तनाव की स्थिति कई प्रकार की भावनात्मक या शारीरिक समस्याओं के कारण हो सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं, तनाव कुछ प्रकार की नकारात्मक स्थितियों के खिलाफ होने वाली प्रतिक्रिया है, हालांकि इसका लंबे समय तक बने रहना गंभीर रूप से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। तनाव की गंभीर स्थिति हाई ब्लड प्रेशर से लेकर डिप्रेशन जैसे विकारों का कारण बन सकती है। यही कारण है कि सभी लोगों को तनाव प्रबंधन के उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। तनाव के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने और इससे बचाव के तरीकों के बारे में बताने के लिए हर साल नवंबर के पहले बुधवार को नेशनल स्ट्रेस अवेयरनेस डे मनाया जाता है।
National Stress Awareness Day: तनाव के कारण शारीरिक समस्याओं का भी बढ़ जाता है खतरा, ऐसे कंट्रोल करें स्ट्रेस
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तनाव का शारीरिक स्वास्थ्य पर असर
शोधकर्ताओं ने पाया कि तनाव की स्थिति कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। अगर लंबे समय तक तनाव पर कंट्रोल न किया जाए तो यह डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। इसके अलावा क्रोनिक तनाव के कारण उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, मधुमेह, मोटापा, अवसाद या चिंता विकार, त्वचा की समस्याएं और मासिक धर्म की समस्याओं का भी खतरा हो सकता है।
तनाव किसी भी उम्र में हो सकती है, ऐसे में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इससे बचाव के उपायों का पालन करते रहना चाहिए।
तनाव प्रबंधन के लिए क्या करें?
यदि आपमें तनाव के लक्षण हैं, तो इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। लाइफस्टाइल और खान-पान संबंधी आदतों में सुधार करके तनाव को प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।
- नियमित शारीरिक गतिविधि, योग-व्यायाम करें।
- गहरी सांस वाले अभ्यास, मेडिटेशन और लाफिंग योग आदि से भी तनाव में राहत मिलती है।
- परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
- अपने शौक वाली चीजें करें जैसे किताब पढ़ना या संगीत सुनना आदि।
- उन चीजों या लोगों से दूरी बनाकर रखें जिनसे तनाव की समस्या ट्रिगर होती है।
- भरपूर नींद लें और स्वस्थ-संतुलित आहार का सेवन करें।
- तंबाकू के सेवन, कैफीन और शराब आदि के कारण तनाव की समस्या बढ़ने का खतरा हो सकता है।
समय पर मनोचिकित्सक की मदद जरूरी
यदि इन उपायों को करने से भी तनाव में लाभ नहीं मिलता है और यह बढ़ती जाती है तो बिना देर किए किसी मनोचिकित्सक से जरूर सलाह ले लें। समय पर इलाज और थेरपी मिलने से न सिर्फ लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है साथ ही इससे डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
डॉक्टरी सहायता लेने में बिल्कुल न हिचकें। शरीर की तमाम समस्याओं और बीमारियों की ही तरह मानसिक स्वास्थ्य विकारों का भी इलाज हो सकता है। अपने आसपास के लोगों के भी मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखें।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।