दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण के दोबारा से बढ़ते मामले और तीसरी लहर को लेकर आशंका, लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। कई अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती है, इसका मुख्य कारण उन्हें अब तक वैक्सीन न मिल पाना है। इन सभी डर और आशंकाओं के बीच एक अध्ययन में बच्चों को लेकर राहत भरे दावे किए गए हैं। द लैंसेट चाइल्ड एंड अडोलेसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार बच्चों पर कोरोना संक्रमण का ज्यादा असर नहीं हो रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि बच्चे संक्रमित भी हो जाते हैं तो ज्यादातर में छह दिनों के भीतर ही लक्षण कम हो जा रहे हैं।
राहत की खबर : बच्चों में कोरोना संक्रमण का खतरा कम, अध्ययन में सामने आईं बड़ी बातें
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बच्चों में कोरोना के असर को जानने के लिए अध्ययन
माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वालों द्वारा स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से साझा किए गए आंकड़ों के आधार पर यह अध्ययन किया गया है। इसमें 5 से 17 साल के ढाई लाख से अधिक बच्चों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महामारी की तीसरी लहर में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जताई जा रही चिंता के बीच यह अध्ययन अनेकों माता-पिता को सुकून देने वाली है। बच्चों में कोरोना का संक्रमण बहुत ज्यादा प्रभावित करता हुआ नहीं देखा गया है।
बच्चों में कोरोना के गंभीर संक्रमण का खतरा बेहद कम
सितंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच एकत्र की गई रिपोर्ट में 1,734 बच्चों को कोरोना से संक्रमित पाया गया। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने बच्चों में संक्रमण की अवधि और उसकी गंभीरता के बारे में जानने की कोशिश की। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर बच्चों में कोरोना के लक्षण 5-7 दिनों में ठीक हो जा रहे हैं। इसके अलावा बच्चों में कोरोना के गंभीर लक्षण भी बहुत ही कम देखने को मिले। ज्यादातर बच्चों में कोरोना के एसिम्टोमैटिक लक्षणों का निदान किया गया। वहीं लक्षण वाले बच्चों में ज्यादार को सिरदर्द, थकान, गले में खराश, बुखार के साथ गंध और स्वाद न आने की दिक्कतें महसूस हो रही थीं।
बच्चों में लॉन्ग कोविड का खतरा कम
किंग्स कॉलेज लंदन में शोधकर्ता और अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक डॉ एरिका मोल्टेनी कहती हैं, आंकड़ों के अध्ययन के दौरान हमने पाया कि 5 से 11 वर्ष की आयु वाले बच्चों की तुलना में 12 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के बड़े बच्चों में बीमारी के लक्षण थोड़े अधिक हो सकते हैं, हालांकि लक्षणों के गंभीर होने की आशंका फिर भी कम ही है। इसके अलावा चूंकि बच्चों में कोरोना का संक्रमण के कारण मस्तिष्क या फेफड़ों से संबंधित दिक्कतें नहीं देखी गई हैं, ऐसे में कहा जा सकता है कि बच्चों में लॉन्ग कोविड विकसित होने का खतरा भी बेहद कम होता है।
कोरोना से रखें बच्चों को सुरक्षित
किंग्स कॉलेज लंदन में वरिष्ठ सलाहकार और अध्ययन के लेखक माइकल एब्सौड कहते हैं, अध्ययन का निष्कर्ष राहत देने वाला है, हालांकि इस आधार पर बच्चों को सुरक्षा दायरे से बाहर नहीं जाने देना होगा। कई हिस्सों में कोविड के प्रसार को कम करने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में छूट दी गई है, ऐसे में बीमारी की व्यापकता बढ़ने की संभावना है। कोरोना की तीसरी लहर कितनी प्रभावी होगी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है, ऐसे में बच्चों को सुरक्षित रखना आवश्यक है। सरकारों को जल्द से जल्द बच्चों के लिए वैक्सीन की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे इन्हें भी कोरोना से सुरक्षित किया जा सके।
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स्रोत और संदर्भ:
Illness duration and symptom profile in symptomatic UK school-aged children tested for SARS-CoV-2
अस्वीकरण नोट: यह लेख द लैंसेट चाइल्ड एंड अडोलेसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।