शरीर के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए लिवर को स्वस्थ रखना बहुत आवश्यक होता है। लिवर को शरीर का पावरहाउस माना जाता है, जो भोजन के पाचन को बेहतर बनाए रखने के साथ कई ऐसे हार्मोन्स का उत्पादन करता है जिन्हें शरीर के लिए काफी आवश्यक माना जाता है। हालांकि पिछले कुछ समय में आहार और जीवनशैली की गड़बड़ी के कारण लिवर संबंधित कई तरह की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है, फैटी लिवर की समस्या उनमें से एक है।
आज का योग: फैटी लिवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए कारगर हैं ये तीन योगासन, इन अंगों को भी मिलेगा लाभ
बालासन योग का अभ्यास
बालासन या चाइल्ड पोज का नियमित अभ्यास करना आपके लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है। लिवर सहित पेट के तमाम अंगों की मालिश और उनमें रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने में चाइल्ड पोज योगासन करने के लाभ हो सकते हैं। बालासन योग आपकी रीढ़, जांघों, कूल्हों और टखनों की बेहतर स्ट्रेचिंग करने के साथ पीठ के ऊपरी हिस्से को मजबूत करता है। रीढ़ और हैमस्ट्रिंग के लिए भी इस योग का अभ्यास करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
शलभासन योग
शलभासन योग का नियमित अभ्यास आपके पेट के तमाम अंगों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। लिवर से हार्मोन्स के उत्पादन और पाचन को बढ़ावा देने में इस योग के अभ्यास को काफी मददगार माना जाता है। लिवर के अलावा शलभासन योग रीढ़ की हड्डी, पीठ और कोर की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग और मजबूती के लिए सहायक हो सकती है। यह छाती को खोलता है, पेट के अंगों को उत्तेजित करके उनके कार्यों को आसान बनाने में मदद करता है।
धनुषासन योग
फैटी लिवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए नियमित रूप से धनुषासन योग का अभ्यास करना लाभदायक हो सकता है। इस योग के अभ्यास से लिवर का कार्य आसान होता है साथ ही यह आसन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है। फैटी लिवर के लक्षणों को कम करने में भी इस योग के अभ्यास के लाभ हो सकते हैं। लिवर के साथ यह योगासन पीठ, जांघों, बाहों और छाती की सेहत को भी व्यवस्थित रखने में काफी सहायक माना जाता है।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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