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इंडियन टॉयलेट vs वेस्टर्न टॉयलेट: सेहत के लिए कौन सा है बेहतर? जानिए डॉक्टरों की नजर में क्या है सही
Mon, 31 Aug 2026 02:03 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 31 Aug 2026 02:03 PM IST
सार
Indian vs Western Toilet: इंडियन या फिर वेस्टर्न टॉयलेट, आपकी हेल्थ के लिए क्या बेहतर होती है, आइए जानते हैं, ताकि आप अपने घर पर वही लगवा सकें।
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इंडियन टॉयलेट सेहत के लिए बेहतर या वेस्टर्न?
- फोटो : AI
Indian vs Western Toilet: टॉयलेट का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंडियन टॉयलेट या वेस्टर्न टॉयलेट में से कौन सा आपकी सेहत के लिए बेहतर है? टॉयलेट की पोजीशन सिर्फ आराम से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध मल त्याग की प्रक्रिया, घुटनों पर पड़ने वाले दबाव और शरीर की मुद्रा से भी हो सकता है।
इंडियन टॉयलेट सेहत के लिए बेहतर या वेस्टर्न?
- फोटो : AI
इंडियन टॉयलेट से हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?
इंडियन टॉयलेट में व्यक्ति उकड़ू यानी स्क्वाटिंग पोजीशन में बैठता है। इस स्थिति में कूल्हे घुटनों से नीचे आ जाते हैं और शरीर आगे की ओर झुकता है। माना जाता है कि यह मुद्रा मल त्याग के दौरान मलाशय और गुदा के बीच के कोण को अधिक अनुकूल बना सकती है, जिससे कुछ लोगों को मल त्याग आसानी से हो सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इंडियन टॉयलेट हर व्यक्ति के लिए बेहतर है। जिन लोगों को घुटनों में दर्द, गठिया, कूल्हों की समस्या या संतुलन बनाने में परेशानी है, उनके लिए लंबे समय तक स्क्वाट करना मुश्किल और असहज हो सकता है।
इंडियन टॉयलेट में व्यक्ति उकड़ू यानी स्क्वाटिंग पोजीशन में बैठता है। इस स्थिति में कूल्हे घुटनों से नीचे आ जाते हैं और शरीर आगे की ओर झुकता है। माना जाता है कि यह मुद्रा मल त्याग के दौरान मलाशय और गुदा के बीच के कोण को अधिक अनुकूल बना सकती है, जिससे कुछ लोगों को मल त्याग आसानी से हो सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इंडियन टॉयलेट हर व्यक्ति के लिए बेहतर है। जिन लोगों को घुटनों में दर्द, गठिया, कूल्हों की समस्या या संतुलन बनाने में परेशानी है, उनके लिए लंबे समय तक स्क्वाट करना मुश्किल और असहज हो सकता है।
इंडियन टॉयलेट सेहत के लिए बेहतर या वेस्टर्न?
- फोटो : AI
वेस्टर्न टॉयलेट कब हो सकता है बेहतर?
वेस्टर्न टॉयलेट में व्यक्ति सीट पर बैठता है, इसलिए इसमें नीचे बैठने और उठने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है। यही कारण है कि बुजुर्गों और उन लोगों के लिए यह ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है जिन्हें घुटनों, कूल्हों या पैरों से जुड़ी परेशानी है।
लेकिन वेस्टर्न टॉयलेट इस्तेमाल करते समय शरीर की मुद्रा भी महत्वपूर्ण है। जरूरत से ज्यादा देर तक टॉयलेट सीट पर बैठना और मोबाइल चलाते रहना सही आदत नहीं मानी जाती। लंबे समय तक बैठे रहने से टॉयलेट पर अनावश्यक समय बिताने की आदत बन सकती है।
वेस्टर्न टॉयलेट में व्यक्ति सीट पर बैठता है, इसलिए इसमें नीचे बैठने और उठने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है। यही कारण है कि बुजुर्गों और उन लोगों के लिए यह ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है जिन्हें घुटनों, कूल्हों या पैरों से जुड़ी परेशानी है।
लेकिन वेस्टर्न टॉयलेट इस्तेमाल करते समय शरीर की मुद्रा भी महत्वपूर्ण है। जरूरत से ज्यादा देर तक टॉयलेट सीट पर बैठना और मोबाइल चलाते रहना सही आदत नहीं मानी जाती। लंबे समय तक बैठे रहने से टॉयलेट पर अनावश्यक समय बिताने की आदत बन सकती है।
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इंडियन टॉयलेट सेहत के लिए बेहतर या वेस्टर्न?
- फोटो : AI
कब्ज में कौन सा टॉयलेट बेहतर?
कब्ज की समस्या में सिर्फ टॉयलेट का प्रकार बदलना ही समाधान नहीं है। पर्याप्त पानी पीना, फाइबर वाला भोजन करना, नियमित व्यायाम और टॉयलेट की सही आदतें ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। वेस्टर्न टॉयलेट इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति पैरों के नीचे छोटा फुटस्टूल रखकर घुटनों को कूल्हों से थोड़ा ऊपर कर सकते हैं। इससे स्क्वाटिंग जैसी मुद्रा के करीब पहुंचने में मदद मिल सकती है और कुछ लोगों को मल त्याग में आसानी महसूस हो सकती है।
कब्ज की समस्या में सिर्फ टॉयलेट का प्रकार बदलना ही समाधान नहीं है। पर्याप्त पानी पीना, फाइबर वाला भोजन करना, नियमित व्यायाम और टॉयलेट की सही आदतें ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। वेस्टर्न टॉयलेट इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति पैरों के नीचे छोटा फुटस्टूल रखकर घुटनों को कूल्हों से थोड़ा ऊपर कर सकते हैं। इससे स्क्वाटिंग जैसी मुद्रा के करीब पहुंचने में मदद मिल सकती है और कुछ लोगों को मल त्याग में आसानी महसूस हो सकती है।
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इंडियन टॉयलेट सेहत के लिए बेहतर या वेस्टर्न?
- फोटो : AI
हाइजीन के मामले में कौन बेहतर?
हाइजीन के मामले में सिर्फ टॉयलेट का डिजाइन ही महत्वपूर्ण नहीं है। नियमित सफाई, हाथों को साबुन से धोना और टॉयलेट को साफ रखना ज्यादा जरूरी है। इंडियन और वेस्टर्न दोनों तरह के टॉयलेट अगर ठीक से साफ न किए जाएं तो उनमें गंदगी और कीटाणु जमा हो सकते हैं।
हाइजीन के मामले में सिर्फ टॉयलेट का डिजाइन ही महत्वपूर्ण नहीं है। नियमित सफाई, हाथों को साबुन से धोना और टॉयलेट को साफ रखना ज्यादा जरूरी है। इंडियन और वेस्टर्न दोनों तरह के टॉयलेट अगर ठीक से साफ न किए जाएं तो उनमें गंदगी और कीटाणु जमा हो सकते हैं।