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National Epilepsy Day: झाड़-फूंक और अंधविश्वास बढ़ा सकती है दिक्कत, जानिए मिर्गी के कारण और शुरुआती संकेत

Thu, 17 Nov 2022 02:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 17 Nov 2022 02:37 PM IST
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National Epilepsy Day, what are the causes, symptoms and treatment of epilepsy
मिर्गी आने के कारण और इलाज - फोटो : istock

मिर्गी उन स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है जिसको लेकर देश में कई प्रकार का भ्रम और अंधविश्वास देखने को मिलता रहा है। मिर्गी के शिकार लोगों को दौरे पड़ने की दिक्कत हो सकती है, ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में अब भी लोग इसके लिए झाड़-फूंक जैसे उपाय करते रहते हैं। मिर्गी के इसी भ्रम को दूर करने और लोगों को इस बारे में जागरूक करने के लिए हर साल 17 नवंबर को नेशनल एपिलेप्सी डे मनाया जाता है।



डॉक्टर कहते हैं, मिर्गी की दिक्कत को इलाज के माध्यम से ठीक किया जा सकता है, झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्करों में पड़ना रोग की जटिलताओं को समय के साथ बढ़ाने का कारण हो सकता है।

मिर्गी, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) से संबंधित विकार है जिसमें मस्तिष्क की गतिविधि असामान्य हो जाती है। इसके कारण दौरे पड़ने, असामान्य व्यवहार, संवेदनाओं में कमी और कभी-कभी  बेहोशी की समस्या भी हो सकती है। चूंकि यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, ऐसे में इसका समय पर उपचार करके रोग की गंभीरता को कम करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मिर्गी के इलाज के लिए झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्करों में न पड़ें, यह लाइलाज नहीं है, दवाइयों और उपचार के अन्य माध्यमों से इसे ठीक किया जा सकता है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।

National Epilepsy Day, what are the causes, symptoms and treatment of epilepsy
मिर्गी के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay

क्यों होती है मिर्गी की दिक्कत?

मिर्गी किसी को भी हो सकती है, लेकिन आमतौर पर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में इसका जोखिम अधिक होता है। साल 2021 में प्रकाशित शोध के अनुसार, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मिर्गी का जोखिम अधिक देखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित लगभग आधे से अधिक लोगों में इसका कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता है।

एपिलेप्सी फाउंडेशन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने पहली बार 1990 के दशक में मिर्गी से जुड़े जीन की पहचान की थी। इसके अलावा कुछ और कारक हो सकते हैं, जो मिर्गी का जोखिम बढ़ा देते हैं।

  • मस्तिष्क की चोट।
  • गंभीर बीमारी के दुष्प्रभाव का तंत्रिका पर असर
  • मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी।
  • ब्रेन ट्यूमर या सिस्ट।
  • गर्भावस्था में कुछ दवाइयों के सेवन के दुष्प्रभाव, प्रसवपूर्व चोट, मस्तिष्क की विकृति या जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी।
  • आनुवंशिक या तंत्रिका संबंधी रोग।
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मिर्गी के संकेतों पर गंभीरता से दें ध्यान - फोटो : istock

ऐसे लक्षण होते हैं मिर्गी का संकेत

मिर्गी के शिकार लोगों में दौरे पड़ने को प्रमुख लक्षण माना जाता है। इसके अलावा तंत्रिका की समस्या के आधार पर अलग-अलग प्रकार की दिक्कतों का भी जोखिम हो सकता है। 

  • अस्थायी रूप से भ्रम की स्थिति।
  • दौरे पड़ने के दौरान मुंह से झाग आना।
  • मांसपेशियों का सख्त हो जाना।
  • हाथ और पैर पर काबू न होना।
  • चेतना या जागरूकता में कमी।
  • मनोवैज्ञानिक लक्षण जैसे डर, चिंता।

वैसे तो झटके कुछ समय में ठीक हो जाते हैं पर अगर ये पांच मिनट से अधिक समय तक रहता है या फिर रोगी को सांस लेने में दिक्कत होती है तो इसे गंभीर संकेत माना जाता है। इसमें आपात उपचार की आवश्यकता होती है।

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मिर्गी आने पर क्या करना चाहिए? - फोटो : istock

किसी को मिर्गी के झटके आएं तो क्या करें?

मिर्गी का इलाज बहुत आवश्यक है, इसके लिए किसी न्यूरोविशेषज्ञ से मदद ली जा सकती है। हर बार झटके आने की स्थिति में आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता नहीं होती है, इसमें कुछ बातों का ध्यान रखना घर के लोगों के लिए आवश्यक है। इसे फस्ट ऐड के रूप में ध्यान रखा जाना चाहिए।

  • मिर्गी के दौरा पड़े तो व्यक्ति के होश में आने तक साथ ही रहें। उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाएं।
  • दौरे के समय शांत रहें।
  • सांस लेने में मदद करने के लिए करवट लिटाएं।
  • किसी भी खतरनाक वस्तु को उनसे दूर हटा दें।
  • सिर के नीचे कोई मुलायम चीज रखें।
  • अगर वे चश्मा लगाते हैं, तो उसे हटा दें।
  • जब तक व्यक्ति पूरी तरह से सचेत न हो जाए, तब तक उन्हें खाना या पानी की चीजें न दें।
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मिर्गी का हो सकता है इलाज - फोटो : istock

मिर्गी का इलाज

आमतौर पर दवाओं के माध्यम से मिर्गी को ठीक करने का प्रयास किया जाता है। यदि दवाओं से राहत नहीं मिलती है तो डॉक्टर सर्जरी या अन्य प्रकार के उपचार का सुझाव दे सकते हैं। सर्जरी में मस्तिष्क के उस हिस्से या तंत्रिका को हटाया या ठीक किया जाता है जो दौरे पड़ने का कारण बनती है। दवा के साथ प्रारंभिक उपचार के माध्यम से तंत्रिकाओं के विकार को कम करने और दौरे पड़ने के जोखिमों को रोकने में मदद मिल सकती है। इलाज के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है, ऐसे में अंधविश्वास में न फसें और समय रहते इस समस्या का उपचार कराएं।



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स्रोत और संदर्भ

Explaining epilepsy

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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