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Mother's Day 2018: कलेजे के टुकड़ों के लिए किस हद तक गुजर जाती है मां, ये रहा सबूत

Sun, 13 May 2018 05:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 13 May 2018 05:35 PM IST
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chandigarh Mother's Day 2018, salute to a mother-in-law mewa devi of haryana
मदर्स डे, मेवा देवी की कहानी
एक मां अपने कलेजे के टुकड़ों के लिए किस हद तक गुजर जाती है, इसका जीता जागता सबूत है ये, खुद देख लीजिए यकीं नहीं कर पाएंगे।
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मदर्स डे, मेवा देवी की कहानी
ये हैं हरियाणा में फतेहाबाद जिले के गांव खैरातीखेड़ा की मेवा देवी। इन्होंने पति रामचंद्र कसाणा के साथ मिलकर न केवल अपने सात बेटों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया, बल्कि अपनी बहुओं को भी पढ़ा-लिखाकर आत्मनिर्भर बनाया। मेवा देवी ने बहू को ग्रेजुएशन के साथ जेबीटी कोर्स कराया और आज उनकी बहू सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं।
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मदर्स डे, मेवा देवी की कहानी
सात बेटे, सातों ही सरकारी नौकरी पर
मेवा देवी के सात बेटे हैं। वो सभी सरकारी सेवा में हैं। उनके बड़े पुत्र भूप सिंह बिजली बोर्ड में कार्यरत हैं। पुत्र नारायण सिंह सिंह सेना में सेवानिवृत्त होकर अध्यापक लगे हुए हैं। आत्मा राम कसाणा एआइपीआरओ पद पर कार्यरत हैं। जय भगवान आर्मी में सूबेदार, महेंद्र सिंह करनाल शुगर मिल में लिपिक, बलराज सिंह हरियाणा विधानसभा चंडीगढ़, रोहताश चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।
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डेमो - फोटो : डेमो
हरियाणा सरकार ने इसी साल मेवा देवी को इस बेहतरीन कार्य के लिए प्रदेश स्तर पर सर्वश्रेष्ठ माता के पुरस्कार से नवाजा था। मेवादेवी बताती हैं कि वर्ष 1996 में उसके चौथे बेटे महेंद्र की शादी हिसार के गांव ढाणी श्यामलाल की प्रवेश उर्फ मधु से हुई। शादी के वक्त मधु बीए प्रथम वर्ष में पढ़ रही थी। वह शादी के बाद पढ़ाई छोड़ना चाहती थी, लेकिन मैंने उसे आगे पढ़ने को प्रेरित किया।

 
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exam shimla
उसकी पुत्रवधू पढ़ाई न छोड़े, इसके लिए वह उसे कॉलेज जाने के लिए प्रतिदिन दरियापुर तक छोड़कर आती, जो खैरातीखेड़ा से करीब तीन किलोमीटर दूर है। इससे बाद वह फतेहाबाद तक बस में जाती। आज मधु चंडीगढ़ के सेक्टर 32 के स्कूल में अध्यापक पद पर कार्यरत है। मधु का कहना है कि आज वह जो कुछ भी है, अपनी सास मेवा देवी के बदौलत ही है।
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