हमारे दिमाग की अरबों तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) हर पल यादों को संजोने, सोचने-समझने, फैसले लेने और शरीर को नियंत्रित करने का काम कर रही हैं। लेकिन अगर इन्हीं कोशिकाओं के भीतर धीरे-धीरे ऐसे विषैले प्रोटीन जमा होने लगें, जो अंततः उन्हें अंदर से खत्म कर दें, तो क्या होगा? यही प्रक्रिया अल्जाइमर, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (एफटीडी) और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) जैसी गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों की सबसे बड़ी पहेली बनी हुई थी।
Brain Health: ब्रेन सेल्स को मारने वाले 'विषैले प्रोटीन' का खुला राज, अल्जाइमर से लड़ाई में जगी नई उम्मीद
ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक नई कोशिका-मृत्यु प्रक्रिया की पहचान की है, जिसे 'कैरियोप्टोसिस नाम दिया गया है।
न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के इलाज में होगी आसानी
नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित यह अध्ययन करीब दस वर्षों की लगातार रिसर्च का नतीजा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस नई प्रक्रिया को दवाओं के जरिए रोका या धीमा किया जा सके, तो भविष्य में अल्जाइमर, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया और एएलएस जैसी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारियों की प्रगति को धीमा करने वाली नई उपचार पद्धतियां विकसित करना संभव हो सकता है।
यह खोज न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है।
- शोधकर्ताओं ने कैरियोप्टोसिस नामक नई कोशिका-मृत्यु प्रक्रिया की पहचान की है।
- जिसके तहत विषैले प्रोटीन कोशिका के नाभिक को नष्ट कर देते हैं और अंततः तंत्रिका कोशिकाएं डेड होने लगती हैं।
अब तक वैज्ञानिक जानते थे कि अल्जाइमर, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) जैसी बीमारियों में मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर विषैले प्रोटीन जमा होते हैं, लेकिन ये प्रोटीन आखिर कोशिकाओं को किस तरह नष्ट करते हैं, इसका स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पाया था।
समझ में आएगी बीमारी की जैविक प्रक्रिया
नई खोज ने इस महत्वपूर्ण कड़ी से पर्दा उठाया है और बीमारी की जैविक प्रक्रिया को समझने में नई दिशा दी है।
- शोध के अनुसार जब तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर विषैले प्रोटीन लगातार जमा होने लगते हैं तो वे कैरियोप्टोसिस नामक रासायनिक प्रक्रिया को सक्रिय कर देते हैं।
- इस प्रक्रिया के दौरान कोशिका का नाभिक, जिसमें उसकी पूरी आनुवंशिक जानकारी सुरक्षित रहती है, धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है। इसके बाद नाभिक की बाहरी झिल्ली कमजोर होकर टूट जाती है और अंततः पूरी कोशिका नष्ट हो जाती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल्जाइमर और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में बड़ी संख्या में न्यूरॉन की मौत के पीछे यही प्रक्रिया एक प्रमुख कारण हो सकती है।
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स्रोत:
Scientists may have finally found how Alzheimer's kills brain cells
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