्रेज अफसर घबरा गए। उनकी घबराहट लाजिमी भी थी। ट्रेन में खजाना जो लाया जा रहा था। जब बोगियों में क्रांतिकारियों ने पिस्तौलें निकाल ली तो मुसाफिरों में हड़कंप मच गया।



कुछ क्रांतिकारी ट्रेन की छत से नीचे कूदे, कुछ बोगियों से नीचे उतरे और खजाने वाली बोगी को घेर लिया। उसकी सुरक्षा में लगे अंग्रेज सिपाहियों के होश फाख्ते हो गए। देखते ही देखते खजाने के बक्से को नीचे गिरा दिया गया। बक्से के ताले पर वार करने लगे, पर उसे तोड़ना इतना आसान नहीं था। लेकिन, क्रांतिकारियों के बुलंद हौसले के आगे ताला कहां टिकता। ताला तोड़कर क्रांतिकारियों ने 4,600 रुपये लूट लिए और फरार हो गए। इन रुपयों का उपयोग अंग्रेजों के खिलाफ हथियार खरीदने के लिए किया जाना था।

कुछ ऐसा ही माहौल था 9 अगस्त, 1925 को काकोरी ट्रेन एक्शन कांड के वक्त, जहां क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों का खजाना लूटकर हुकूमत की नींव हिला दी। काकोरी ट्रेन एक्शन की 96वीं वर्षगांठ सोमवार को मनाई जा रही है। जिस हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी (एचआरए) से काकोरी कांड को अंजाम देने वाले क्रांतिकारी जुड़े थे, उसी से रामकृष्ण खत्री भी जुड़े हुए थे। काकोरी केस में उन पर भी मुकदमा चला था। उनके बेटे उदय खत्री ने काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़ी जानकारियां रविवार को अमर उजाला से साझा की।

96th anniversary of kakori train action.
- फोटो : amar ujala

यू बनीं थी खजाना लूटने की योजना
शहीद स्मृति समारोह समिति के उदय खत्री ने बताया कि एक बार पं. राम प्रसाद बिस्मिल शाहजहांपुर से लखनऊ आने वाली गाड़ी संख्या 8 डाउन की थर्ड क्लास से यात्रा कर रहे थे। शाहजहांपुर में ट्रंक को लोड किया गया। इसमें भारतीयों पर जुल्म कर ब्रिटिश हुकूमत द्वारा लूटा गया माल था। वहीं से इसे लूटने की योजना बनी। 9 अगस्त, 1925 का वह दिन आया, जब पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र नाथ लहरी, चंद्रशेखर आजाद, केशव चक्रवर्ती, मुरारी लाल शर्मा, बनवारी लाल, मनमथ नाथ गुप्ता, सचीन्द्र नाथ बख्शी, मुकुंदी लाल ने काकोरी में खजाने की लूट को अंजाम दिया।

उन्होंने बताया कि शहीद चंद्रशेखर आजाद व मुरारी शर्मा ट्रेन की छत पर थे, जबकि बिस्मिल, मनमथ, सचीन्द्र नाथ, मुकुंदी लाल थर्ड क्लास कम्पार्टमेंट में थे। राजेंद्र नाथ लहरी व अन्य साथी सेकंड क्लास कम्पार्टमेंट में थे। वे रिवॉल्वर व माउजर लेकर चढ़े थे। शाम छह बजे के बाद जब ट्रेन काकोरी स्टेशन से आगे बढ़ी तो खजाने को लूट लिया गया। क्रांतिकारियों को उम्मीद से कम खजाना मिला। उन्हें करीब 4600 रुपये मिले, जो आज की तारीख में चालीस से पचास लाख रुपये के आसपास होंगे। उनके पास बैग नहीं थे तो गमछे में खजाने को भरकर ले गए।

96th anniversary of kakori train action.
अमर शहीद अशफाक उल्ला खां। - फोटो : amar ujala

रुमाल से पकड़े गए क्रांतिकारी
लूटकांड के बाद घटनास्थल पर एक स्पेशल ट्रेन भेजी गई थी, जिससे दो सब इंस्पेक्टर सज्जाद अली और खुर्शीद अली खान मौके पर पहुंचे थे। घटनास्थल से कुछ दूरी पर सैफ टूटी मिली, जिसमें से पैसे गायब थे। इन्वेस्टीगेशन असिस्टेंड डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल आर हर्टन को जांच का जिम्मा सौंपा गया। उन्होंने पैसेंजरों से बातचीत की। इतना ही नहीं मौके पर एक रुमाल मिला, जिस पर शाहजहांपुर की लॉन्ड्री का निशान बना था। इसी रुमाल के जरिये जांच अधिकारी क्रांतिकारियों तक पहुंचे।

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96th anniversary of kakori train action.
अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद। - फोटो : amar ujala

कोठी रोशनुद्दौला में सुनवाई, रिंग थिएटर में हुआ फैसला
उदयखत्री ने बताया कि काकोरी ट्रेन एक्शन में 46 लोग अरेस्ट किए गए थे। मामले की सुनवाई कैसरबाग स्थित कोठी रोशनुद्दौला में हुई, जहां रोशनुद्दौला कचहरी थी। यहां लोअर कोर्ट थी। इसके बाद मामले को सेशन कोर्ट में भेज दिया गया। इसके लिए रिंग थिएटर (अब जीपीओ) में स्पेशल सेशन कोर्ट बनाई गई, जहां जज हैमिल्टन ने रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, राजेंद्र नाथ अशफाक को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

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96th anniversary of kakori train action.
अमर शहीद शचींद्रनाथ बख्शी। - फोटो : amar ujala

काकोरी थाने में दर्ज हुआ मुकदमा
काकोरी ट्रेन एक्शन का मुकदमा काकोरी थाने में आज भी दर्ज है। ट्रेन एक्शन कांड के बाद तत्कालीन स्टेशन मास्टर जोन्स ने 4601 रुपये की एफआईआर दर्ज कराई थी। जोन्स ने बताया था कि जिस सेफ को ट्रेन से लूटा गया, उसमें काटघर से काकोरी के बीच के उन सभी स्टेशनों के टिकट के पैसे थे, जहां पर सरकारी खजाने की सुविधा नहीं थी। लूटकांड की सूचना सबसे पहले गार्ड जगन्नाथ प्रसाद ने दी थी। उन्होंने हजरतगंज के कंट्रोलर को सूचना दी, जहां से स्टेशन मास्टर को सूचित किया गया।

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