Janmashtami 2026 Delhi Temples: राजधानी दिल्ली में जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, संगीत, रोशनी, झांकियों और कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा ऐसा उत्सव है, जिसमें पूरा शहर कृष्णमय नजर आने लगता है। साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन दिल्ली के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, आरती, झांकियों और मध्यरात्रि जन्मोत्सव की तैयारियां की गई हैं।
जन्माष्टमी 2026: दिल्ली में कहां मनाएं जन्माष्टमी? इन 4 कृष्ण मंदिरों की लिस्ट कर लें सेव
Janmashtami celebration: अगर आप इस बार घर पर पूजा करने के साथ मंदिर जाकर भी कान्हा के जन्मोत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो दिल्ली में कई ऐसे मंदिर हैं जहां जन्माष्टमी का अनुभव बेहद खास हो सकता है। दक्षिण दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित इस्काॅन दिल्ली से लेकर द्वारका के इस्काॅन मंदिर तक, भक्तों के लिए दिनभर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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दिल्ली में जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी और रात में क्या खास होगा?
साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। दिल्ली में इस्काॅन के वैष्णव कैलेंडर के अनुसार 4 सितंबर को जन्माष्टमी और 5 सितंबर को नंदोत्सव निर्धारित है। दिल्ली के लिए इस्काॅन जन्माष्टमी की निशीथ पूजा का समय 4 सितंबर रात 11:57 बजे से 5 सितंबर रात 12:43 बजे तक बताया गया है।
- मध्यरात्रि का समय सबसे खास: कृष्ण जन्म की धार्मिक मान्यता मध्यरात्रि से जुड़ी है, इसलिए मंदिरों में रात के समय आरती, अभिषेक, भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव का वातावरण अपने चरम पर पहुंचता है।
- समय मंदिर के अनुसार बदल सकता है: अलग-अलग मंदिरों की प्रवेश व्यवस्था, दर्शन, कार्यक्रम और भीड़ प्रबंधन अलग हो सकते हैं। इसलिए निकलने से पहले संबंधित मंदिर की आधिकारिक सूचना जरूर देख लें।
दिल्ली में जन्माष्टमी मनाने के लिए कौन से कृष्ण मंदिर सबसे खास हैं?
दिल्ली का इस्काॅन, ईस्ट कैलाश में क्यों जाएं?
दिल्ली के सबसे प्रमुख कृष्ण मंदिरों में शामिल है। यहां जन्माष्टमी पर दिनभर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का माहौल रहता है। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 2026 में 108 कलश महाभिषेक, 108 महाआरती, कीर्तन, कृष्ण लीलाओं की झांकियां, प्रसाद सेवा और मध्यरात्रि उत्सव प्रमुख आकर्षण हैं।
किसके लिए खास?
अगर आप जन्माष्टमी को बड़े स्तर पर, भव्य सजावट, सामूहिक कीर्तन और आधी रात के कृष्ण जन्मोत्सव के साथ मनाना चाहते हैं, तो यह दिल्ली के प्रमुख विकल्पों में से एक है।
इस्काॅन द्वारका में जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है?
इस मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का खास संगम देखने को मिलता है। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यहां कीर्तन, कथा, दर्शन, महाआरती, महाभिषेक और भगवान को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं। जन्माष्टमी के समय मंदिर को फूलों और विशेष सजावट से सजाया जाता है तथा मध्यरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है।
यहां क्या खास देख सकते हैं?
- कृष्ण की लीलाओं पर आधारित कार्यक्रम और धार्मिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को उत्सव के साथ यहां क्या खास देख सकते हैं?
- कृष्ण की लीलाओं पर आधारित कार्यक्रम और धार्मिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को उत्सव के साथ कथा और भक्ति से जोड़ती हैं।
- मध्यरात्रि में होने वाली आरती और जन्मोत्सव यहां के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में शामिल होते हैं, इसलिए रात का कार्यक्रम देखने के लिए पहले से योजना बनाना बेहतर है।
बिरला मंदिर में जन्माष्टमी क्यों खास मानी जाती है?
दिल्ली के प्रसिद्ध मंदिरों और धार्मिक स्थलों में से एक है। जन्माष्टमी के दौरान यहां भक्त भगवान कृष्ण के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। मंदिर का वातावरण विशेष सजावट और धार्मिक उत्सव के कारण काफी आकर्षक हो जाता है।
अगर आप परिवार के साथ जन्माष्टमी पर मंदिर दर्शन करना चाहते हैं और बेहद भीड़भाड़ वाले बड़े आयोजन के बजाय पारंपरिक मंदिर वातावरण का अनुभव लेना चाहते हैं, तो बिरला मंदिर को अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं।
क्या दिल्ली में छोटे कृष्ण मंदिर भी जन्माष्टमी के लिए अच्छे विकल्प हैं?
जन्माष्टमी का आनंद लेने के लिए केवल बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में स्थानीय राधा-कृष्ण और कृष्ण मंदिरों में भी भजन, संकीर्तन, झांकी, आरती और प्रसाद वितरण जैसे आयोजन होते हैं। और जैसे मंदिर भी उन श्रद्धालुओं के लिए विकल्प हो सकते हैं जो अपने इलाके के आसपास कृष्ण भक्ति का उत्सव मनाना चाहते हैं।