{"_id":"6aa79f96b2179f8b8f0e63fb","slug":"world-alzheimer-s-day-2026-early-signs-of-dementia-full-list-memory-loss-symptoms-in-hindi-2026-09-14","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"विश्व अल्जाइमर दिवस: क्या आपकी चाल और बातचीत में आया बदलाव अल्जाइमर का संकेत है? न्यूरोलॉजिस्ट ने समझाया","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
विश्व अल्जाइमर दिवस: क्या आपकी चाल और बातचीत में आया बदलाव अल्जाइमर का संकेत है? न्यूरोलॉजिस्ट ने समझाया
Mon, 21 Sep 2026 10:28 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 21 Sep 2026 10:28 AM IST
सार
World Alzheimer's Day 2026: विश्व अल्जाइमर दिवस पर जानें अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण, जोखिम कारक, बचाव और समय पर जांच का महत्व। याददाश्त के साथ व्यवहार और रोजमर्रा की क्षमता में बदलावों पर भी दें ध्यान।
विज्ञापन
विश्व अल्जाइमर दिवस
- फोटो : AI
World Alzheimer's Day 2026: क्या दिमाग में होने वाले शुरुआती बदलाव सिर्फ याददाश्त कमजोर होने से ही पता चलते हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा जरूरी नहीं है। चलने, बातचीत करने और रोजमर्रा के काम करने के तरीके में आए बदलाव भी ध्यान देने योग्य हो सकते हैं।
विश्व अल्जाइमर दिवस
- फोटो : AI
दिखते हैं ये बदलाव
चलने में दिखे बदलाव
डॉ. नेहा पंडिता के अनुसार, मस्तिष्क केवल याददाश्त से जुड़ा नहीं है, बल्कि शरीर के संतुलन, तालमेल और चलने जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर कोई व्यक्ति पहले की तुलना में छोटे कदम लेने लगे, धीमी गति से चले, मुड़ते समय झिझके या किसी बाधा के आसपास से निकलने में असहज महसूस करे, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चाल में बदलाव हमेशा मानसिक गिरावट का संकेत नहीं होता। गठिया, नजर की समस्या, कुछ दवाओं के प्रभाव और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।
चलने में दिखे बदलाव
डॉ. नेहा पंडिता के अनुसार, मस्तिष्क केवल याददाश्त से जुड़ा नहीं है, बल्कि शरीर के संतुलन, तालमेल और चलने जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर कोई व्यक्ति पहले की तुलना में छोटे कदम लेने लगे, धीमी गति से चले, मुड़ते समय झिझके या किसी बाधा के आसपास से निकलने में असहज महसूस करे, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चाल में बदलाव हमेशा मानसिक गिरावट का संकेत नहीं होता। गठिया, नजर की समस्या, कुछ दवाओं के प्रभाव और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।
विश्व अल्जाइमर दिवस
- फोटो : AI
बातचीत में बदलाव
कभी-कभार किसी शब्द को याद करने में परेशानी होना सामान्य है। लेकिन डॉ. पंडिता के मुताबिक, अगर व्यक्ति के बातचीत करने के तरीके में लगातार बदलाव आने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिचित शब्दों को बार-बार याद करने में परेशानी, बातचीत के बीच विषय भूल जाना, बहुत अस्पष्ट जवाब देना या किसी ऐसी बात को समझाने में कठिनाई होना जिसे वह पहले आसानी से समझा लेता था, मानसिक बदलाव के संकेत हो सकते हैं।
कभी-कभार किसी शब्द को याद करने में परेशानी होना सामान्य है। लेकिन डॉ. पंडिता के मुताबिक, अगर व्यक्ति के बातचीत करने के तरीके में लगातार बदलाव आने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिचित शब्दों को बार-बार याद करने में परेशानी, बातचीत के बीच विषय भूल जाना, बहुत अस्पष्ट जवाब देना या किसी ऐसी बात को समझाने में कठिनाई होना जिसे वह पहले आसानी से समझा लेता था, मानसिक बदलाव के संकेत हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विश्व अल्जाइमर दिवस
- फोटो : AI
रोजमर्रा के कामों में परेशानी
विशेषज्ञ के अनुसार, रोजाना किए जाने वाले सामान्य काम भी मस्तिष्क की कार्यक्षमता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। चाय बनाना, बिल का भुगतान करना, मोबाइल फोन चलाना, दवाइयों को व्यवस्थित रखना या वर्षों से बनाई जा रही पसंदीदा रेसिपी तैयार करना जैसे कामों में अचानक बार-बार गलतियां होने लगें, जरूरी चरण छूटने लगें या व्यक्ति को दूसरों की मदद की जरूरत बढ़ने लगे, तो यह ध्यान देने योग्य बदलाव है।
विशेषज्ञ के अनुसार, रोजाना किए जाने वाले सामान्य काम भी मस्तिष्क की कार्यक्षमता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। चाय बनाना, बिल का भुगतान करना, मोबाइल फोन चलाना, दवाइयों को व्यवस्थित रखना या वर्षों से बनाई जा रही पसंदीदा रेसिपी तैयार करना जैसे कामों में अचानक बार-बार गलतियां होने लगें, जरूरी चरण छूटने लगें या व्यक्ति को दूसरों की मदद की जरूरत बढ़ने लगे, तो यह ध्यान देने योग्य बदलाव है।
विज्ञापन
विश्व अल्जाइमर दिवस
- फोटो : AI
बदलती परिस्थितियों में परेशानी
डॉ. नेहा पंडिता बताती हैं कि मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण क्षमता बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना भी है। कुछ लोग अपनी रोजाना की तय दिनचर्या में सामान्य रूप से काम कर लेते हैं, लेकिन रास्ता बदलने, किसी योजना में बदलाव होने या परिचित उपकरण को अलग तरीके से इस्तेमाल करने पर असामान्य रूप से उलझन में पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति केवल चीजें भूलने से जुड़ी नहीं होती, बल्कि योजना बनाने और परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता में बदलाव से भी संबंधित हो सकती है।
डॉ. नेहा पंडिता बताती हैं कि मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण क्षमता बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना भी है। कुछ लोग अपनी रोजाना की तय दिनचर्या में सामान्य रूप से काम कर लेते हैं, लेकिन रास्ता बदलने, किसी योजना में बदलाव होने या परिचित उपकरण को अलग तरीके से इस्तेमाल करने पर असामान्य रूप से उलझन में पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति केवल चीजें भूलने से जुड़ी नहीं होती, बल्कि योजना बनाने और परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता में बदलाव से भी संबंधित हो सकती है।