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पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज हो जाता है, जानें कैसे

Wed, 11 Dec 2019 04:17 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Wed, 11 Dec 2019 04:17 PM IST
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women mind works faster during menstruation
- फोटो : pixabay

औरतों में माहवारी एक बुनियादी अमल है। यही क़ुदरती अमल उसे समाज में औरत का दर्जा दिलाता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि इंसानी कायनात का दारोमदार इसी पर टिका है। माहवारी से पहले और उसके दौरान महिला की अपने शरीर और ख़ुद से लड़ाई चलती रहती है। उसके मिज़ाज में बहुत से बदलाव नज़र आने लगते हैं। प्राचीन काल में इसे औरत को पड़ने वाले दौरे के तौर पर देखा जाता था। यहां तक कि मिस्र से लेकर ग्रीस के दार्शनिकों का मानना था कि हर महीने औरत के मन में सेक्सुअल डिज़ायर का उफ़ान उठता है। जब ये डिज़ायर पूरी नहीं होती तो उसके शरीर से ख़ून का रिसाव शुरू हो जाता है।

women mind works faster during menstruation
- फोटो : pixabay

ये सही बात है कि माहवारी शुरू होने से पहले औरत के मूड में बदवाल आता है। उसका मिज़ाज चिड़चिड़ा हो जाता है। शरीर के किसी ना किसी हिस्से में अजीब खिंचाव या दर्द होने लगता है। ये कैफ़ियत इशारा करती है कि अब बस कुछ ही वक़्त में ब्लीडिंग शुरू होने वाली है। लेकिन ऐसी कैफ़ियत सभी औरतों की हो ये ज़रूरी नहीं है। कुछ महिलाओं को दर्द बहुत ज़्यादा होता है, कुछ को कम। जबकि कुछ को नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त दर्द होता है। आज भी बहुत से लोग मानते हैं कि औरत की ये कैफ़ियत सेक्स से महरूमी के सबब होती है।

यही वजह है कि आज भी कम पढ़े-लिखे लोग लड़कियों को समझाते हैं कि शादी के बाद दर्द की ये शिकायत दूर हो जाएगी। लेकिन मॉडर्न साइंस और रिसर्च माहवारी के दौरान महिलाओं में होने वाले इस बदलाव के कई पॉज़िटिव पहलू देखती है। 

women mind works faster during menstruation
- फोटो : pixa
दिमाग की थ्योरी

नई रिसर्च के मुताबिक़, माहवारी पूरी होने के बाद औरतों में ख़ास तरह की जागरूकता बढ़ जाती है। माहवारी के तीन हफ़्ते बाद उनके कम्युनिकेशन स्किल बेहतर हो जाते हैं। जिन बातों को दूसरे लोग कहने में डरते हैं, उन्हें वो खुलकर कह देती हैं। जैसे ही माहवारी का नया चक्र शुरू होता है, उनका ज़हन तेज़ी से काम करना शुरू कर देता है।

पुराने दौर में लोग मानते थे कि औरत के मिज़ाज में ये बदलाव पेट में चल रही उथल-पुथल की वजह से होते हैं। जबकि इन बदलावों का सोर्स अंडाशय है, जहां ओएस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नाम के दो हार्मोन पूरे महीने अलग-अलग मात्रा में निकलते रहते हैं और पेट की दीवार के चारों तरफ़ एक चादर बनाते हैं। यही हार्मोन फ़ैसला करते हैं कि अंडा कब तैयार करना है। इसी हार्मोन की वजह से औरत की सेहत और मिज़ाज दोनों पर असर पड़ता है।

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women mind works faster during menstruation
- फोटो : pixabay

माहवारी चक्र पर 1930 के दशक से रिसर्च की जा रही है। वैज्ञानिकों के लिए भी ये रिसर्च का दिलचस्प विषय है। इसकी प्रेरणा उन्हें सिर्फ़ महिलाओं की बायोलॉजी समझने से नहीं मिली है। बल्कि इस बात से मिली की औरतें, मर्दों से किन मायनों में और कितना अलग हैं। इन दोनों के बीच फ़र्क़ की बुनियादी मिसाल हमारे दिमाग़ में है।

ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट मार्कस हसमैन के मुताबिक़, वर्षों तक यही माना जाता रहा कि मर्द और औरत दोनों अपने हार्मोन की वजह से हर महीने इस तरह के चक्र से गुज़रते हैं। औरतों में माहवारी होती है और मर्दों में टेस्टोस्टोरोन का स्तर बढ़ता घटता है। जबकि औरतों का दिमाग़ मर्दों से अलग काम करता है। उनके दिमाग़ की थ्योरी मर्दों से बेहतर होती है। यही वजह है कि उनके कम्युनिकेशन और सोशल स्किल मर्दों से बेहतर होते हैं।

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women mind works faster during menstruation
- फोटो : Pixabay
मर्दों के मुकाबले नए शब्द तेजी से याद करती हैं महिलाएं
शिकागो यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक पाउलिन मकी का कहना है कि औरतों का ज़हन किसी भी शब्द की हिज्जे मर्दों के मुक़ाबले तेज़ी से याद रखता है। यही नहीं औरतें मर्दों के मुक़ाबले तेज़ी से बोलती हैं और उनके ज़हन में दर्ज लफ़्ज़ों की तादाद, मर्दों से ज़्यादा होती है।

माना जाता है कि हज़ारों वर्ष पहले औरतें अपने बच्चों को अच्छे-बुरे के बीच फ़र्क़ करने के उपदेश देती रही हैं, शायद इसलिए भी लड़कियों को बोलने की प्रैक्टिस अच्छी होती है। लेकिन क्या इस वजह के पीछे भी हार्मोन ज़िम्मेदार हैं, ये बड़ा सवाल है।
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