मौजूदा समय की ज्यादातर बीमारियों के लिए जिन कारणों को प्रमुख माना जाता रहा है, उनमें शारीरिक निष्क्रियता और मोटापे की समस्या शीर्ष पर है। वजन बढ़ने को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए सबसे गंभीर और चुनौतीपूर्ण मानते हैं। वजन मापने के मुख्यरूप से दो तरीके हैं, पहला- वेट मशीन जो शरीर का भार बताती है और दूसरा बीएमआई, इसके माध्यम से शरीर में फैट और वजन दोनों के बारे में जाना जा सकता है।
BMI & Health: 30 से अधिक है आपका बीएमआई, तो जानिए क्या हो सकते हैं इसके दुष्प्रभाव?
ऑस्टियोआर्थराइटिस रोग का खतरा
आपके शरीर का वजन जितना अधिक होगा जोड़ों पर उतना ही अधिक दबाव पड़ेगा। यह स्थिति हड्डियों और जोड़ों की कमजोरी और इससे संबंधित समस्याओं जैसे घुटनों में दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, कमर दर्द के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। यदि आपका बीएमआई 25 या उससे अधिक है, तो यह जोड़ों में कठोरता के जोखिम और ऑस्टियोआर्थराइटिस को काफी बढ़ाने वाली हो सकती है। जिन लोगों को पहले से ही घुटने की समस्या है उनके लिए जोखिम और भी अधिक हो सकता है।
फैटी लिवर का हो सकता है जोखिम
अधिक वजन की समस्या का असर आपके लिवर की सेहत पर भी पड़ता है। अगर आपका बीएमआई अधिक है तो इसके कारण लिवर में फैट जमने का भी जोखिम रहता है। समय के साथ, फैटी लिवर रोग के कारण लिवर का सामान्य कार्य प्रभावित होने लगता है, यह सिरोसिस का भी कारण बन सकती है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या थी उन्होंने वजन कम किया तो यह दिक्कत भी ठीक होने लगी।
कार्डियोमायोपैथी को लेकर रहें अलर्ट
कार्डियोमायोपैथी आपके हृदय की मांसपेशियों की समस्याओं को संदर्भित करता है जो हृदय के लिए रक्त पंप करना कठिन बना सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हाई बीएमआई के कारण उच्च रक्तचाप का जोखिम काफी बढ़ जाता है जो कार्डियोमायोपैथी का कारण बन सकता है, इसमें हृदय मोटा और कठोर हो जाता है।
जब हृदय कठोर हो जाता है, तो उसके लिए आपके शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त पंप करना अधिक कठिन हो जाता है। यह समस्या हार्ट अटैक का भी कारण बन सकती है।
इन जोखिमों को लेकर भी बरतें सावधानी
जिन लोगों का वजन अधिक है या मोटापा के शिकार हैं, उनमें कई गंभीर बीमारियों का जोखिम रहता है। अधिक बीएमआई के कारण आपमें इन बीमारियों का भी खतरा हो सकता है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स का उच्च स्तर (डिस्लिपिडेमिया)।
- टाइप-2 डायबिटीज।
- धमनियों से संबंधित।
- पित्ताशय का रोग।
- स्लीप एपनिया और सांस लेने में समस्या।
- जीवन की गुणवत्ता में कमी।
- मानसिक बीमारी जैसे अवसाद और चिंता की समस्या।
- शरीर में दर्द और शारीरिक कामकाज में कठिनाई।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।