शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पाचन ठीक रहना जरूरी है और पाचन ठीक रखने के लिए गुड बैक्टीरिया को जरूरी माना जाता है। गुड बैक्टीरिया को वैज्ञानिक भाषा में प्रोबायोटिक्स कहा जाता है। ये हमारी आंतों में पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने से लेकर इम्युनिटी मजबूत करने तक कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
Good Bacteria: शरीर में कम तो नहीं हो गए हैं गुड बैक्टीरिया, कैसे लगाएं इसका पता? यहां जानिए
- गुड बैक्टीरिया को वैज्ञानिक भाषा में प्रोबायोटिक्स कहा जाता है। ये हमारी आंतों में पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने से लेकर इम्युनिटी मजबूत करने तक कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
- कैसे पता किया जाए कि हमारे शरीर में गुड बैक्टीरिया की पर्याप्त मात्रा है या नहीं?
गुड बैक्टीरिया शरीर के लिए बहुत जरूरी
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिन लोगों में गुड बैक्टीरिया का संतुलन सही नहीं रहता है, उनमें पेट से संबंधित समस्याओं के साथ कई अन्य तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
गुड बैक्टीरिया आंतों की परत को मजबूत बनाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा घटता है। अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य और मूड को ठीक रखने में इन बैक्टीरिया की भूमिका होती है।
अब सवाल ये है कि आखिर पता कैसे किया जाए कि हमारे शरीर में गुड बैक्टीरिया की पर्याप्त मात्रा है या नहीं?
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जिन लोगों में गुड बैक्टीरिया का संतुलन सही नहीं रहता है उन्हें कई तरह की दिक्कतें होती रह सकती हैं। इन्हीं लक्षणों की मदद से जाना जा सकता है कि बैक्टीरिया का संतुलन कैसा है।
अगर आंतों में में गुड बैक्टीरिया कम हो जाएं तो कब्ज, गैस, एसिडिटी, डायरिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बार-बार एंटीबायोटिक लेने, जंक फूड खाने और तनाव में रहने से इनका संतुलन बिगड़ सकता है।
- पाचन की दिक्कतें
यदि गुड बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है, तो पाचन संबंधित समस्याएं जैसे गैस, सूजन या अपच बढ़ सकती हैं। आप अक्सर पेट में भारीपन या असहजता महसूस कर सकते हैं। गुड बैक्टीरिया पाचन में सहायक होते हैं।अगर इनकी संख्या कम होती है, तो पाचन सही तरीके से नहीं हो पाता।
- अक्सर बनी रहती है थकान
आंत के बैक्टीरिया का एक महत्वपूर्ण काम शरीर के लिए पोषक तत्वों का अवशोषण करना भी होता है। जब बैक्टीरिया का संतुलन खराब होता है, तो पोषक तत्वों के अवशोषण में कमी हो सकती है, जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी और लगातार थकावट महसूस होती है।
- कमजोर हो जाती है इम्युनिटी
गुड बैक्टीरिया शरीर की इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं। यदि इन बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है, तो शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे बार-बार सर्दी, बुखार या संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- मूड स्विंग का खतरा
गट और ब्रेन के बीच भी एक कनेक्शन होता है जिसे 'गट-ब्रेन कनेक्शन' कहते हैं। गुड बैक्टीरिया का असंतुलन मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है, जिससे अवसाद, चिंता और मूड स्विंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- वजन घटने या बढ़ने की दिक्कत
गुड बैक्टीरिया शरीर के वजन को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। अगर बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है, तो इससे वजन बढ़ने या घटने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों का अवशोषण भी प्रभावित हो सकता है, जिससे वजन में बदलाव आ सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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