शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखने के लिए फेफड़ों का स्वस्थ बने रहना सबसे आवश्यक माना जाता है। श्वसन क्रिया को सुचारू रूप से जारी रखने से लेकर शरीर के सभी अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाने तक में फेफड़ों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान फेफड़ों से संबंधित तमाम तरह की जटिलताएं देखने को मिली थीं, ऐसे में इस महत्वपूर्ण अंग का देखभाल करना और भी आवश्यक हो जाता है।
आज का योग: फेफड़ों को रखना है स्वस्थ और मजबूत, तो रोजाना कीजिए इन चार योगासनों का अभ्यास
फेफड़ों के लिए धनुषासन के लाभ
योगगुरु के मुताबिक फेफड़ों को स्वस्थ रखने में धनुषासन योग को काफी फायदेमंद माना जाता है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले आपको पेट के बल लेटना है और अपने घुटनों को अपने कूल्हों की ओर मोड़ना है। अब अपने हाथों से अपने टखनों को पकड़ें। अब अपने पैरों और बाजुओं को जितना हो सके ऊपर उठाएं और अपना चेहरा ऊपर रखें। जब तक आप कर सकते हैं तब तक इस मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें।
भुजंगासन योग के लाभ
फेफड़ों के स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने में भुजंगासन योग के भी तमाम फायदों का जिक्र मिलता है। इस योगासन को अस्थमा की समस्याओं को दूर करने और इम्यूनिटी को मजबूती देने में भी फायदेमंद माना जाता है। इस योगासन को करने के लिए पेट के बल लेटकर हथेली को कंधों के नीचे रखें। सांस लेते हुए और शरीर के अगले हिस्सों को ऊपर की और उठाएं। 10-20 सेकंड्स तक इसी स्थिति में रहें और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं। भुजंगासन कई और स्वास्थ्य समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।
फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए मत्स्यासन योग
माना जाता है कि मत्स्यासन योग का नियमित रूप से अभ्यास करने वाले लोगों को फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा कम होता है। यह योग श्वसन तंत्र को ठीक रखने में भी कारगर माना जाता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले अपनी पीठ के बल लेट जाएं और अपनी बाहों को अपने शरीर के नीचे मोड़ें। अपने सिर और छाती को ऊपर उठाएं, सांस लें और फिर अपनी पीठ को झुकाते हुए सिर को जमीन पर टिका दें। अपनी कोहनियों से पूरे शरीर का संतुलन बनाए रखें। गहरी सांस लें और छोड़ें। जब तक आप सहज हों तब तक इस स्थिति को बनाए रखें।
सुखासन (क्रॉस लेग्ड सिटिंग पोज)
सुखासन योग रक्त प्रवाह को बढ़ाने के साथ फेफड़ों को मजबूत बनाने लिए एक बेहतरीन अभ्यास है। यह फेफड़ों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और ऑक्सीजन के संचार को बढ़ाने में सहायक है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं। पीठ के पीछे से अपने दाहिने हाथ की सहायता से अपनी बायीं कलाई को पकड़ें। अब अपने कंधों को पीछे खींचते हुए श्वास लें। अब सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और अपने सिर को अपने दाहिने घुटने से स्पर्श करें। फिर से श्वास लें और प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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