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बड़ी कामयाबी: ओमिक्रॉन ही नहीं, कोरोना के आने वाले वैरिएंट्स को भी बेअसर कर सकती है यह तकनीक, जानिए विस्तार से

Wed, 29 Dec 2021 02:16 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Wed, 29 Dec 2021 02:16 PM IST
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Scientists identified antibodies that neutralise Corona variants, block Omicron variant too
ओमिक्रॉन का कम होगा खतरा - फोटो : iStock

कोरोनावायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट दुनियाभर के लिए मुसीबतों का कारण बना हुआ है। अगस्त-सितंबर के महीने में जहां एक बार ऐसा लगने लगा था कि वायरस अब निष्क्रिय हो गया है, वहीं यह नया वैरिएंट पहले की तुलना में काफी तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है। विशेषज्ञों के कहना है कि एशियाई देशों में जिस तरह से यह वैरिएंट तेजी से बढ़ता जा रहा है, यह निश्चित ही चिंताजनक स्थिति है। अगले 2-3 महीने काफी महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, सभी देशों को ओमिक्रॉन की रफ्तार को रोकने के लिए सख्ती से कदम उठाने की आवश्यकता है।



अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि अब तक के सबसे संक्रामक रहे कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन काफी अधिक संक्रामक है, ऐसे में इससे बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। इस बीच ओमिक्रॉन की रोकथाम और बचाव के उपायों को लेकर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने राहत भरी जानकारी साझा की है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे एंटीबॉडी की पहचान की है जो ओमिक्रॉन और कोरोनावायरस के अन्य प्रकारों को भी बेअसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

Scientists identified antibodies that neutralise Corona variants, block Omicron variant too
कोरोना संक्रमण से बचाव - फोटो : iStock

खास एंटीबॉडी की पहचान
नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि जिस एंटीबॉडी की पहचान की गई है वह कोरोनावायरस के तमाम वैरिएंट्स के उस हिस्से को लक्षित करके उसे बेअसर कर सकती है जो वायरस के म्यूटेशन के दौरान सामान्यतौर पर परिवर्तित नहीं होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस शोध के आधार पर वैक्सीन और एंटीबॉडी उपचार को डिजाइन करने में मदद मिल सकती है, जो न केवल ओमिक्रॉन बल्कि भविष्य में उभरने वाले अन्य वैरिएंट्स के खिलाफ भी प्रभावी होंगे।

Scientists identified antibodies that neutralise Corona variants, block Omicron variant too
कोरोनावायरस के स्पाइक प्रोटीन को किया जाएगा लक्षित - फोटो : PIB

क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन में एसोसिएट प्रोफेसर डेविड वेस्लर कहते हैं, इस अध्ययन के दौरान हमने पाया कि वायरस के स्पाइक प्रोटीन के साइटों को लक्षित करने वाले एंटीबॉडीज को टारगेट करके इसको बढ़ने से रोकने में सफलता मिल सकती है। जैसा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में करीब 37 म्यूटेशनों के बारे में पता चला है, जोकि इसे अत्यधिक संक्रामक और मानव कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश करने के योग्य बनाता है।

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Scientists identified antibodies that neutralise Corona variants, block Omicron variant too
अध्ययन में सामने आई कई रोचक बातें - फोटो : Pixels

अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने सबसे पहले यह जानने की कोशिश की, कोशिकाओं की सतह पर प्रोटीन के अच्छी तरह से बाइंडिंग में अलग-अलग वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन कितने सक्षम हो सकते हैं? इस प्रोटीन को एंजियोटेंसिन कनवर्टिंग एंजाइम -2 (एसीई 2) रिसेप्टर कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि महामारी की शुरुआत में सामने आए वायरस में पाए जाने वाले स्पाइक प्रोटीन की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन इसके 2.4 गुना बेहतर ढंग से बाइंडिंग में सक्षम थे। जिसका मतलब है कि कोरोना का यह नया रूप अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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Scientists identified antibodies that neutralise Corona variants, block Omicron variant too
बूस्टर डोज से मिलेगी सुरक्षा - फोटो : istock

बूस्टर डोज को लेकर दिया गया जोर
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि कोरोना के पहले के स्ट्रेनों से संक्रमित रह चुके और वैक्सीनेशन करा चुके लोग, दोनों में ही संक्रमण को रोकने की क्षमता कम हो गई थी। इस आधार पर प्रोफेसर डेविड वेस्लर कहते हैं, ओमिक्रॉन संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन की तीसरी खुराक वास्तव में मददगार हो सकती है। सभी देशों को इस बारे में विचार करने की आवश्यकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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