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विशेषज्ञों से जानिए: क्या पोस्ट कोविड समस्याओं को भी कम कर सकती है वैक्सीन? क्या कहते हैं अध्ययन

Fri, 25 Jun 2021 11:47 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 25 Jun 2021 11:47 AM IST
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vaccine could also reduce long covid symptoms, study says
कोरोना से ठीक होने के बाद की समस्याएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। कोरोना की अब तक आई दो लहरों, विशेषकर दूसरी लहर ने लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से प्रभावित किया है। दूसरी लहर में संक्रमण की गंभीरता के कारण लोगों की मौत के भी मामले भी ज्यादा देखे गए। हालांकि, जैसे-जैसे देश सामान्य स्थिति में लौट रहा है, सरकारों ने लगी पाबंदियों को भी हटाना शुरू कर दिया है। इन सबके बीच कोरोना की संभावित तीसरी लहर लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। इसके अलावा कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में कई तरह के पोस्ट कोविड सिंड्रोम के मामले भी देखे जा रहे हैं।


कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को टीकाकरण कराने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या वैक्सीनेशन से पोस्ट कोविड सिंड्रोम (जिसे लॉन्ग कोविड भी कहा जाता है) की समस्याओं को भी कम किया जा सकता है? आइए इस लेख में इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

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कोविड-19 के बाद बुखार और सिरदर्द की समस्या - फोटो : Social media

क्या हैं पोस्ट कोविड समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से मुकाबले के दौरान हमारे शरीर में मौजूद मायक्रोन्यूट्रिएंट की काफी खपत हो जाती है, यही कारण है कि लोगों को ठीक होने के बाद भी काफी कमजोरी महसूस होती है। इस कमजोरी को ठीक होने में एक से दो महीने का वक्त लग सकता है। पोस्ट कोविड समस्याओं के रूप में लोगों को गंभीर थकान, कमजोरी और पैरों में दर्द की समस्या का अनुभव हो सकता है। ऐसे में लोगों को पूरा आराम करने और खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। कोरोना के दौरान शरीर में हुई मायक्रोन्यूट्रिएंट की कमी को जल्द से जल्द दूर करने के प्रयास करने चाहिए। 

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लॉन्ग कोविड में वैक्सीन है असरदार - फोटो : pixabay

पोस्ट कोविड समस्याओं में कितनी प्रभावी है वैक्सीन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों को वैक्सीन से न सिर्फ अगले संक्रमण से लड़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज प्राप्त हो सकती हैं साथ ही यह  पोस्ट कोविड के लक्षणों को ठीक करने में भी मदद कर सकती है। ब्रिटेन में हुए एक प्री-प्रिंट अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया है कि वैक्सीनेशन लॉन्ग कोविड के लक्षणों को ठीक करने में भी सहायक है, इस अध्ययन का फिलहाल पीर रिव्यू नहीं किया गया है।
अध्ययन के लिए कोरोना संक्रमित अस्पताल में भर्ती रह चुके 66 मरीजों को शामिल किया गया। इनमें से 44 ने टीकाकरण करा लिया था जबकि 22 का टीकाकरण नहीं हुआ था। अध्ययन की समीक्षा में शोधकर्ताओं ने वैक्सीन ले चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षणों में कमी और तेजी से सुधार देखा। इस आधार पर कोरोना की वैक्सीन को लॉन्ग कोविड में भी फायदेमंद माना जा रहा है।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को 90 दिनों बाद वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना से ठीक होने के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज करीब 3 महीने तक उस व्यक्ति की अगले संक्रमण से रक्षा कर सकती हैं।

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कोविड से ठीक होने के बाद हृदय की समस्याएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

किसी को भी हो सकती है लॉन्ग कोविड की दिक्कत
यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार लॉन्ग कोविड की समस्या किसी को भी हो सकती है, चाहे उसमें कोविड-19 के हल्के लक्षण रहे हों या कोई भी लक्षण न रहे हों। विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 से ठीक होने के कुछ महीनों बाद जब लोगों का इमेजिंग टेस्ट किया गया तो उनके हृदय की मांसपेशियों में क्षति की समस्या देखने को मिली। अध्ययन में  हैरान करने वाली बात यह है कि जिन लोगों में कोविड-19 के हल्के लक्षण थे उनके हृदय की मांसपेशियों में भी क्षति के मामले दिखाई दिए। इस आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना का वायरस लॉन्ग कोविड के रूप में लोगों में हृदय संबंधी समस्याओं का भी कारक बन सकता है। 

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मोटापा ग्रस्त लोगों में लॉन्ग कोविड का ज्यादा खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

इन लोगों में लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक
हाल ही में डायबिटीज, ओबेसिटी और मेटाबॉलिज्म नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मोटापा ग्रस्त लोगों में लॉन्ग कोविड-19 जटिलताएं ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक में कोविड-19 से ठीक हो चुके 2,839 रोगियों पर किए गए अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। प्रमुख शोधकर्ता अली अमीनियन बताते हैं कि अध्ययन के दौरान हमने मोटापा से ग्रसित लोगों में कोविड-19 के कारण होने वाली जटिलताएं, अन्य लोगों की तुलना में अधिक देखी हैं।

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नोट: यह लेख ब्रिटेन में हुए एक प्रीप्रिंट अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इस अध्ययन का फिलहाल पीर रिव्यू नहीं किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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