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झारखंड पुलिस में निलंबन का खेल: तीन महीने का नियम, आठ महीने तक फंसी फाइलें; एसोसिएशन ने उठाए सवाल
Tue, 15 Sep 2026 06:32 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Tue, 15 Sep 2026 06:32 PM IST
सार
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने पुलिस मैनुअल के तहत निलंबन की निर्धारित तीन महीने की सीमा का पालन नहीं होने पर चिंता जताई है। एसोसिएशन का आरोप है कि कई जिलों और इकाइयों में पुलिसकर्मियों को छह से आठ महीने या उससे अधिक समय तक निलंबित रखकर विभागीय फाइलें लंबित की जा रही हैं।
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झारखंड पुलिस एसोसिएशन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने विभिन्न जिलों और इकाइयों में पुलिस मैनुअल के नियमों के उल्लंघन तथा महीनों से लंबित निलंबन फाइलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने सभी संबंधित पुलिस अधीक्षकों और कमांडेंट से ऐसी फाइलों का शीघ्र निष्पादन करने का आग्रह किया है।
नियमानुसार तीन महीने की सीमा
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव सह कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पांडेय ने बयान जारी कर बताया कि जिलों और इकाइयों में पुलिसकर्मियों तथा पदाधिकारियों को महीनों तक निलंबित रखा जा रहा है। पुलिस मैनुअल में किसी भी कर्मी को अधिकतम तीन महीने तक ही निलंबित रखने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। नियम के अनुसार, इस निर्धारित समय सीमा के भीतर विभागीय कार्यवाही का संचालन करके कर्मी के दोषी होने पर उसके अनुरूप सजा देने और निर्दोष पाए जाने पर उसे दोषमुक्त करते हुए निलंबन से मुक्त करने का प्रावधान है।
मानसिक और आर्थिक शोषण का आरोप
एसोसिएशन के अनुसार, जिलों और इकाइयों में कर्मियों को छह से आठ महीने या उससे भी अधिक समय तक अकारण निलंबित रखकर उनकी फाइलों को अटकाया जा रहा है। साल-साल भर तक विभागीय कार्यवाही का निष्पादन न होना न केवल नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि यह एक प्रकार का मानसिक और आर्थिक शोषण भी है।
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ये भी पढ़ें- झारखंड: जमीन म्यूटेशन के एवज में मांगे थे 30 हजार, 15 हजार लेते एसीबी ने राजस्व कर्मचारी को दबोचा
हाल के दिनों में ट्रांसफर-पोस्टिंग, अंगरक्षक व उनके हथियार और सहायक अवर निरीक्षक को अंगरक्षक बनाकर रखने में बरती जा रही अनियमितताओं के संबंध में कनीय अधिकारियों तथा कर्मियों ने एसोसिएशन को मौखिक और टेलीफोन के माध्यम से गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। नियम-विरुद्ध पदस्थापन से पुलिसकर्मियों के मनोबल तथा कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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नियमानुसार तीन महीने की सीमा
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव सह कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पांडेय ने बयान जारी कर बताया कि जिलों और इकाइयों में पुलिसकर्मियों तथा पदाधिकारियों को महीनों तक निलंबित रखा जा रहा है। पुलिस मैनुअल में किसी भी कर्मी को अधिकतम तीन महीने तक ही निलंबित रखने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। नियम के अनुसार, इस निर्धारित समय सीमा के भीतर विभागीय कार्यवाही का संचालन करके कर्मी के दोषी होने पर उसके अनुरूप सजा देने और निर्दोष पाए जाने पर उसे दोषमुक्त करते हुए निलंबन से मुक्त करने का प्रावधान है।
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मानसिक और आर्थिक शोषण का आरोप
एसोसिएशन के अनुसार, जिलों और इकाइयों में कर्मियों को छह से आठ महीने या उससे भी अधिक समय तक अकारण निलंबित रखकर उनकी फाइलों को अटकाया जा रहा है। साल-साल भर तक विभागीय कार्यवाही का निष्पादन न होना न केवल नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि यह एक प्रकार का मानसिक और आर्थिक शोषण भी है।
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हाल के दिनों में ट्रांसफर-पोस्टिंग, अंगरक्षक व उनके हथियार और सहायक अवर निरीक्षक को अंगरक्षक बनाकर रखने में बरती जा रही अनियमितताओं के संबंध में कनीय अधिकारियों तथा कर्मियों ने एसोसिएशन को मौखिक और टेलीफोन के माध्यम से गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। नियम-विरुद्ध पदस्थापन से पुलिसकर्मियों के मनोबल तथा कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।