रंगों का त्योहार आने वाला है। 17 मार्च को होलिका दहन और 18 मार्च को होली का पावन पर्व है। वैसे तो होली पूरे देश में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाई जाती है लेकिन भारत में ही अलग अलग जगहों पर होली को लेकर अलग अलग परंपरा और अलग तरीके से मनाने की प्रथा है। देश के कई हिस्सों में मनाई जाने वाली होली न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां कि होली में शामिल होने के लिए लोग दूर दराज से आते हैं। अधिकतर लोगों को यह तो पता है कि मथुरा बरसाने की होली सबसे मशहूर है लेकिन इसके अलावा भी कई और जगहें हैं जहां कि होली काफी प्रसिद्ध और खास है। कहीं फूलों से होली खेली जाती है तो कहीं रंगों से, किसी जगह पर लड्डू की होली होती है तो कहीं लट्ठमार होली की परंपरा है। अगली स्लाइड्स में जानिए देश की मशहूर होली और रंगों का यह पर्व मनाने की अलग-अलग परंपरा के बारे में।
Happy Holi 2022: भारत की इन पांच जगहों की होली है मशहूर, दूर दराज से लोग होते हैं शामिल
लठमार होली, मथुरा-वृंदावन
उत्तर प्रदेश में श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा बसी है, जहां की होली देश दुनिया में सबसे ज्यादा मशहूर है। मथुरा में लट्ठमार होली मनाई जाती है। होली में मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर और वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में होली का जश्न देखने लायक होता है। यहां लट्ठमार होली की परंपरा है, जिसमें महिलाएं लट्ठ यानी डंडों से लड़कों को खेल-खेल में मारती हैं और रंग लगाती हैं।
लठमार होली की दिलचस्प कहानी
दरअसल लट्ठमार होली मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लट्ठमार होली महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के तौर पर मनाई जाती है। जिसका महत्व श्रीकृष्ण से जुड़ा है। श्रीकृष्ण महिलाओं की रक्षा के लिए हमेशा उनकी मदद करते थे। लट्ठमार होली के जरिए महिलाएं लाठी डंडों से पुरुषों को मारती हैं। यह मजे और खेल में किया जाता है लेकिन इसके जरिए वह आत्मबल का प्रदर्शन करती हैं।
लड्डू और छड़ीमार होली, बरसाना
बरसाना में भी मथुरा की लठमार होली की तरह की छड़ीमार होली खेली जाती है। बरसाने की होली में महिलाएं प्रतिकात्मक तौर पर पुरुषों को लट्ठ या छड़ी से मारती हैं। वहीं पुरुष ढाल से अपनी रक्षा करते हैं। इसके अलावा यहां होली से कुछ दिन पहले लड्डू होली मनाई जाती है, जिसमें पंडित भगवान कृष्ण को लड्डू का भोग लगाते हैं और फिर उन्हीं लड्डूओं को भक्तों की ओर फेंकते हैं। इसके बाद अबीर गुलाल और फूलों की होली खेली जाती है।
हंपी, कर्नाटक
कर्नाटक में दो दिन की होली मनाई जाती है। कर्नाटक की होली काफी अनोखे तरीके की होती है, जो हंपी में मनाई जाती है। दूर दराज से लोग हंपी घूमने लिए आते हैं और नाच गाकर रंगों से होली मनाते हैं। हंपी की ऐतिहासिक गलियों में ढोल नगाड़ों की थाप के साथ जुलूस निकाले जाते हैं। कई घंटों तक रंग खेलने के बाद लोग तुंगभद्रा नदी और उसकी सहायक नहरों में स्नान करते हैं।