फैटी लिवर की समस्या वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। शराब न पाने वाले लोगों में होने वाली नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) का नाम हाल ही में बदलकर मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) कर दिया गया है। ये दुनियाभर में लिवर की सबसे आम क्रोनिक बीमारी है, जो 32% से 38% वयस्क आबादी को प्रभावित करती है।
लिवर डिजीज: क्या दुबले-पतले लोगों को भी हो सकता है फैटी लिवर रोग? क्या कहते हैं विशेषज्ञ
दुबले-पतले लोगों को भी फैटी लिवर रोग हो सकता है। शोध के अनुसार सामान्य बीएमआई वाले लोगों में भी लिवर में फैट जमा हो सकता है, खासकर इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज जैसे जोखिमों के कारण ये समस्या बढ़ सकती है। भारतीय लोगों में फैटी लिवर की समस्या ज्यादा देखी जा रही है।
फैटी लिवर का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर माना जाता है कि दुबले-पतले लोगों में फैटी लिवर का खतरा नहीं होगा लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। लिवर में चर्बी जमा होने का संबंध केवल मोटापे से नहीं है। सामान्य वजन वाले लोगों में भी फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। मेडिकल की भाषा में इसे लीन फैटी लिवर कहा जाता रहा है।
- अमेरिकन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, फैटी लिवर वाले करीब 7 से 20 प्रतिशत लोगों का शरीर दुबला हो सकता है।
- भारत में भी सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले लोगों में फैटी लिवर पाया गया है। इसलिए सिर्फ शरीर देखकर लिवर को स्वस्थ मान लेना सही नहीं है।
दुबले-पतले लोगों में इसका खतरा
लिवर में चर्बी जमा होने के पीछे सिर्फ शरीर मोटापा जिम्मेदार नहीं होता। कुछ दुबले लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस, पेट के अंदर जमा आंतरिक चर्बी, डायबिटीज, ट्राइग्लिसराइड या कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी इसका खतरा बढ़ा सकती हैं।
- इसके अलावा आनुवंशिक कारण, शराब का सेवन, कुछ दवाएं और लिवर की दूसरी बीमारियां भी इसकी वजह बन सकती हैं। इसलिए दुबले-पतले लोगों को फैटी लिवर से सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
इन खतरों को भी जानिए
सामान्य बीएमआई का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि शरीर में चर्बी सही जगह पर है। कुछ लोगों में बाहर से शरीर दुबला दिख सकता है, लेकिन पेट के आसपास या शरीर के अंदर ज्यादा चर्बी जमा हो सकती है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जैसे मेटाबोलिक जोखिम भी फैटी लिवर का कारण बन सकते हैं। इसलिए दुबले-पतले लोगों को भी इनकी समय-समय पर जांच जरूर कराते रहना चाहिए।
- फैटी लिवर की शुरुआत अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होती है। जांच के दौरान अगर एंजाइम बार-बार बढ़े हुए मिल रहे हैं, डायबिटीज या दूसरी मेटाबोलिक समस्या है तो अपने जोखिमों के बारे में जानने के लिए जांच जरूर कराएं।
दुबले हैं तो फैटी लिवर से कैसे बचें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फैटी लिवर से बचाव का मतलब केवल वजन कम करना नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड चीजों से दूरी बहुत जरूरी है।
- फैटी लिवर से बचाव के लिए डायबिटीज, रक्तचाप व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। अगर जांच में फैटी लिवर की पुष्टि हो चुकी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिवर की स्थिति और फाइब्रोसिस के जोखिम की जांच करानी चाहिए।
- समय पर लाइफस्टाइल-खानपान में बदलाव के अलावा दवाओं की मदद से फैटी लिवर के खतरे को कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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