किशोरावस्था यानी 12-19 साल की उम्र में शरीर में तेजी से कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। आवाज में बदलाव से लेकर चेहरे पर मुंहासे, वजन में उतार-चढ़ाव और लड़कियों में माहवारी शुरू हो जाती है। ये बहुत सामान्य और प्राकृतिक स्थितियां हैं। हालांकि समस्या तब बढ़ जाती है जब यही सामान्य बदलाव कुछ असामान्य तरीके के लक्षण प्रकट करने लगें।
चिंताजनक: लड़कियों में बढ़ रहा पुरुषों वाला हार्मोन, हो रही हैं ये दिक्कतें; कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?
किशोरियों में बढ़ते टेस्टोस्टेरोन के स्तर को लेकर अध्ययनकर्ताओं ने चिंता जताई है। 852 बालिकाओं में 3.1 फीसदी का हार्मोन स्तर बढ़ा मिला। इससे चेहरे पर बाल, आवाज भारी होने, वजन बढ़ने से लेकर माहवारी संबंधी परेशानियों का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों ने इसके लिए संतुलित खानपान, व्यायाम और पर्याप्त नींद पर जोर दिया।
किशोरियों में बढ़ा मिला मेल हार्मोन
अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में पाया गया कि ओपीडी में आने वाली किशोरियों में मेल हार्मोन का स्तर ज्यादा था।
- 8-18 साल की 852 बालिकाओं पर आठ महीने तक किए गए अध्ययन में 3.1 फीसदी में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ा हुआ मिला।
- कुछ बालिकाओं में यह स्तर 200 एनजी/डीएल तक पहुंच गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हार्मोन्स में यह बदलाव केवल चेहरे या आवाज तक सीमित नहीं रहता। इससे शरीर में पुरुषों जैसे कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लोगों में चेहरे पर अनचाहे बाल, आवाज में भारीपन, मुंहासे, वजन बढ़ना और शरीर की बनावट में बदलाव इसके संकेत हो सकते हैं। वहीं, किशोरियों में माहवारी से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।
आखिर क्यों बढ़ रही है ये दिक्कत?
डॉक्टरों ने जांच में पाया कि जिन किशोरियों में ये दिक्कतें ज्यादा देखी जा रही थी, उनकी दिनचर्या में फास्टफूड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक था।
- ऐसे लड़कियों में लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप के इस्तेमाल की आदत भी ज्यादा थी।
- कई लड़कियों में देर रात तक जागने जैसी आदतें भी देखी गईं।
- हालांकि, किसी एक आदत को हार्मोन बढ़ने का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता और ऐसे लक्षणों के पीछे पीसीओएस समेत कई चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं।
अब सवाल ये है कि इसके कौन से संकेत शरीर में दिखाई देते हैं और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
पीरियड्स पर पड़ने वाला असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओपीडी में आने वाली 12-18 साल की उम्र की बालिकाओं, किशोरियों में माहवारी संबंधी परेशानी देखने को मिल रही है। इनमें से करीब दो फीसदी में फास्टफूड-खराब दिनचर्या की वजह से यह दिक्कत मिल रही है।
- महिलाओं में प्रतिदिन कुछ न कुछ फास्टफूड-डिब्बाबंद चीजें खाने की आदत देखी गई।
- कई लड़कियां रोज 4-6 घंटे मोबाइल-लैपटॉप का भी उपयोग करती थी जिससे सोने-जागने का समय बिगड़ गया।
- अधिकांश रात 11 से एक बजे के बीच सोती हैं। लंबे समय तक ऐसी आदतों से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ गया।
- इन्हीं वजहों से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की दिक्कत भी बनी। इससे अंडाणु बनना प्रभावित हो रहा है। इससे 10-12 फीसदी में आगे चलकर बांझपन का भी खतरा रहता है।
- इससे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) की दिक्कत भी बढ़ रही है, इससे अंडाणु बनना प्रभावित हो रहा है। ये आगे चलकर बांझपन का भी खतरा बढ़ा सकता है।
डॉक्टर कहते हैं अगर आपको भी मुंहासे, बाल झड़ने की समस्या, वजन बढ़ने या फिर पीरियड्स की दिक्कतें हो रही हैं तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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