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जानना जरूरी: क्या फैटी लिवर वाले व्यक्ति को डायबिटीज हो सकती है? यहां जानें इस बारे में
Tue, 15 Sep 2026 11:22 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:22 AM IST
सार
Fatty Liver and Diabetes Connection: अगर आप अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहते हैं तो ये जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि फैटी लिवर और डायबिटीज के बीच क्या कनेक्शन है।
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क्या फैटी लिवर वाले व्यक्ति को डायबिटीज हो सकती है?
- फोटो : AI
Fatty Liver and Diabetes Connection: फैटी लिवर और डायबिटीज आज के समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। खास बात यह है कि इन दोनों के बीच सीधा संबंध देखा गया है। शरीर में एक समस्या होने पर दूसरी का खतरा भी बढ़ सकता है। यही वजह है कि अगर किसी व्यक्ति को फैटी लिवर है या ब्लड शुगर बढ़ा हुआ रहता है, तो उसे अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
क्या फैटी लिवर वाले व्यक्ति को डायबिटीज हो सकती है?
- फोटो : AI
फैटी लिवर और डायबिटीज का क्या संबंध है?
लिवर शरीर में शुगर और फैट के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो कुछ लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो सकता है। इसका मतलब है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं। इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने पर ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है और भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।
लिवर शरीर में शुगर और फैट के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो कुछ लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो सकता है। इसका मतलब है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं। इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने पर ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है और भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।
क्या फैटी लिवर वाले व्यक्ति को डायबिटीज हो सकती है?
- फोटो : AI
डायबिटीज से फैटी लिवर का खतरा क्यों बढ़ सकता है?
टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस आम समस्या है। इसके साथ शरीर में फैट के मेटाबॉलिज्म में बदलाव हो सकता है, जिससे लिवर में फैट जमा होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए दोनों स्थितियां कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। हालांकि, हर फैटी लिवर मरीज को डायबिटीज होगी या हर डायबिटीज मरीज को फैटी लिवर होगा, ऐसा जरूरी नहीं है।
टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस आम समस्या है। इसके साथ शरीर में फैट के मेटाबॉलिज्म में बदलाव हो सकता है, जिससे लिवर में फैट जमा होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए दोनों स्थितियां कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। हालांकि, हर फैटी लिवर मरीज को डायबिटीज होगी या हर डायबिटीज मरीज को फैटी लिवर होगा, ऐसा जरूरी नहीं है।
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क्या फैटी लिवर वाले व्यक्ति को डायबिटीज हो सकती है?
- फोटो : AI
किन लोगों में ज्यादा जोखिम?
- अधिक वजन या मोटापे वाले लोग
- पेट के आसपास ज्यादा चर्बी वाले लोग
- शारीरिक गतिविधि कम करने वाले लोग
- जिनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस है
- परिवार में टाइप-2 डायबिटीज का इतिहास रखने वाले लोग
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क्या फैटी लिवर वाले व्यक्ति को डायबिटीज हो सकती है?
- फोटो : AI
बचाव के लिए क्या करें?
वजन को स्वस्थ सीमा में रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने और संतुलित डाइट लेने से दोनों स्थितियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। मीठे पेय, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक कैलोरी वाले भोजन को सीमित करना भी उपयोगी हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को फैटी लिवर या डायबिटीज की पुष्टि हो चुकी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और लिवर की नियमित जांच कराना महत्वपूर्ण है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
वजन को स्वस्थ सीमा में रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने और संतुलित डाइट लेने से दोनों स्थितियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। मीठे पेय, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक कैलोरी वाले भोजन को सीमित करना भी उपयोगी हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को फैटी लिवर या डायबिटीज की पुष्टि हो चुकी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और लिवर की नियमित जांच कराना महत्वपूर्ण है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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