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लिंफोमा जागरूकता दिवस 2026: ब्लड कैंसर का एक प्रकार है लिंफोमा, डॉक्टर ने बताया क्यों समय पर इलाज है बेहद अहम
Tue, 15 Sep 2026 04:31 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 15 Sep 2026 04:31 PM IST
सार
World Lymphoma Awareness Day 2026: लिंफोमा तेजी से बढ़ने वाला ब्लड कैंसर है, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से मरीज के ठीक होने की संभावना बेहतर हो सकती है।
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लिंफोमा जागरूकता दिवस 2026
- फोटो : AI
World Lymphoma Awareness Day 2026: हर साल 15 सितंबर को विश्व लिंफोमा जागरूकता दिवस (World Lymphoma Awareness Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लिंफोमा को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना और इस बीमारी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान आकर्षित करना है।
लिंफोमा जागरूकता दिवस 2026
- फोटो : AI
सबसे पहले जान लें कि लिंफोमा क्या है?
लिंफोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो लसीका तंत्र की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। लसीका तंत्र शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके प्रमुख प्रकार हैं:
डॉ. राहुल भार्गव, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड, हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट के मुताबिक, नॉन-हॉजकिन लिंफोमा अधिक आम है। इसके विभिन्न प्रकारों में DLBCL प्रमुख है।
लिंफोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो लसीका तंत्र की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। लसीका तंत्र शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके प्रमुख प्रकार हैं:
- हॉजकिन लिंफोमा
- नॉन-हॉजकिन लिंफोमा (NHL)
डॉ. राहुल भार्गव, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड, हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट के मुताबिक, नॉन-हॉजकिन लिंफोमा अधिक आम है। इसके विभिन्न प्रकारों में DLBCL प्रमुख है।
लिंफोमा जागरूकता दिवस 2026
- फोटो : AI
DLBCL क्यों है महत्वपूर्ण?
Diffuse Large B-Cell Lymphoma (DLBCL) एक आक्रामक प्रकार का नॉन-हॉजकिन लिंफोमा है, जो तेजी से बढ़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इसका इलाज संभव है और शुरुआती चरण में सही उपचार रणनीति मरीज के परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
लिंफोमा के इलाज में मरीज की बीमारी के प्रकार, स्टेज और अन्य मेडिकल स्थितियों के आधार पर उपचार तय किया जाता है। पिछले वर्षों में उपचार के विकल्पों में भी प्रगति हुई है और उपयुक्त मरीजों के लिए लक्षित एंटीबॉडी आधारित उपचार समेत कई विकल्प उपलब्ध हुए हैं।
Diffuse Large B-Cell Lymphoma (DLBCL) एक आक्रामक प्रकार का नॉन-हॉजकिन लिंफोमा है, जो तेजी से बढ़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इसका इलाज संभव है और शुरुआती चरण में सही उपचार रणनीति मरीज के परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
लिंफोमा के इलाज में मरीज की बीमारी के प्रकार, स्टेज और अन्य मेडिकल स्थितियों के आधार पर उपचार तय किया जाता है। पिछले वर्षों में उपचार के विकल्पों में भी प्रगति हुई है और उपयुक्त मरीजों के लिए लक्षित एंटीबॉडी आधारित उपचार समेत कई विकल्प उपलब्ध हुए हैं।
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लिंफोमा जागरूकता दिवस 2026
- फोटो : AI
लिंफोमा के संभावित लक्षण
लिंफोमा के लक्षण व्यक्ति और बीमारी के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। आम संकेतों में शामिल हैं:
इनमें से कोई लक्षण होने का मतलब लिंफोमा होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों की डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
लिंफोमा के लक्षण व्यक्ति और बीमारी के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। आम संकेतों में शामिल हैं:
- गर्दन, बगल या जांघ के पास बिना दर्द वाली गांठ या लिम्फ नोड का बढ़ना
- लंबे समय तक बुखार
- रात में बहुत अधिक पसीना आना
- बिना कोशिश के वजन कम होना
- लगातार थकान
- त्वचा में खुजली
- कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी या छाती में दबाव
इनमें से कोई लक्षण होने का मतलब लिंफोमा होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों की डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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लिंफोमा जागरूकता दिवस 2026
- फोटो : AI
भारत में DLBCL को लेकर चिंता
डॉ. राहुल भार्गव के दिए आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल DLBCL के करीब 25,000 नए मामले सामने आते हैं। ऐसे में बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। खासतौर पर मरीज और परिवार यह समझें कि आक्रामक लिंफोमा का निदान अपने-आप में निराशाजनक परिणाम का संकेत नहीं है। जल्दी पहचान, विशेषज्ञ की सलाह और सही उपचार मरीज के लिए महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
डॉ. राहुल भार्गव के दिए आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल DLBCL के करीब 25,000 नए मामले सामने आते हैं। ऐसे में बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। खासतौर पर मरीज और परिवार यह समझें कि आक्रामक लिंफोमा का निदान अपने-आप में निराशाजनक परिणाम का संकेत नहीं है। जल्दी पहचान, विशेषज्ञ की सलाह और सही उपचार मरीज के लिए महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।